As I See It

जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के मुद्दे पर लगातार चौथी बार चीन ने भारत को चेक मेट करते हुए पाकिस्तान से अपनी दोस्ती निभाई है।

सही सोच के बावजूद कुछ ना कुछ चूक राहुल गांधी से हो ही जाती है। सेडिशन कानून को लेकर भी कुछ ऐसा ही हुआ।

The message from Delhi is clear: on terror blackmail it cannot be business as usual. No more.

The Prime Minister‘s message acquired a statesman like hue at a time when ordinary Kashmiris were feeling isolated and targeted in their own country and were feeling let down because of the action of some hot heads.

In the heat of Pulwama aftermath let us not get so carried away that we start treating all Kashmiris — our fellow Indians — as our enemy. That would be playing straight into the hands of Pakistan.

पुलवामा हमले के बाद और कुछ लोगों को उससे पहले भी ‘हाऊज़ द जोश’ में देशभक्ति के जज्बे की बजाय जिंगोइज्म (कट्टर राष्ट्रवाद) की बू आती थी। अब जब कुछ लोग ‘हाऊज़ द जैश’ की बात कर रहे हैं तो फिर इन लोगों का क्या कहना है।

पिछले कुछ हफ्तों से देश भर में ‘हाऊ इज़ द जोश’ तकिया कलाम बन गया है। कहना ये है कि परीक्षा की ऐसी मुश्किल घड़ी में हमें जोश से अधिक होश की दरकार है!

For the past few weeks how’s the josh had become a new form of greeting amongst many in the country. In testing times like these we need to retain that Josh but with more than a fair sprinkling of Hosh!

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