सच के सिपाही

अभी 16 जनवरी को ही मनोज ने बेटी का पहला जन्मदिन मनाया था और छह फरवरी को वे वापस ड्यूटी पर कश्मीर चले गये थे। मनोज ने श्रीनगर पहुंचकर वापस फिर से कॉल करने का वादा किया था।

सरकार ऐसा कदम उठाए, जिससे दोबारा फिर कभी भी किसी जवान को इस तरह से अपनी जान ना गंवानी पड़े।

विजय के बड़े बेटे को पिता को खोने का दुख है। पर अब वह भी सेना में जाकर देश की सेवा करना चाहता है। 14 फरवरी को उसका जन्मदिन था और उसी दिन पिता शहीद हो गये। शहीद होने से पहले विजय ने बेटे को जन्मदिन की शुभकामना दी थी।

शहीद रमेश यादव के बेटे आयुष का पैर जन्म से ही टेढ़ा है, जिसका इलाज कराना है। पर डेढ़ साल के बेटे को क्या पता था कि पापा की जगह उनके शहादत की ख़बर आएगी। बेटे का इलाज कराने का वादा करके निकले रमेश को नहीं पता था कि वह अब कभी वापस नहीं आयेंगे।

शहीद तिलक राज के 22 दिन के बेटे ने तो अबतक अपने पिता को ठीक से पहचाना भी नहीं है। उनके जाने के तीन दिन बाद ही उसकी पत्नी को यह मनहूस खबर मिली कि उसका सुहाग उजड़ गया है। तिलक को लोकगायकी का भी शौक था। ड्यूटी के दौरान सीमा पर देश की रक्षा करने वाले तिलक घर पहुंचने पर गाने रिकॉर्ड करते थे। उन्होंने कई पहाड़ी गाने गाए हैं।

तक़दीर का फैसला देखिए कि नसीर ख़ुद बचपन में अनाथ हो गए थे और आज इनके दोनों बच्चे भी अनाथ हो गए।

नितिन शिवाजी राठौर परिवार में कमाने वाले एकमात्र सदस्य थे। किसान परिवार से आने वाले राठौर 2006 में सेना में भर्ती हुए थे। शहादत की खबर सुनकर बूढ़े माता-पिता और परिवार टूट गया है। वहीं संजय राजपूत ने कश्मीर, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर में अपनी सेवाएं दी थीं। उन्होंने सीआरपीएफ में अपनी सेवा और पांच साल के लिए बढ़वा ली थी।

मोहनलाल हमेशा देश की रक्षा को लेकर बच्चों से बातें करते थे। छत्तीसगढ़ में नक्सली क्षेत्र हो या फिर जम्मू के आतंकी क्षेत्र वहां के कई किस्से उन्होंने बच्चों को सुनाए थे। दिसंबर में जब वे घर गए थे तो परिजनों ने उन्हें वीआरएस लेने का सुझाव दिया था। पर उन्होंने कहा कि देश को हमारी जरूरत है। देश की सेवा पूरी करने के बाद ही सेवानिवृत्त होंगे।

अवधेश की शादी तीन साल पहले चंदौली के पूरवा गांव की रहने वाली शिल्पी से साथ हुई थी। इनका एक 2 साल का बेटा निखिल है। अभी बीते मंगलवार को शहीद अवधेश यादव घर से लौटकर ड्यूटी जॉइन किए थे। पर क्या पता था कि ये उनका आख़िरी सफ़र होगा।

एक साल पहले ही उनकी शादी हुई थी। उनकी सिर्फ दो माह की एक बच्ची है। वह चार दिन पहले ही छुट्टी बिताकर वापस जम्मू-कश्मीर ड्यूटी पर लौटे थे। रोहिताश अपने पीछे पत्नी और 2 माह की बच्ची छोड़ गए हैं।

आतंकवादियों के हमले में सिर्फ़ राम वकील शहीद नहीं हुए बल्कि एक पूरा परिवार उजड़ गया। कई सपने दफ़्न हो गए, कई उम्मीदें खत्म हो गईं।

तरफ अपने बेटे की शहादत पर गर्व है, तो दूसरी ओर सरकार पर गुस्सा भी है कि सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई सख्त कदम क्यों नहीं उठा रही है।

आज के दौर में जहां दोस्त, दोस्त का सगा नहीं होता, भाई का भाई से बैर है। वहीं सीआरपीएफ (CRPF)...

हिजबुल के आतंकी बुरहान बानी का एनकाउंटर के वक्त हालात बद से बदतर हो गए थे। उस बिगड़ते माहौल से निपटने के लिए जब इस महिला अफसर ने मोर्चा संभाला तो उपद्रवियों के पैर उखड़ गए।

कमर के नीचे का हिस्सा बुरी तरह जख्मी होने के बावजूद उनके हौसले पस्त नहीं हुए। वे असहनीय दर्द के बावजूद रेंगते हुए आगे बढ़ते रहे और उन्होंने आधा दर्जन नक्सलियों को मार गिराया।

मातृभूमि के प्रति प्यार और सर्वोच्च बलिदान के लिए उनकी तत्परता ने हमारे वीर जवानों की छोटी-सी टुकड़ी को दुश्मनों पर वार करते रहने के लिए हिम्मत दी। उन्होंने दुश्मनों के नापाक इरादों को ध्वस्त करने के लिए अंत तक मोर्चा संभाले रखा।

अकेले 200 नक्सलियों से लड़ते हुए के प्रसाद बाबू ने 9 नक्सलियों को मार गिराया। कई नक्सलियों को घायल कर दिया। बाद में प्रसाद बाबू को नक्सलियों ने पकड़ लिया। उन्हें टॉर्चर किया और उनकी हत्या कर दी।

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