As I See It

हस्तक्षेप एपिसोड नंबर 3:- JNU में नकाबपोश बदमाशों ने जो किया उसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। भारत की...

The dramatic and targeted killing of Iranian General Qassem Soleimani in a precision missile strike by a US drone near the Baghdad airport and the threat issued by Tehran to launch a retaliatory strike has cast an ominous shadow on world peace in the New Year. At stake is not just stability and peace in the Gulf and Arab world but also geopolitical equations between major world powers.

नव वर्ष 2020 के अवसर पर सिर्फ सच (Sirf Sach) की टीम अपने  देशवासियों के सामने एक नया अध्याय शुरू...

नव वर्ष 2020 के अवसर पर सिर्फ सच (Sirf Sach) की टीम अपने  देशवासियों के सामने एक नया अध्याय शुरू...

आर्टिकल 370 और 35A इत्यादि जिन परिस्थितियों में भी इजाद किया गया उससे भारत और कश्मीर को कोई लाभ नहीं मिला। स्वाधीन भारत की कई विफलताएं हैं, सफलताएं भी कई हैं। लेकिन जब विफलताओं की गणना की जाएगी तो हमारा कश्मीर फेल्यर हमेशा पहले पायदान पर रहेगा।

Lok Sabha Elections 2019: Indian elections are always hard fought; the contests many times bitter, even vicious. But the 2019 election is easily the most polarising one in our electoral history.

मनोहर पर्रिकर 4 बार गोवा के मुख्यमंत्री रहे, देश के रक्षा मंत्री का पद भी संभाला। पर मजाल कि उनके दामन पर एक भी छींटे आए हों।

अरुण जेटली की तमाम बातों से सहमति के बावजूद सवाल ये है कि अगर किसी ने भारत की एयर स्ट्राइक पर सवाल उठा ही दिया, तो उसे तुरंत देशद्रोही का दर्जा क्यों दे दिया जाता है।

जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के मुद्दे पर लगातार चौथी बार चीन ने भारत को चेक मेट करते हुए पाकिस्तान से अपनी दोस्ती निभाई है।

सही सोच के बावजूद कुछ ना कुछ चूक राहुल गांधी से हो ही जाती है। सेडिशन कानून को लेकर भी कुछ ऐसा ही हुआ।

The message from Delhi is clear: on terror blackmail it cannot be business as usual. No more.

The Prime Minister‘s message acquired a statesman like hue at a time when ordinary Kashmiris were feeling isolated and targeted in their own country and were feeling let down because of the action of some hot heads.

In the heat of Pulwama aftermath let us not get so carried away that we start treating all Kashmiris — our fellow Indians — as our enemy. That would be playing straight into the hands of Pakistan.

पुलवामा हमले के बाद और कुछ लोगों को उससे पहले भी ‘हाऊज़ द जोश’ में देशभक्ति के जज्बे की बजाय जिंगोइज्म (कट्टर राष्ट्रवाद) की बू आती थी। अब जब कुछ लोग ‘हाऊज़ द जैश’ की बात कर रहे हैं तो फिर इन लोगों का क्या कहना है।

पिछले कुछ हफ्तों से देश भर में ‘हाऊ इज़ द जोश’ तकिया कलाम बन गया है। कहना ये है कि परीक्षा की ऐसी मुश्किल घड़ी में हमें जोश से अधिक होश की दरकार है!

For the past few weeks how’s the josh had become a new form of greeting amongst many in the country. In testing times like these we need to retain that Josh but with more than a fair sprinkling of Hosh!