Woman Naxal

बिहार (Bihar) के औरंगाबाद जिला पुलिस (Police) और सीआरपीएफ (CRPF) के जवानों ने 11 जून को एक महिला नक्सली (Woman Naxali) के गिरफ्तार किया। गिरफ्तार महिला नक्सली का नाम पुष्पा उर्फ गौरी है। सुरक्षाबलों ने इसकी गिरफ्तारी इसके घर से ही की है।

सुनीता (काल्पनिक नाम) जिस गांव में पैदा हुई, वहां लोकतंत्र की बजाए क्रांति के गीत ही गूंजते थे। ऐसे माहौल में दसवीं कक्षा में पढ़ने के दौरान ही उसने बंदूक थाम ली थी। खेलकूद में तेज थी। दसवीं तक पढ़ी थी।

छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के सीमावर्ती इलाके से गढ़चिरौली (महाराष्ट्र) पुलिस को दो लाख की इनामी नक्सली (Naxali) पार्वती (24 साल) उर्फ सुशीला शंकर को गिरफ्तार करने में सफलता मिली है।

26 नवंबर को देश संविधान दिवस (Constitution Day) मना रहा था। लेकिन छत्तीसगढ़ के नक्सल (Naxal) प्रभावित दंतेवाड़ा जिले के कारली स्थित सीआरपीएफ ( CRPF) की 111वीं बटालियन के कैंप में इस दौरान चल रहा कार्यक्रम अपने आप में अनोखा था।

ओडिशा में महिला नक्सली (Woman Naxal) ने किया सरेंडर, इस महिला नक्सली पर प्रशासन की ओर से घोषित था 1 लाख रूपए का इनाम।

बिहार के गया जिले में एक हार्डकोर महिला नक्सली (Woman Naxal) ने 5 नवंबर को गया पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इस महिला नक्सली ने संगठन में हो रही प्रताड़ना से तंग आकर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला लिया।

नक्सलियों ने गन्दा काम करने का किया प्रयास, किसी तरह अपने बच्चे को लेकर की पुलिस के सामने किया आत्मसमर्पण।

छत्तीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित राजनांदगांव जिले की फोर्स को एक और कामयाबी मिली है। 12 अक्टूबर की सुबह मानपुर इलाके के बुकमरका जंगल में हुए नक्सली मुठभेड़ में घायल एक महिला नक्सली को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सुरक्षाबलों ने एक महिला नक्सली को गिरफ्तार किया है। पुलिस इस महिला नक्सली की गिरफ्तारी को बड़ी कामयाबी मान रही है। इस महिला नक्सली की गुनाहों की फेहरिस्त काफी लंबी है।

मेसी रूसी बेड़दा गांव की भोली-भाली लड़की थी, फिर ऐसा क्या हुआ कि वो बन गई खूंखार नक्सली कमांडर?

सुकमा जिले के पुसपाल थाना क्षेत्र के चितलनार और मुण्डवाल गांव के जंगलों से पुलिस ने महिला नक्सली सोड़ी पीसो उर्फ अनीता को गिरफ्तार किया है।

नक्सल एक ऐसी कौम बन गई है, जहां इंसानियत के लिए कोई जगह नहीं है। नक्सली किस हद तक गिर सकते हैं इसकी मिसाल है सरेंडर कर चुकी नक्सली सुनीता की दास्तान।

वह 13 अप्रैल, 2015 को चोलनार कैंप से किरन्दुल आ रहे पुलिस के वाहन पर बम विस्फोट करने और फायरिंग करने की घटना में शामिल थी। इसमें 5 जवान शहीद हुए थे।

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