‘हमें रोटी नहीं सिर्फ गोली चाहिए’ थी, कारगिल में दुश्मन को ढेर करने वाले जवान ने सुनाया किस्सा

युद्ध के दिनों को याद करते हुए नायक दीपचंद ने अपने अनुभवों और उस दौरान किन परिस्थितियों में जीत हासिल हुई थी इसका जिक्र किया है।

करगिल युद्ध के वक्त की तस्वीर (फोटो क्रेडिट: नायक दीपचंद)

युद्ध के दिनों को याद करते हुए नायक दीपचंद ने अपने अनुभवों और उस दौरान किन परिस्थितियों में जीत हासिल हुई थी इसका जिक्र किया है।

कारगिल युद्ध करीब 60 दिन तक चला जिसमें भारतीय सेना को जीत हासिल हुई। 26 जुलाई के दिन को हर साल कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस युद्ध में सेना ने पाकिस्तान को भगा-भगाकर मारा था। युद्ध से जुड़े कई किस्से हैं जिन्हें सुनकर आज भी देशवासियों का सीना गर्व से चौड़ा रहो जाता है।

युद्ध के दिनों को याद करते हुए नायक दीपचंद ने अपने अनुभवों और उस दौरान किन परिस्थितियों में जीत हासिल हुई थी इसका जिक्र किया है। उन्होंने एक न्यूज चैनल से बातचीत में बताया कि जंग के मैदान में उन्हें और उनके साथियों को भूख ही नहीं लग रही थी। जवान कहते थे कि हमें रोटी नहीं सिर्फ गोली चाहिए। दुश्मनों को ढेर करना ही एकमात्र लक्ष्य था।

उन्होंने बताया, ‘उस दौरान हमें कुछ भूख नहीं लग रही थी। हमें बस खाना नहीं चाहिए था, हम चाहते थे सिर्फ गोली दे दो जिससे हम सामने वाले को मार दें। लड़ाई के वक्त वो सिर्फ थोड़ा-सा खाना खाते थे, ताकि अगर लड़ने का मौका आए तो कोई कमी ना रह पाए।’

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नायक दीपचंद ने बाताया, ‘हम पैक का खाना ले जाते थे. साथ में सिर्फ एक कैल्शियम की तरह की गोली ले गए थे, बादाम-काजू की चीज़ें, बिस्कुट और कुछ ऐसी चीजें जिसे हम पतीले में गर्म करके खा लेते थे।’ उन्होंने कहा कि आज का युवा सिर्फ फेसबुक और ट्विटर तक ही देशभक्ति दिखाता है।

बता दें कि इस युद्ध में भारतीय सेना के 527 जवान शहीद हुए थे। और करीब 1300 जवान घायल हुए थे। पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ था। पाकिस्तान ने तो अपने जवानों के शवों को भी ले जाने से इनकार कर दिया था।

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