CRPF

नक्सलियों (Naxalites) द्वारा अगवा किए गए सीआरपीएफ (CRPF) के जवान राकेश्वर सिंह मनहास (Rakeshwar Singh Manhas) कल यानी 16 अप्रैल को जम्मू स्थित अपने गांव पहुंचेंगे।

नक्सलियों (Naxalites) द्वारा अगवा किए गए सीआरपीएफ (CRPF) के जवान राकेश्वर सिंह मनहास (Rakeshwar Singh Manhas) कल यानी 16 अप्रैल को जम्मू स्थित अपने गांव पहुंचेंगे।

भारतीय सीएपीएफ (CAPF) के अभियान को सीआरपीएफ के डीजी कुलदीप सिंह ने नई दिल्ली स्थित सीआरपीएफ के शौर्य ऑफिसर्स इंस्टीच्युट में हरी झंडी दिखाई।

Bijapur Encounter: रिहाई के बाद राकेश्वर सिंह का मेडिकल चेकअप किया गया। उन्हें रिहाई मिलने के बाद तर्रेम में 168वीं बटालियन के कैंप में ले जाया गया।

बीजापुर नक्सली मुठभेड़ के बाद आखिरकार 5 दिन बाद नक्सलियों की कैद से कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह मनहास 8 अप्रैल को आजाद हो गए। नक्सलियों (Naxalites) ने उन्हें करीब चार बजे रिहा कर दिया।

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने 9 अप्रैल को शौर्य दिवस मनाया। इस मौके पर वीर सैनिकों की शहादत को नमन करते हुए शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर CRPF के DG कुलदीप सिंह ने चाणक्यपुरी स्थित नेशनल पुलिस मेमोरियल में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए तैनात कोबरा कमांडो (CoBRA Commando) राकेश्वर सिंह मनहास (Rakeshwar Singh Manhas)  को 3 अप्रैल के दिन नक्सलियों ने अगवा कर लिया था।

Bijapur Encounter: रिहाई के बाद राकेश्वर सिंह का मेडिकल चेकअप किया गया। उन्हें रिहाई मिलने के बाद तर्रेम में 168वीं बटालियन के कैंप में ले जाया गया।

नक्सलियों (Naxalites) का कहना है कि राज्य सरकार जब बातचीत के लिए मध्यस्त की घोषणा कर देगी, उसके बाद ही हम सीआरपीएफ के कमांडो को छोड़ेंगे।

नक्सलियों (Naxalites) का कहना है कि राज्य सरकार जब बातचीत के लिए मध्यस्त की घोषणा कर देगी, उसके बाद ही हम सीआरपीएफ के कमांडो को छोड़ेंगे।

डीजी कुलदीप सिंह ने कहा है कि इस नक्सली हमले में 28 नक्सली (Naxalites) मारे गए हैं और ये संख्या बढ़ भी सकती है। इस नक्सली हमले में 24 जवान भी शहीद हुए हैं।

धर्मदेव (Dharmadev) के घर पर आस-पास के लोगों का जमावड़ा लग गया। जिले के अधिकारी भी उनके घर पहुंचे और परिजनों से बात की।

Bijapur Sukma Encounter: मां तीन दिन पहले ही बेटे से मिलकर अपने गांव लौटी थी। मां से मिलने के बाद जुर्री ड्यूटी पर लौटकर सर्च ऑपरेशन में लग गए थे।

Bijapur Sukma Encounter: पहले ऐसे कई हमले हो चुके हैं और हम अपने जवानों को खो चुके हैं। सुरक्षाबलों को निशाना बनाकर नक्सली अपना खौफ बनाए रखना चाहते हैं।

Bijapur Sukma Encounter: नक्सलियों ने सेना को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने के लिए बुलेट, नुकीले हथियार और देसी रॉकेट लॉन्चर का इस्तेमाल किया।

जोनागुड़ा की सैटेलाइट तस्वीरों में कुछ हलचल देख सेना अलर्ट हुई थी। इसके बाद अलग-अलग ऑपरेशन में लगे जवावों को जोनागुड़ा की तरफ एकत्रित होने के लिए कहा गया।

अजय कुमार ने बताया कि ग्रामीणों को नक्सलियों (Naxalites) द्वारा बहला-फुसलाकर मुख्य मार्ग से भटकाया जाता है। लेकिन पुलिस उन्हें समझाती है।

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