विकास का पहिया

जिस जगह लोग अपने ही वाहन से गुजरने से कतराते थे वहां आज महिलाएं ई-रिक्शा चलाकर क्षेत्र के विकास की गौरव गाथा लिख रही हैं।

छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में देसी पर्यटकों के पहुंचने से कम से कम नक्सल प्रभाव जैसे तर्क गले से नीचे नहीं उतरते। विदेशी पर्यटकों की बात करें तो पिछले पांच सालों में इनकी संख्या लगभग दुगनी हो गई है।

85 स्टूडेंट्स जिन्होंने गढ़चिरौली के इग्नू स्टडी-सेंटर से कोर्स पूरा किया है, वे महाराष्ट्र में किसी न किसी क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इसके अलावा 68 स्टूडेंट्स ने बैचलर ऑफ सोशल-वर्क में डिग्री कोर्स किया है ताकि वे अपने गांवों में जाकर वहां सामाजिक विकास का काम कर सकें।

बस्तर की बेटियां इस बदलती दुनिया के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। जहां एक तरफ अकादमिक क्षेत्र में बुलंदी को छू रही हैं। डॉक्टर, इंजीनियर से साथ आईएएस बन रही हैं तो वहीं खेल एवं सिनेमा जगत में भी अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो रही हैं।

अभाव भऱी जिंदगी होने के बावजूद गरीब परिवार के ये बच्चे बेहतर खिलाड़ी के रूप में निखर रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्र के इस गांव के बच्चे मलखंब जैसे साहसिक खेल में महारत हासिल कर रहे हैं।

नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा का कावड़गांव के युवा पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। खासकर वालीबॉल के लिए तो यहां के युवा ही नहीं 4 साल के बच्चे तक दीवाने हैं।

छत्तीसगढ़ के बस्तर की हर्बल चाय ने इस वक़्त पूरी दुनिया में धूम मचाया हुआ है।

नक्सलियों कें खौफ में जीने वाले बस्तर के कोंडागांव में लड़कियों की पहली हॉकी टीम अब देश का नाम रोशन करेगी। आइटीबीपी (इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस) ने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके से 2 साल के लगातार मेहनत के बाद बालिकाओं की हॉकी टीम तैयार करने में सफलता हुई है।

जहां कभी दहशत पलती थी, जहां के जंगलों में नक्सलियों के ट्रेनिंग कैंप हुआ करते थे और जहां टूरिस्ट भी डर के साये में भगवान के दरबार में पूजा किया करते थे... वहां अब शांति, सौहार्द और अहिंसा के फूल खिल रहे हैं

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की नैना राज्य की पहली महिला हैं जिन्होंने किसी पर्वत की चढ़ाई पूरी की है। नैना ने 6,512 मीटर ‘भागीरथी 2’ को फतह कर नया कीर्तिमान बनाया है। भागीरथी-2 हिमालय की सबसे अधिक बर्फीली पहाड़ियों में से एक है, जो उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में है। पुलिस पिता की यह बिटिया जिगर के मामले में पुरुषों को भी मात देती है।

सावित्री बस्तर की ऐसी पहली छात्रा हैं, जिन्होंने आईआईटी क्रैक किया। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में गरीबी और संसाधनों के अभाव का सामना करते हुए अनपढ़ माता-पिता की इस बेटी ने इतिहास रच दिया।

नक्सली हमलों और नक्सलियों के गढ़ के रूप में कुख्यात रहे छत्तीसगढ़ के बस्तर की पहचान अब बदल रही है।...

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झारखंड का लातेहार जिला नक्सली गतिविधियों के कारण हमेशा से चर्चा में रहता है। इसकी भौगोलिक स्थिति भी इसे नक्सलियों की मौजूदगी से पूरी तरह उबरने नहीं दे रही। लेकिन केन्द्र और राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और सरकार के बहुआयामी प्रयास से अब लातेहार का परिदृश्य बहुत हद तक बदलने लगा है।

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