भारत-चीन के बीच हुई 12वें दौर की कोर कमांडर लेवल की बातचीत, पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव को कम करने पर हुई चर्चा

दोनों देशों (India China) की इस बातचीत का मकसद हॉट स्प्रिंग, गोगरा और देप्सांग में सैनिकों की वापसी की दिशा में आगे बढ़ने के साथ-साथ पूरे इलाके में तनाव को कम करना है। हालांकि सैनिकों की वापसी की दिशा में कोई और प्रगति नहीं हुई।

Eastern Ladakh

पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) में जारी भारत-चीन (India China) के बीच गतिरोध वाले बिंदुओं से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया की दिशा में आगे बढ़ने के मकसद से 12वें दौर की सैन्य वार्ता 9 घंटे लगातार चलने के बाद समाप्त हो चुकी है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस बातचीत का उद्देश्य 14 महीनों से ज्यादा समय से इस इलाके में जारी गतिरोध को खत्म करना है।

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सूत्रों के मुताबिक, कोर कमांडर स्तर की 12वें दौर की बातचीत पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन की तरफ मोल्डो सीमा बिंदु पर हुई है। जिसकी शनिवार सुबह 10 से शुरू होकर रात 7 बजे तक चली।

सूत्रों ने बातचीत के बारे में कहा कि भारत को हॉट स्प्रिंग और गोगरा में सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पर सकारात्मक नतीजे की उम्मीद है। हालांकि इस बातचीत के परिणाम पर अभी तक दोनों तरफ से कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। आशा की जा रही थी कि इस बातचीत से गोगरा और हॉट स्प्रिंग से सैनिकों की वापसी प्रक्रिया की दिशा में कुछ महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रगति होगी।

बातचीत का यह दौर पिछली बार हुई वार्ता से साढ़े तीन महीने से भी ज्यादा समय के बाद हुई है। इससे पहले 11वें दौर की सैन्य वार्ता 9 अप्रैल को एलएसी पर भारत की ओर चुशुल सीमा बिंदु पर हुई थी, जो कि करीब 13 घंटे तक चली थी।

गौरतलब है कि हाल ही में 14 जुलाई को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन के सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दोनों देशों (India China) के विदेश मंत्री गये थे। जहां पर भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ लद्दाख (Eastern Ladakh) मुद्दे पर चर्चा की थी। इसी के परिणामस्वरूप शनिवार को दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच 12वें दौर की बातचीत संपन्न हुई है।

दोनों देशों (India China) की इस बातचीत का मकसद हॉट स्प्रिंग, गोगरा और देप्सांग में सैनिकों की वापसी की दिशा में आगे बढ़ने के साथ-साथ पूरे इलाके में तनाव को कम करना है। हालांकि सैनिकों की वापसी की दिशा में कोई और प्रगति नहीं हुई।

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