हस्तक्षेप एपिसोड नंबर 2: जनरल सुलेमानी की मौत पर उठे बवंडर पर सियासी नजरिया

Coronavirus

Coronavirus

नव वर्ष 2020 के अवसर पर सिर्फ सच (Sirf Sach) की टीम अपने  देशवासियों के सामने एक नया अध्याय शुरू कर रही है। ‘हस्तक्षेप’ शीर्षक एक ऐसा मंच है जहां देश-दुनिया की मौजूदा राजनीतिक-सामाजिक-आर्थिक आदि मुद्दों पर छाई भ्रम रूपी धूल को हटाकर उसके वास्तविक स्वरूप को आप तक लाना है। 

हस्तक्षेप के माध्यम से बीबीसी के पूर्व संपादक संजीव श्रीवास्तव जी देश के मौजूदा राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक समीकरणों पर निष्पक्ष रूप से अपने अनुभव साझा करेंगे। यह एक तरह से न्यूज कैप्सूल की तरह होगा जो मौजूदा मुद्दों पर पड़ी परतों को हटाकर उसकी वास्तविक तस्वीर आपके समझ रख देगा।

इसी कड़ी में हम आपके समक्ष पेश कर रहे हैं हस्तक्षेप का एपिसोड नंबर 2:-

हस्तक्षेप के दूसरे एपिसोड में एक ऐसी अंतर्राष्ट्रीय घटना पर चर्चा करेंगे जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ने वाला है। दरअसल, इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिका ने ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी की एक ड्रोन हमले में हत्या कर दी है। जनरल सुलेमानी ईरान के सबसे शक्तिशाली लोगों में से एक थे। खाड़ी देशों में एंटी-सऊदी अरबिया और एंटी-अमेरिकी फोर्सों का प्रतिनिधित्व करने का श्रेय जनरल सुलेमानी को ही जाता है। एक सीआईए एनालिस्ट ने जनरल सुलेमानी के बारे में कहा है कि उनका व्यक्तित्व जर्मनी के तानाशाह हिटलर की सेना के जनरल डेजर्ट फॉक्स अर्बिल रोमैन, कोल्डवॉर के दिनों में दुनिया के सबसे ग्लैमरस जासूस जेम्स बॉन्ड और पॉप संगीत की बेहतरीन अदाकार लेडी गागा, तीनों के व्यक्तित्व का समिश्रण थे। ऐसे में अमेरिका द्वारा जनरल सुलेमानी की मौत से पूरा ईरान बौखला गया है और वो इसका बदला लेने पर उतारू है। यदि दोनों के बीच युद्ध होता है तो इससे पूरी दुनिया तो प्रभावित होगी ही लेकिन भारत पर इसका खास असर पड़ने वाला है, क्योंकि भारत को सप्लाई होने वाला करीब 63 फीसदी कच्चा तेल ईरान के प्रभूत्व वाले क्षेत्र से ही होकर आता है। साथ ही चीन-पाकिस्तान को व्यापारिक चुनौती देने के लिए ईरान के साथ मिलकर उसके समुद्री तट पर भारत द्वारा बनाये जा रहे चाहबहार बंदरगाह परियोजना भी अधर में लटक सकती है।

ये भी देखें:- हस्तक्षेप एपिसोड नंबर 1: CAA, NRC, NPR पर मतभेद पर सियासी नजरिया

यह भी पढ़ें