सुरक्षाबलों की शानदार पहल, अब संवरेगा इलाके के बच्चों का भविष्य

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नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा का प्रचार-प्रसार बेहद जरूरी है। शिक्षा ही वह जरिया है जिससे बदलाव लाना संभव है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र कवर्धा में चार साल से बंद पड़े स्कूल को फिर से खुलवा दिया गया है। यह नेक काम किया है सुरक्षाबलों ने। अब स्कूल में बसाहट गांव के करीब 26 बच्चे पढ़ सकेंगे। 2016 में इस स्कूल को नक्सलियों के आतंक की वजह से बंद करना पड़ा था। बसाहट गांव में 25 परिवारों के करीब 150 लोग रहते हैं। इनमें लगभग 26 बच्चे हैं, जो स्कूल जाना चाहते थे। लेकिन स्कूल बंद होने की वजह से वे पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे।

इस गांव के सबसे नजदीक जो स्कूल है वह भी करीब 7 किलोमीटर पर है। एक तो नक्सलियों का खौफ ऊपर से इतनी दूर स्कूल, इसलिए परिजन अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए भेजने से कतराते थे। स्कूल न जाने के कारण बच्चे शिक्षा से दूर होते जा रहे थे। वे पूरा दिन खेल-कूद में बिताते थे। नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों ने गश्ती के दौरान इन बच्चों को देखा। फिर गांव वालों से पूछने पर पता चला कि वे भी चाहते हैं कि उनके बच्चे पढ़ाई-लिखाई करें। लेकिन यहां पर कोई स्कूल नहीं है और जो है वह नक्सलियों के उपद्रव की वजह से बंद पड़ा है।

गांव वालों की बात सुनकर जवानों ने उस स्कूल को फिर से खोलने की योजना बनाई। उन्होंने 2016 से बंद प्राथमिक स्कूल को दोबारा खुलवाया। स्कूल खुलने पर एसपी डॉ. लाल उमेद सिंह और जवानों ने बच्चों को किताबें और यूनिफॉर्म बांटी। अब इस स्कूल में 12वीं पास युवक बच्चों को पढ़ा रहे हैं। एसपी ने बताया कि जब तक शिक्षक नहीं मिल जाते, तब तक झलमला थाने में तैनात जवान भी बच्चों को पढ़ाने आएंगे। बच्चों को अब शिक्षा से दूर नहीं रहना पड़ेगा। जवानों के इस पहल से अब इस गांव के बच्चों का भविष्य संवर सकेगा।

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