India China Border

अरिंदम बागची (Arindam Bagchi) के अनुसार, पूर्वी लद्दाख में सैनिकों के हटने से ही सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बहाल हो सकती है और द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति का माहौल बन सकता है।

कई दौर की लंबी बातचीत के बाद दोनों देशों ने पिछले महीने पैंगोंग झील इलाके से अपनी सेनाओं को पीछे हटाया। लेकिन पूर्वी लद्दाख के कुछ हिस्सों में अभी भी सेनाओं के हटाने के मुद्दे पर चर्चा जारी है। 

LAC पर डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया तेजी से हो रही है। जानकारी के मुताबिक, दो दिनों में चीन की तरफ से एलएसी पर 200 से ज्‍यादा टैंक्‍स हटा लिए गए। बुधवार से दोनों देशों के बीच डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

पूर्वी लद्दाख में पैंगॉन्ग झील (Pangong) के उत्तरी और दक्षिणी छोर पर तैनात भारत और चीन के अग्रिम पंक्ति के सैनिकों ने पीछे हटना शुरू कर दिया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 11 फरवरी को इसकी जानकारी राज्यसभा में दी।

राज्य मंत्री ने बताया कि पिछले साल अप्रैल-मई माह में चीन ने पश्चिमी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति को बदलने के लिए कई प्रयास किये। हालांकि इन प्रयासों का हमारी सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया है।

बाइडन (Joe Biden) सरकार एक उच्च अधिकारी ने बताया कि अमेरिका सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद–प्रशांत महासागर क्षेत्र में साझा मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए अपने सहयोगियों के साथ खड़ा रहेगा।

विदेश मंत्री (S Jaishankar) ने बताया कि लद्दाख की घटनाओं ने दोनों देशों द्वारा सीमा पर सैनिकों की संख्या को कम करने की प्रतिबद्धता का अनादर किया, बल्कि शांति भंग करने की इच्छा भी जाहिर की।

पूर्वी लद्दाख में कई पवर्तीय इलाके में भारतीय सेना (Indian Army) के करीब 50,000 सैनिक युद्ध की तैयारियों के साथ अभी तैनात हैं। वहीं चीन ने भी इतनी ही संख्या में अपने सैनिकों को तैनात किया है।

एलएसी पर मुश्किल परिस्थितियों में भारतीय जवान (Indian Army) मुस्तैदी से अपनी सीमा की रक्षा के लिए रात-दिन तैनात हैं, जबकि इन हालातों का सामना करना चीनी सैनिकों (PLA Troops) के लिए मुश्किल हो रहा है।

भारत और चीन (China) के बीच पिछले साल मई से ही पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर गतिरोध जारी है। इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए दोनों ही देशों के बीच कई चरणों की बातचीत हो चुकी है लेकिन अब तक कोई ठोस रिजल्ट निकलकर सामने नहीं आया है।

इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन के तहत भारत एक जैसी सोच रखने वाले देशों को साथ ला रहा है, जिससे कि चीन (China) की विस्तारवादी नीतियों का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।

कृष्णमूर्ति (Raja Krishnamoorthi) ने कहा, ‘‘हिंसक आक्रामकता किसी चीज का जवाब नहीं होती और यह बात खासकर वास्तविक नियंत्रण रेखा के मामले में सही है, जो भारत से चीन को अलग करने वाला विवादित सीमा क्षेत्र है।’’

ट्विटर (Twitter) ने ये वादा किया कि इस महीने के आखिर तक वह इस गलती को सुधार लेगा। ड़ाटा संरक्षण विधेयक संबंधी संयुक्त समिति की प्रमुख मीनाक्षी लेखी ने इस बाबत जानकारी साझा की।

कई बार बर्फबारी के कारण रास्ते भी बंद हो जाते हैं। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए सेना ने वहां तैनात सैनिकों (Soldiers) के लिए विशेष तैयारी की है और उनके वहां रहने के चाक-चौबंद इंतजाम के साथ-साथ उनके लिए सभी सुविधा उपलब्ध करायी है।

पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (East Asia Summit) के इस समूह में आसियान के दस देश शामिल हैं। इसके अलावा भारत‚ चीन‚ जापान‚ दक्षिण कोरिया‚ ऑस्ट्रेलिया‚ न्यूजीलैंड‚ अमेरिका और रूस भी इसके सदस्य देश हैं।

दोनों देश (India China) सैनिकों के निर्वासन सहित तीन–चरण के डिसइंगेजमेंट प्रस्ताव पर काम करने के लिए सहमत हुए हैं‚ लेकिन अभी तक जमीन पर कुछ भी नहीं हुआ है।

चीन की धमकी से बेपरवाह अमेरिका ने ताइवान (Taiwan) को अब हार्मोन मिसाइल देने का फैसला किया है। यह मिसाइल बेहद घातक मानी जाती है। हार्पून मिसाइल जमीनी लक्ष्यों के साथ ही युद्धपोतों को तबाह करने में सक्षम है।