नक्सलवाद का सच

छत्तीसगढ़ के बीजापुर और सुकमा बॉर्डर के पास 3 अप्रैल 2021 को हुए नक्सली (Naxalites) हमले में 22 जवान शहीद हुए थे। ऐसे में कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

Naxalites: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ ताबड़तोड़ अभियान जारी है। बस्तर में बड़े पैमाने पर नक्सल अभियान चलाए जा रहे हैं।

हम आपको बताएंगे कि किस तरह आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में माओवादियों (Maoists) के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। माओवादियों से संबंधित अपराधों में भारी कमी आई है।

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, छत्तीसगढ़ और झारखंड, माओवादियों (Maoists) को रोकने के लिए अभी भी लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

25 लाख के कुख्यात नक्सली (Naxalites) हिडमा को पकड़ने के लिए जवान उसकी मांद में घुस गए थे। हिडमा सुकमा जिले के गांव से नक्सली गतिविधियों को अंजाम देता है।

इस नक्सली घटना के पीछे के मास्टरमाइंड का नाम है माड़वी हिडमा (Madavi Hidma)। ये नक्सली 25 लाख का इनामी है और कई राज्यों में पुलिस के लिए मोस्टवांटेड है।

तीनों नक्सलियों (Naxalites) ने पुलिस की कड़ी सुरक्षा में सरेंडर किया। इस दौरान जिला पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश खिलारी और बीएसएफ के अधिकारी मौजूद रहे।

खबर मिली है कि दंतेवाड़ा में रविवार को 3 नक्सलियों (Naxalites) ने सरेंडर किया है, जिसमें से एक नक्सली एक लाख रुपए का इनामी है।

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में जवानों से भरी बस पर हुए नक्सली हमले का मामला तूल पकड़ रहा है। ऐसे में ये सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या नक्सली एक सोची समझी रणनीति के तहत हमले कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ अभियान जारी है। कई नक्सली मारे जा चुके हैं और कई ने सरेंडर किया है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को कई सरकारी योजनाओं का फायदा दिया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई हो रही है। जिसका असर ये हुआ है कि कई बड़े नक्सली मारे जा चुके हैं।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के धुर नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में नक्सलवाद (Naxalism) के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। जिले में 10 मार्च को नक्सली संगठन के सेक्शन कमांडर सहित 5 नक्सलियों ने सरेंडर (Naxals Surrender) कर दिया।

झारखंड (Jharkhand) में नक्सलियों (Naxalites) पर पुलिस (Jharkhand Police) की कार्रवाई का असर दिख रहा है। राज्य में प्रतिबंधित टीएसपीसी (TSPC) संगठन को बड़ा झटका लगा है।

नक्सली (Naxalites) की पहचान आयतु काराम के रूप में हुई है। वह मिलिशिया सदस्य के रूप में सक्रिय था।नक्सली आयतु ने सुरक्षाबलों के सामने सरेंडर किया।

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के चलगली इलाके में दहशत का नाम बन चुके नक्सली (Naxalites) जोनल कमांडर सीताराम की अनोखी कहानी सामने आई है।

5 सालों तक गया और औरंगाबाद में आतंक फैला चुके सब जोनल कमांडर और नक्सली (Naxalites) संजय सिंह भोक्ता उर्फ राकेश ने सरेंडर कर दिया।

जीवन कंडुलना (Jeevan Kandulna) 2009 में निर्मल के दस्ते में शामिल हुआ और कुछ दिनों बाद बहन के रेप में शामिल युवकों से बदला लिया।

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