Naxal Affected Area

सरकार विकास योजनाओं से जन-जन को जागरूक करने के लिए झारखंड सरकार ने एक नई पहल की है। राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में टेलीविजन के माध्यम से सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देने के लिए सरकार मुफ्त में डीडी रिसीवर बांटेगी।

गृह मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी शामिल हो सकते हैं। जम्मू कश्मीर में कानून व्यवस्था की स्थिति को सामान्य बनाए रखने में डोभाल की अहम भूमिका रही है।

नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास की रफ्तार तेज करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे विभिन्न सामाजिक और आर्थिक उपायों का सकारात्मक और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ा है। आंकड़े इसकी गवाही देते हैं।

इस योजना के तहत सरकार की कोशिश होती है कि नक्सली हिंसा प्रभावित इलाकों में रहने वाले युवाओं में कौशल का विकास किया जाए ताकि वो रोजगार पाने में सक्षम बन सके।

For the holistic development of Left Wing Extremist (LWE) affected areas, various schemes are being implemented by the line ministries and departments. Some of the major development initiatives are being undertaken in the areas of skill development.

इन क्षेत्रों मे तैनात पुलिस बलों को किन कठिन परिस्थितियों में रहना पड़ता है, कहने की जरूरत नहीं है। आए दिन हमारे जवान इन इलाकों में नक्सलियों की हिंसा का शिकार होते हैं। लेकिन इन सब मुश्किलों से जूझते हुए भी वे अपनी ड्यूटी को बखूबी अंजाम देते हैं।

गांव वालों की बात सुनकर जवानों ने उस स्कूल को फिर से खोलने की योजना बनाई। उन्होंने 2016 से बंद प्राथमिक स्कूल को दोबारा खुलवाया। स्कूल खुलने पर एसपी डॉ. लाल उमेद सिंह और जवानों ने बच्चों को किताबें और यूनिफॉर्म बांटी।

सरकार और प्रशासन की निरंतर कोशिशों के बाद आज नक्सल प्रभावित इलाकों की सूरत बदल गई है।

खुद को आदिवासियों का मसीहा बताने वाले नक्सली नहीं चाहते कि स्थानीय लोग समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।

आंध्र प्रदेश पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। राज्य के धुर नक्सल प्रभावित पूर्व गोदावरी जिले में पुलिस ने भारी मात्रा में गांजा बरामद किया है।

कभी हक के लिए हथियार उठाने वाले नक्सली अब अपराधियों का संगठित गिरोह बन चुके हैं। ऐसे अपराधी जिनका काम सिर्फ लूट-पाट और हिंसा फैलाना रह गया है। लोकतंत्र में विश्वास है नहीं और विकास से डर लगता है इन्हें।

बस्‍तर लोकसभा सीट पर 11 अप्रैल को पहले चरण के मतदान के दौरान नक्‍सलियों ने चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश की। नक्‍सलियों ने मतदान दल पर ओरछा हेलीपेड के पास फायरिंग की। दल के सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई में एक नक्‍सली के मारे जाने की भी खबर है।

नक्सली क्षेत्रों में रहने वाले लोग नक्सलियों से बिना खौफ खाए मताधिकार का प्रयोग करने लगभग 30 किलोमीटर पैदल चलकर भी जाते हैं। इनका ये जज़्बा नक्सलवाद और इसके समर्थकों के मुंह पर जोरदार तमाचा है। छत्तीसगढ़ के कांकेर लोकसभा क्षेत्र में आज भी कई गांव ऐसे हैं, जहां के मतदाता 90 किलोमीटर तक का सफर तय कर वोट डालने जाते हैं।

छत्तीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र बीजापुर, जहां के गांवों में वेटनरी डॉक्टर की कोई सुविधा नहीं थी। ग्रामीण अपने पशुओं का उपचार नहीं करा पाते थे। वहां सीआरपीएफ ने लोगों की समस्या का हल निकाल दिया। सीआरपीएफ ने पहली बार गंगालूर इलाके के पामलवाया में पशु चिकित्सा केंद्र की स्थापना की है। यह देश का पहला पशु औषधालय है जिसको सीआरपीएफ ने खोला है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सल गतिविधियां में पिछले कुछ सालों में लगातार उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। बीते सालों में केंद्र सरकार द्वारा नक्सलियों के खिलाफ चलाई जा रही बहुआयामी रणनीति का असर साफ तौर पर देखा जा सकता है।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के नक्सली इलाके बस्तर (Bastar) में 89 वर्षीय धर्मपाल सैनी (Dharmpal Saini) 43 साल से आदिवासी लड़कियों को स्कूल तक लाने की मुहिम में जुटे हैं। इसके लिए उन्हें 1992 में पद्मश्री से भी नवाजा गया।

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