नक्सलवाद का सच

इस समय 90 जिलों में नक्सलवाद (Naxalism) हावी है। आंकड़े बताते हैं कि बीते 3 सालों में 2168 नक्सली हमले हुए हैं, जिसमें 625 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में लगातार नक्सलियों का आत्मसमर्पण (Naxalites Surrender) हो रहा है। राज्य के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में 'लोन वर्राटू' अभियान से प्रभावित होकर पांच नक्सलियों के आत्मसमर्पण किया है।

नक्सली (Naxalites) किसी के सगे नहीं होते। यहां तक कि वे अपने साथियों के भी अपने नहीं होते। इसका उदाहरण देखने को मिला जब छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बीजापुर जिले में नक्सलियों (Naxals) ने अपने ही साथी का अपहरण कर लिया।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में नक्सल विचारधारा को छोड़कर लगातार नक्सलियों का सरेंडर (Naxalites Surrender) हो रहा है। संगठन में हो रही ज्यादती से तंग आकर नक्सली नक्सलवाद (Naxalism) का रास्ता छोड़कर मुख्याधारा में शामिल हो रहे हैं।

सरेंडर करने वाले मिलिशिया सदस्य नक्सलियों धुरबेड़ा निवासी कमलू ध्रुवा, मालू ध्रुवा, गट्टाकाल निवासी राकेश उसेण्डी और गोमागाल डेंगलपुट्टीपारा निवासी हिड़मे कवाची शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ के सिलगेर में आंदोलन जारी है। पुलिस कैंप के विरोध में ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं। पूरे बस्तर में इस आंदोलन का असर दिखाई दे रहा है।

सुकमा में नक्सलियों ने सड़क निर्माण के दौरान पाइप बम के जरिए IED भी प्लांट किया, जिससे जवानों को नुकसान पहुंचे और दंतेवाड़ा में कई जगह सड़कें काट दीं।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में नक्सलियों (Naxalites) के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन में प्रशासन को लगातार सफलता मिल रही है। नक्सली आए दिन सरेंडर (Surrender) कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के नारायणपुर जिले में पांच नक्सलियों ने 4 जून को सरेंडर (Naxalites Surrender) कर दिया। इन नक्सलियों ने नारायणपुर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है।

झारखंड (Jharkhand) के नक्सल प्रभावित गढ़वा जिले में दो महिला नक्सलियों (Women Naxalites) ने सरेंडर (Surrender) किया है। वे नक्सलवाद (Naxalism) का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट आई हैं।

पुलिस ने गुरुवार को 2 नकली AK-47 बरामद की हैं। एसपी ने कहा है कि छोटे कैडर के नक्सलियों (Naxalites) का इसके लिए इस्तेमाल हो रहा है।

Chhattisgarh: ये सिलगेर और दरभा के ग्रामीणों के नजरिए का ही फर्क है। क्योंकि सिलगेर के ग्रामीण जवानों को अपना दुश्मन मान रहे हैं।

नक्सली कोरोना संक्रमण को लेकर झूठ बोल रहे हैं। इसका असर ये हुआ है कि नक्सल प्रभाव वाले अंदरूनी इलाकों में कोरोना तेजी से फैल रहा है।

तेलंगाना में कोरोना से मरने वाले नक्सली (Naxalites) कमांडर कोरसा गंगा उर्फ आयतु से जुड़ा है। इस नक्सली का अंतिम संस्कार सुकमा जिले की पुलिस ने किया है।

अपनी बढ़ती मांग की वजह से नुनूचंद को घमंड होने लगा और वह नक्सली (Naxalites) संगठन की महिलाओं के साथ संबंध बनाने के लिए जबरदस्ती करने लगा।

सुकमा में नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले सिलगेर के जंगल में पुलिस कैंप खुलने का ग्रामीण आदिवासी पिछले 14 दिनों से विरोध कर रहे हैं।

नुनूचंद 5 लाख का इनामी नक्सली है और उसने पीरटांड थाने में शुक्रवार दोपहर सरेंडर किया। उसके सरेंडर करने से दोनों जिलों की पुलिस ने राहत की सांस ली है।