Terror Attack

अलकायदा (Al Qaeda) के आधिकारिक मीडिया विंग अस साहब ने भारत में कथित तौर पर मुसलमानों के उत्पीड़न से संबंधित कुछ वीडियो शेयर किए हैं। इनमें से कुछ वीडियो असम के भी हैं।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रहने वाले मोहम्मद अशरफ उर्फ अली अहमद नूरी बांग्लादेश के रास्ते भारत आया था और वह फर्जी डॉक्यूमेंट्स के जरिए भारतीय पहचान पत्र हासिल कर करीब 10 साल से भारत में रह रहा था।

पाकिस्तान‚ लश्कर–ए–तैयबा और जैश–ए–मोहम्मद जैसे भारत को निशाना बनाने वाले पांच आतंकवादी समूहों (Terror Groups) समेत ‘विदेशी आतंकवादी समूहों (Terror Groups)' के कम से कम 12 समूहों का अड्डा है।

पकड़े गए आतंकियों (Militants) में से तीन को उत्तर प्रदेश‚ दो को दिल्ली और एक को महाराष्ट्र से पकड़ा गया। पुलिस का दावा है कि दबोचे गए आतंकियों में जान मोहम्मद शेख महाराष्ट्र का रहना वाला है।

इजराइल टुरिस्ट साइट्स से आतंकी हमले के इनपुट मिलने के बाद इसे खुफिया एजेंसियों के साथ शेयर किया गया है‚ जिसके बाद एजेंसियां सतर्क हो गई और सुरक्षा व्यवस्था को अलर्ट (Terror Alert) किया गया है।

डीजीपी गुप्ता के अनुसार, शुरुआती छानबीन के दौरान, आतंकी सरूप सिंह (Militant) ने खुलासा किया है कि वह सोशल मीडिया पर विदेशी आतंकी आकाओं (पाकिस्तानी आतंकी) के संपर्क में आया था।

गिरफ्तार जहांगीर हिज्ब-ऊत-तहरीर संगठन से जुड़ा था, लेकिन मूल रूप से वह प्रतिबंधित बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) का सदस्य है।

अल बदर के कथित आतंकी सुहैल बशीर की बाबत अदालत में दायर चार्जशीट में कहा है कि सुहैल बशीर को करीब छह किलो की विस्फोटक आईईडी जम्मू शहर के बाहरी इलाके हिजड़ा में एक बोरे में मिली थी।

बेंगलुरु से दीप्ति मारला को गिरफ्तार किया गया है। ये एक हिंदू है जिसने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया है। इस पर आईएस के खुरासान मॉड्यूल और जम्मू कश्मीर से जुड़े हैंडलर्स के साथ संपर्क रखने का इल्जाम है।

आईएसआई को लगता है कि भारतीय सेना का पूरा फोकस कश्मीर में है। ऐसे में उसे भारत के दूसरे हिस्सों में आतंकी घटना को अंजाम देने में कोई समस्या नहीं होने वाली।

आतंकी मीर से की गई पूछताछ के आधार पर उसके चार आतंकी साथियों (Militants) को भी गिरफ्तार किया गया। इन चारों की पहचान जहूर गनी‚ उमर फारूक वानी‚ फैजान कयूम गनी और शाहनवाज अहमद मीर के रूप में की गई है।

पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान (Pakistan) और वहां की जमीन से चलने वाले आतंकी संगठन ड्रोन के जरिए भारत में हथियार, असलहा-बारूद गिराने का काम कर रहे है।

अयोध्या पर 2005 में आतंवादियों ने हमले की फिराक से परिसर में घुसपैठ की थी। बड़े हमले की प्लानिंग कर राम मंदिर परिसर में घुसे 5-6 आतंकियों के मंसूबों पर सुरक्षा में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) ने पानी फेर दिया था।

ड्रोन पोस्ट से उड़ने वाला जो ड्रोन भारतीय सीमा में दाखिल होगा‚ उसके जरिए पाक न सिर्फ पैसे कमाने की तैयारी में है‚ बल्कि भारत में फिर से दहशत फैलाने की कोशिश की भी रणनीति बनाई है।

मुजफ्फराबाद में आईएसआई (ISI) ने अपनी अध्यक्षता में एक बैठक की थी‚ जिसमें बड़े–बड़े आतंकवादी संगठन के नेता शामिल हुए थे। हिज़बुल मुजाहिदीन‚ लश्कर–ए–तैयबा‚ जैश-ए-मोहम्मद के कई बड़े कमांडर इसका हिस्सा बने थे।

ये तीनों लश्कर-ए-तैयबा (LeT) कमांडर मो. यूसुफ डार उर्फ कांटरू और अबरार नदीम भट के भी संपर्क में थे। इनके पास से गोला बारूद और लश्कर-ए-तैयबा के पोस्टरों के अलावा कुछ और आपत्तिजनक सामग्री जब्त हुई हैं।

सुरक्षा परिषद के अनुसार, ये जघन्य हमले प्रशासनिक व न्यायिक सेवा, मीडिया, स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत लोगों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाकर किए जा रहे हैं।

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