Naxal

Chhattisgarh: पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के अंतर्गत पेड़ापाल पीड़िया गांव के जंगल में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ हुई।

हैरानी की बात ये है कि नक्सली (Naxalites) इन ग्रामीणों को नैमेड़ इलाके से उठा ले गए थे लेकिन इनमें से 17 लोग वापस लौट आए लेकिन 5 ग्रामीण अभी भी लापता हैं।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में नक्सलवाद को रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। सभी जिलों के एसपी को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

पकड़े गए नक्सली (Naxalites) टुनिया, नुआ गांव, चमकपुर और झाड़गांव में पोस्टरबाजी कर रहे थे। इन्होंने जैसे ही पुलिस को देखा, वैसे ही जंगल की तरफ भागने लगे।

उस समय नक्सली घटनाएं चरम पर थीं और पुलिस द्वारा नक्सलियों (Naxal) के घर में घुसकर इस प्रकार की कार्रवाई करना खतरे से खाली नहीं था।

एसपी ने एसआईटी टीम का गठन किया और फौरन कार्रवाई की। एसआईटी टीम ने बहुत ही चालाकी से इन उग्रवादियों (Militants) को पकड़ने में सफलता हासिल की है।

Jharkhand: छापामारी दल ने वैन को रोकने की कोशिश की तो उसका चालक उतरकर भागने लगा। अंधेरे की वजह से चालक भागने में सफल रहा।

यह तीनों नक्सली (Naxalites) इतने खूंखार हैं कि तीनों का काम केवल खूनी खेल रचाना है। ये पुलिस को चकमा देने में बहुत माहिर हैं।

पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि यह तीनों PLFI के उग्रवादी रांची शहर में ही छिपे हुए हैं और किराए का मकान ढूंढ रहे हैं। खबर पक्की होने पर यह कार्रवाई की गई।

Chhattisgarh: पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने ग्रामीणों के जननांगों पर हमला किया था, जिसके बाद से पीड़ितों को चलने-फिरने में परेशानी हो रही है।

बालाघाट (Balaghat) जिले की तहसील में 7 थानों की 12 पुलिस चौकियों में गश्त के लिए सालों से चौकी प्रभारियों को वाहन नहीं दिए गए हैं।

5 लाख के इनामी नक्सली (Naxal) नूनू चंद महतो को उसके ही साथी नक्सलियों ने किडनैप कर लिया है। नूनू चंद महतो नया संगठन बनाने की तैयारी कर रहा था।

हमलावरों ने सहायक आरक्षक सुरेश कुमरे की कुल्हाड़ी से वार करके हत्या कर दी। ये मामला बीजापुर (Bijapur) के कुटरू इलाके का है।

2006 में नक्सलियों और सलवा जुडूम कैंप के बीच हुए हमलों में आदिवासी फंस गए थे। नक्सलियों ने राहत शिविर पर हमला (Naxalite Attack) किया था।

इनमें से कई बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी पीढ़ियों में पहली बार मैट्रिक की परीक्षा पास की है। ये बच्चे साइबर कैफे की सहायता से आगे की पढ़ाई की व्यवस्था कर रहे हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, उसने यह भी दावा किया कि वह 8 साल पहले पुलिस की गाड़ी चलाता था।

छत्तीसगढ़ राज्य बनने के 20 साल बाद धुर नक्सल (Naxal) प्रभावित गांव मारजुम में आजादी के बाद पहली बार सुरक्षाबल के जवान, महिला कमांडो और ग्रामीणों ने मिलकर तिरंगा लहराया।

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