विकास का पहिया

रेलवे की इस अहम योजना के पहले चरण में दल्लीराजहरा से रावघाट के बीच दक्षिण की ओर 95 किलोमीटर रेल लाइन बिछाई जा रही है। प्रस्तावित नई रेल लाइन बैलाडीला और रावघाट माइंस को भिलाई से जोड़ेगी।

छत्तीसगढ़ के बस्तर सहित अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के लिए सरकार ने एक नई पहल की है।

खेत के मेड़ पर आधा दर्जन आम के पेड़ लगे हैं, जो उन्नत किस्म के हैं। सभी पेड़ों में फल भी लग चुका है। संतू की खेती कि एक विशेषता और भी है कि मक्का की खेती हो या सब्जियों की खेती, वह रासायनिक खाद का उपयोग कभी नहीं करते हैं।

माता-पिता ने उसे दंतेवाड़ा के सरकारी आवासीय विद्यालय में लक्ष्मण का दाखिला करवा दिया। इसके बाद लक्ष्मण ने यहीं रह कर पढ़ाई की। बारहवीं पास के करने के बाद उसने नीट की परीक्षा दी। लक्ष्मण ने बताया कि उसके माता-पिता ने उसे गांव आने से मना करते थे।

साल 2019 में जवाहर नवोदय विद्यालय, जमशेदपुर में कक्षा छह में नामांकन के लिए चयनित होनेवाले 80 छात्रों में से 11 छात्र पटमदा, बोड़ाम, कमलपुर, जादूगोड़ा व एमजीएम जैसे नक्सल प्रभावित गांवों के हैं।

सरकार और प्रशासन की निरंतर कोशिशों के बाद आज नक्सल प्रभावित इलाकों की सूरत बदल गई है।

लोगों की जान बचाने के लिए अक्सर अपनी जान जाोखिम में डालना पड़ता है। रास्ते में नक्सलियों का ख़तरा भी रहता है। पर, सुरक्षाबलों की मुस्तैदी के चलते ये सेवा लगातार जारी है।

छत्तीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र बीजापुर, जहां के गांवों में वेटनरी डॉक्टर की कोई सुविधा नहीं थी। ग्रामीण अपने पशुओं का उपचार नहीं करा पाते थे। वहां सीआरपीएफ ने लोगों की समस्या का हल निकाल दिया। सीआरपीएफ ने पहली बार गंगालूर इलाके के पामलवाया में पशु चिकित्सा केंद्र की स्थापना की है। यह देश का पहला पशु औषधालय है जिसको सीआरपीएफ ने खोला है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सल गतिविधियां में पिछले कुछ सालों में लगातार उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। बीते सालों में केंद्र सरकार द्वारा नक्सलियों के खिलाफ चलाई जा रही बहुआयामी रणनीति का असर साफ तौर पर देखा जा सकता है।

A multi pronged strategy against left wing extremism (LWE) by the central government these last few years has resulted in a consistent decline in incidents of violence in Naxal affected areas.

जिस जगह लोग अपने ही वाहन से गुजरने से कतराते थे वहां आज महिलाएं ई-रिक्शा चलाकर क्षेत्र के विकास की गौरव गाथा लिख रही हैं।

छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में देसी पर्यटकों के पहुंचने से कम से कम नक्सल प्रभाव जैसे तर्क गले से नीचे नहीं उतरते। विदेशी पर्यटकों की बात करें तो पिछले पांच सालों में इनकी संख्या लगभग दुगनी हो गई है।

85 स्टूडेंट्स जिन्होंने गढ़चिरौली के इग्नू स्टडी-सेंटर से कोर्स पूरा किया है, वे महाराष्ट्र में किसी न किसी क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इसके अलावा 68 स्टूडेंट्स ने बैचलर ऑफ सोशल-वर्क में डिग्री कोर्स किया है ताकि वे अपने गांवों में जाकर वहां सामाजिक विकास का काम कर सकें।

बस्तर की बेटियां इस बदलती दुनिया के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। जहां एक तरफ अकादमिक क्षेत्र में बुलंदी को छू रही हैं। डॉक्टर, इंजीनियर से साथ आईएएस बन रही हैं तो वहीं खेल एवं सिनेमा जगत में भी अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो रही हैं।

अभाव भऱी जिंदगी होने के बावजूद गरीब परिवार के ये बच्चे बेहतर खिलाड़ी के रूप में निखर रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्र के इस गांव के बच्चे मलखंब जैसे साहसिक खेल में महारत हासिल कर रहे हैं।

नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा का कावड़गांव के युवा पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। खासकर वालीबॉल के लिए तो यहां के युवा ही नहीं 4 साल के बच्चे तक दीवाने हैं।

छत्तीसगढ़ के बस्तर की हर्बल चाय ने इस वक़्त पूरी दुनिया में धूम मचाया हुआ है।

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