हस्तक्षेप एपिसोड नंबर 3: JNU कैंपस में नकाबपोशों की हिंसा पर सियासी नजरिया

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हस्तक्षेप एपिसोड नंबर 3:- JNU में नकाबपोश बदमाशों ने जो किया उसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

भारत की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जवाहर लाल नेहरू (JNU) में कुछ नकाबपोशों ने जमकर उत्पाद मचाया और इस दौरान 2 दर्जन से अधिक छात्र-कॉलेज प्रशासन के कई लोग जख्मी हो गए। दिल्ली में स्थित JNU हमेशा से लेफ्ट पार्टी के विधारधारा का केंद्र रहा है। लेकिन अब JNU में राइट विंग की विचारधारा वाले छात्रों का भी संख्या में इजापा हुआ है। ऐसे में दो अलग-अलग विचारधारा वाले छात्र संघों का आपसी टकराव यूनिवर्सिटी में अपना भविष्य संवारने आए आम छात्रों के लिए हितकर नहीं है।

6 जनवरी की शाम को हुए यह हमला पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन के उपर पर सवालिया प्रश्नचिन्ह लगाया है। लेफ्ट समर्थक छात्र अपने विरोधी छात्र संगठन एबीवीपी को इस हमले के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं तो वहीं एबीवीपी इसके लिए लेफ्ट छात्र संघ को आरोपी बता रहे हैं। बहरहाल, यूनिवर्सिटी कैंपस के मुख्य द्वार पर खड़े सुरक्षाकर्मियों को पार करके आए बाहर से आए कुछ गुंडे पूरे कैंपस में तोड़-फोड़ करते हैं, छात्रों को लोहे की राड़ों से मारते पीटते हैं और बीच-बचाव करने आए अध्यापकों को भी नहीं बख्सते, फिर करीब 2 घंटे तक उपद्रव मचाने के बाद ये सभी बड़े आराम से फरार भी हो जाते हैं। इस दौरान दिल्ली पुलिस या कैंपस गार्ड्स का एक भी जवान इन्हें पकड़ने या हिंसा को रोकने के लिए कैंपस के अंदर नहीं आता, ये सारे घटनाक्रम कई सवाल पैदा करता है। 

हालांकि इस पूरे मामले पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने निष्पक्ष जांच के आदेश दे दिया है। क्योंकि इस घटना के लिए केंद्र की बीजेपी सरकार को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है। क्योंकि दिल्ली की पुलिस गृह मंत्रालय के अधिन ही काम करती है। इस पूरे घटनाक्रम की जितनी निंदा की जाए वो कम है और JNU के नकाबपोशों को जल्द से जल्द पकड़कर सजा देकर देश की जनता को सुरक्षा का एहसास कराना होगा। 

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