Kargil War

पाकिस्तान ऊंचाई वाले क्षेत्रों पर था और भारतीय सेना को चढ़ाई करते हुए दुश्मनों तक पहुंचना पड़ता था। इस दौरान सैनिकों को भारी समस्याओं से जूझना पड़ा था।

सेना ने वक्त के साथ-साथ अपनी कमजोरियों पर सुधार किया है। वक्त रहते कई स्तर पर काम किए गए हैं और भारत की मौजूद सैन्य क्षमता काफी बढ़िया मानी जाती है।

Kargil War 1999: सेना के वीर सपूतों ने हर मोर्चे पर दुश्मनों को पटखनी देकर यह साबित कर दिया था कि भारत मां की तरफ आंख उठाने वालों को किसी भी तरह से बख्शा नहीं जाएगा।

बीते कुछ दशकों में पहाड़ पर अपने युद्धाभ्यास को काफी गंभीरता से लिया गया है। सियाचिन इनमें से एक है। यहां जवानों ने तमाम चुनौतियों का सामना किया।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में कारगिल युद्ध (Kargil War) लड़ा गया था। इस युद्ध में पाकिस्तान (Pakistan) को बुरी तरह से हराया गया था। पाकिस्तान को हराने के लिए हमारे वीर सपूतों ने जमकर मेहनत की थी।

शुरुआत में इसे घुसपैठ माना गया और दावा किया गया कि इन्हें कुछ ही दिनों में बाहर कर दिया जाएगा। लेकिन खुफिया तंत्र अनुमान पूरी तरह से गलत निकला था।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में लड़ा गया कारगिल का युद्ध (Kargil War) भारतीय सेना (Indian Army) की बहादुर की कहानी है। इस युद्ध में भारतीय जवानों ने दुश्मनों को जो सबक सिखाया था, उसे यादकर पाकिस्तान आज भी थर-थर कांप उठता होगा।

पाकिस्तान ने कारगिल के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों पर धोखे से कब्जा किया था। कारगिल को अगास की भूमि के नाम से भी जाना जाता है।

Kargil War 1999: इस युद्ध में एक जवान ऐसे भी थे जिन्होंने महज 21 साल की उम्र में सबसे बड़े सैन्य सम्मान यानी परमवीर चक्र को अपने नाम किया था।

कई सैनिक परिवार हैं जिनमें दादा से लेकर बेटे और बेटी तक सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसा एक परिवार हरियाणा के झज्जर स्थित गांव पातुवास में भी है।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में लड़े गए कारगिल युद्ध (Kargil War) के दौरान भारतीय सेना (Indian Army) ने कड़ी मशक्कत के बाद युद्ध में जीत हासिल की थी। युद्ध कारगिल की ऊंची पहाड़ियों पर लड़ा गया था।

युद्ध में सूबेदार मेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए पदम देव ठाकुर ने भी हिस्सा लिया था। युद्ध के दिनों को याद करते हुए उन्होंने अपने अनुभव को साझा किया है।

शहीद होने के बाद इस जवान की एक डायरी पिता को मिली थी। इस शहीद के पिता ओम प्रकाश शर्मा ने उनकी डायरी के कुछ अंश साझा किए हैं।

प्रयागराज में रहने वाले रिटायर्ड सूबेदार श्याम सुंदर सिंह पटेल ने इस युद्ध से जुड़े अपने अनुभव को साझा किया है। उन्होंने इस युद्ध में हिस्सा लिया था।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में कारगिल युद्ध लड़ा गया था। इस युद्ध में हमारे जवानों ने अहम भूमिक निभाई थी। जवानों ने दुश्मनों को हर मोर्चे पर विफल साबित करने के लिए माइनस डिग्री तापमान में कड़ी मेहनत की थी।

कहा जाता है कि कुत्तों से ज्यादा वफादार जानवर कोई नहीं होता। कुत्ते अपनी जान की बाजी लगाकर मालिक की रक्षा करने से पीछे नहीं हटते। कई मौकों पर 'खोजी कुत्ते' (Indian Army Dog Squad) सुरक्षा बलों को कई तरह के भारी जानमाल के नुकसान से बचा चुके हैं।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में कारगिल युद्ध लड़ा गया था। इस युद्ध में पाकिस्तान को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था। युद्ध में कैप्टन अमोल कालिया (Captain Amol Kalia) ने बेहद ही शानदार प्रदर्शन किया था।

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