सच के सिपाही

आतंकियों से लड़ने के साथ सेना को आम लोगों की भी परवाह होती है। उनके दुख-तकलीफों को दूर करने के लिए अगर उन्हें किसी हद तक भी जाना पड़े तो वह परवाह नहीं करते।

भारत और पाकिस्तान के बीच आजादी के तुरंत बाद ही युद्ध लड़ा गया था। अगर ये कहें कि भारत पर पहला युद्ध आजादी के एक साल बाद ही थोप दिया गया था, तो ऐसा कहना गलत नहीं होगा।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 में युद्ध लड़ा गया था। इस युद्ध में पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान झेलना पड़ा था। सैनिक तो मारे ही गए थे, साथ ही साथ पाकिस्तान का एक प्रांत यानी पूर्वी पाकिस्तान अलग हो गया था।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 का युद्ध लड़ा गया था। इस युद्ध में पाकिस्तान को भारी नुकसान झेलना पड़ा था। पाकिस्तान यह सोचकर युद्ध के मैदान में उतरा था कि भारतीय सेना 1962 का युद्ध हारी हुई है, ऐसे में उसे फिर से हराया जा सकता है।

भारत और चीन के बीच 1962 में भीषण युद्ध लड़ा गया था। इस युद्ध में चीनी सेना भारतीय सेना पर भारी पड़ी थी। भारत को आजादी मिले महज 14 साल ही हुए थे लेकिन 1947-48 युद्ध के बाद एक और युद्ध लड़ना पड़ा था।

शुरुआत में इसे घुसपैठ माना गया और दावा किया गया कि इन्हें कुछ ही दिनों में बाहर कर दिया जाएगा। लेकिन खुफिया तंत्र अनुमान पूरी तरह से गलत निकला था।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में लड़ा गया कारगिल का युद्ध (Kargil War) भारतीय सेना (Indian Army) की बहादुर की कहानी है। इस युद्ध में भारतीय जवानों ने दुश्मनों को जो सबक सिखाया था, उसे यादकर पाकिस्तान आज भी थर-थर कांप उठता होगा।

गोरखा रेजीमेंट के मेजर कार्डोजो के मुताबिक जंग के दौरान बारूदी सुरंग में ब्लास्ट हुआ था और एक पैर उड़ गया था। कुछ क्षण के लिए दिमाग सुन्न हो गया था।

पाकिस्तान ने कारगिल के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों पर धोखे से कब्जा किया था। कारगिल को अगास की भूमि के नाम से भी जाना जाता है।

अंगदोस ने इस युद्ध से जुड़े अपने उन दिनों के अनुभव को साझा किया है। वे बताते हैं कि किस तरह उन दिनों युद्ध लड़ा और चुनौतियों का सामना किया था।

युद्ध में सूबेदार कपूर सिंह ने भी हिस्सा लिया था। लद्दाख के गलवन घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प में उन्होंने भी हिस्सा लिया था।

भारत और चीन के बीच 1962 में युद्ध हुआ था। इस युद्ध में भारतीय सेना (Indian Army) को हार का सामना करना पड़ा था। चीनी सेना ने हर मोर्चे पर भारतीय जवानों को चुनौती दी थी। चीनी सेना के पराक्रम के आगे हमारे जवान ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सके थे।

भारतीय महिला सैनिकों का जज्बा हमेशा से सराहा गया है। ऐसी कई महिला सैनिक हैं, जिन्होंने अपने दम पर बड़ी से बड़ी चुनौतियों को मात दी है। सेना में महिलाओं का जज्बा और पराक्रम का लोहा माना जाता रहा है।

Kargil War 1999: इस युद्ध में एक जवान ऐसे भी थे जिन्होंने महज 21 साल की उम्र में सबसे बड़े सैन्य सम्मान यानी परमवीर चक्र को अपने नाम किया था।

कई सैनिक परिवार हैं जिनमें दादा से लेकर बेटे और बेटी तक सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसा एक परिवार हरियाणा के झज्जर स्थित गांव पातुवास में भी है।

इस युद्ध में रिटायर्ड हवलदार सेरिंग ताशी ने भी हिस्सा लिया था। अब ताशी की उम्र 82 साल है लेकि जब वह इस युद्ध में शामिल हुए थे तो उनकी उम्र 21 साल थी। 

भारत और चीन के बीच 1962 में लड़े गए युद्ध में गंगोत्री हिमालय में तप करने वाले साधुओं ने भी भारतीय सेना (Indian Army) की मदद की थी। इस युद्ध में हमारे वीर सपूतों ने पूरा दमखम दिखाया था, लेकिन अंत में हार का ही सामना करना पड़ा था।

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