Naxalism

नक्सल प्रभावित राज्यों और आतंकवाद प्रभावित प्रदेशों में केंद्र सरकार की ओर से भारतीय पुलिस सेवा (Indian Police Service) के जितने पद स्वीकृत किए गए हैं, उनके मुकाबले आईपीएस अफसरों के कई पद खाली पड़े हैं।

जांभोलकर का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों की वजह से नक्सलवाद कम है सरकारें सरेंडर नीति को बढ़ावा दे रही हैं।

सुरक्षा बलों ने नक्सलियों (Naxalites) के पास से एक पिस्टल, दो रेडियो सेट, एक हैंडग्रेनेड, 4 पाउच एमो, आईडी बनाने में प्रयोग किया जाने वाला कैमिकल, चुनाव से संबंधित कई सामान, भोजन और अन्य सामान बरामद किया है।

34 छात्र नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा और 15 जशपुर से हैं जिन्हें स्थानीय प्रशासन की पहल के तहत शिक्षा दी जा रही है और उन्होंने नीट (NEET Exam) जैसी बड़ी परीक्षा पास की है।

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों (Naxals) की आपस में ही नहीं बन पा रही। उनके बीच आपसी मतभेद बढ़ने लगे हैं। इसकी वजह से नक्सली अब अपने ही साथियों की हत्या करने लगे हैं।

नक्सलियों (Naxali) के पास अब सिर्फ दो ही विकल्प मौजूद है। एक तो सुरक्षाबलों के समक्ष आत्मसमर्पण करके अपना इलाज करायें या फिर कोरोना वायरस (Coronavirus) या साथी की के हाथों मारे जायें।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) से नक्सलवाद (Naxalism) को उखाड़ फेंकने के लिए सरकार और प्रशासन पूरी तरह कमर कस चुके हैं। नक्सिलयों (Naxals) की जड़ खोदने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

केंद्र सरकार नक्सलवाद (Naxalism) की समस्या को विकास के जरिए हल करने की तैयारी कर रही है। पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के साथ-साथ तीन मंत्रालयों को संयुक्त रूप से शामिल करने की रणनीति बनाई जा रही है।

बता दें कि नक्सलबाड़ी वो जगह है, जहां से भारत में नक्सलवाद मूवमेंट की शुरुआत हुई थी। ये जगह पश्चिम बंगाल के दार्जलिंग जिले में है।

दशमी का बड़ा भाई अभी भी नक्सलियों (Naxali) के बहकावे में जंगलों की खाक छान रहा है। दशमी ने अपने बड़े भाई से अपील किया है कि वो भी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट आए।

दंतेवाड़ा एसपी अभिषेक पल्लव ने बताया कि भैरमगड एरिया कमेटी में बीते 10 सालों में जितनी भी बड़ी घटनाएं हुई हैं, उसमें भल्ला शामिल था।

'नक्सलवाद' (Naxalism) सिर्फ देश की आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है बल्कि राजनीतिक और आर्थिक समस्या के साथ-साथ एक विकट सामाजिक समस्या भी है।

मौजूदा समय में नक्सली (Naxali) घटनाओं में आई भारी कमी पुलिस-प्रशासन के प्रयास का नतीजा है। बहरहाल छुट-पुट नक्सली घटनाओं को छोड़ दें तो बड़े नक्सली हमलों का रुकना, उसमें जवानों का हताहत ना होना और आम आदमी को डर के साए में ना जीना एक बड़ा पड़ाव है।

गिरिडीह पुलिस को नक्सलियों (Naxals) के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। पुलिस (Police) ने यहां 24 जुलाई को एक खूंखार महिला नक्सली को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार महिला नक्सली भाकपा माओवादी संगठन की एरिया कमांडर (Woman Naxali Commander) है। पुलिस अधीक्षक अमित रेनू ने इस बात की जानकारी दी।

गिरफ्त में आए नक्सली का नाम नंदा कुंजाम है और वह मलंगिर एरिया कमेटी के पिरनार पंचायत कमेटी का अध्यक्ष था।

नक्सलवाद (Naxalism) को उखाड़ फेंकने के लिए सरकार और प्रशासन हर संभव कोशिश कर रहा है। सख्ती के साथ-साथ सरेंडर की नीतियां भी रंग ला रही हैं। इससे नक्सली (Naxals) मुख्यधारा से लगातार जुड़ रहे हैं। पर, नक्सलवाद के खात्मे के इस मिशन में उन इलाकों का विकास बेहद जरूरी है, जो लाल आतंक का दंश झेल रहे हैं।

तेलंगाना से आने वाले प्रवासी मजदूरों ने संक्रमण का फैलाव किया है। इस नक्सली इलाके में संक्रमण फैलने से नक्सली मूवमेंट में भी कमी आई है। बहुत से नक्सली (Naxali)जंगल छोड़कर इलाज कराने के लिए मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

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