Chhattisgarh

शुक्रवार सुबह नक्सलियों (Naxalites) ने जवान का शव हत्या करने के बाद गंगालुर-बीजापुर रोड पर फेंक दिया। ये जवान 7 दिनों से लापता था।

दंतेवाड़ा में लोन वर्राटू (घर वापस आइए) अभियान के तहत 108 नक्सली (Naxalites) आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इनमें कई तो लाखों रुपए के इनामी हैं।

CRPF अधिकारी ने अपनी सर्विस रायफल से खुद को गोली मारी है। ये जानकारी पुलिस ने बुधवार को दी है। शिवानंद कर्नाटक के रहने वाले थे।

छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों पर लगाम लगाने के लिए अब ड्रोन (Drone) का इस्तेमाल किया जा रहा है। सुकमा में 9 सितंबर को पहली बार इस तरह से इस्तेमाल हुआ।

लोन वर्राटू अभियान (घर वापस आइए) के तहत बीते 70 दिनों में 108 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। अब वह अपने घर पर रहकर ही रोजगार शुरू कर रहे हैं।

सुकमा जिले में 21 मार्च को हुई इस मुठभेड़ के 7 महीने बाद नया खुलासा हुआ है। अब जानकारी सामने आई है कि इस मुठभेड़ में कुल 23 नक्सली (Naxalites) मारे गए थे।

नक्सल प्रभावित राज्य छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में विकास की बयार बहने लगी है। नक्सलियों के खिलाफ की जा रही सख्ती से प्रदेश में लाल आतंक की जड़ें भी लगातार कमजोर हो रही हैं।

दंतेवाड़ा में नक्सलियों (Naxalites) के खिलाफ ऑपरेशन को तेज कर दिया गया है। जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है।

नक्सली (Naxalites) लोगों को पुलिस का मुखबिर बताकर परेशान कर रहे हैं। कई लोगों को तो उन्होंने यही कारण देकर गांव से बेदखल कर दिया है।

नक्सलियों (Naxalites) ने किडनैपिंग के बाद धारदार हथियारों से रेंजर रथराम पटेल के शरीर पर कई वार किए, जिससे रेंजर की मौके पर ही मौत हो गई।

नक्सली (Naxalites) पहले से इस ट्रक की राह तके बैठे थे, बुधवार को उन्होंने इस ट्रक में आग लगाने की कोशिश की। हालांकि उनके आग लगाने के मंसूबे पूरे नहीं हुए।

बीजापुर से 35 किमी दूर स्थित पुसनार और मेटापाल गांव में बीते 2 दिन पहले नक्सली (Naxalites) पहुंचे थे और दोनों गांवों से 26 ग्रामीणों का अपहरण कर लिया।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में कोरोना (Coronavirus) संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने आवास में आइसोलेट हो गए हैं‚ क्योंकि उनके स्टाफ के कई लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

पुलिस दिन-रात नक्सलियों (Naxalites) के मूवमेंट पर नजर बनाए हुए है। रात में पुलिस उनके ठिकानों पर दबिश दे रही है। जवानों ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया है।

आयता ने भी जिंदगी के करीब 13 से इसी मुगालते में गुजार दिए कि वह अपने समाज और आदिवासियों के हितों की लड़ाई लड़ रहा है। पर, जब असलियत से सामना हुआ तो संगठन में उसका दम घुटने लगा।

प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक माओवादियों (Maoists) ने 2006 से जुलाई 2020 तक मुखबिरी के शक में 294 हत्याएं कीं।

Chhattisgarh: पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने ग्रामीणों के जननांगों पर हमला किया था, जिसके बाद से पीड़ितों को चलने-फिरने में परेशानी हो रही है।

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