गिरिडीह में गांव वालों का ऐलान- गांव में नक्सली दिखे तो उनकी खैर नहीं; पढ़िए पूरा मामला

झारखंड (Jharkhand) के गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना अंतर्गत पिपराटांड़ गांव में शनिवार (13 जून) की सुबह हार्डकोर नक्सली (Naxali) सुरेश मरांडी का सेंदरा करने एवं आठ लोगों को घर में बंद कर आग लगाने की मामले में पीरटांड़ थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।

Naxali

झारखंड (Jharkhand) के गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना अंतर्गत पिपराटांड़ गांव में शनिवार (13 जून) की सुबह हार्डकोर नक्सली (Naxali) सुरेश मरांडी की हत्या करने एवं आठ लोगों को घर में बंद कर आग लगाने की मामले में पीरटांड़ थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मृतक सुरेश मरांडी के बड़े भाई साले राम मरांडी के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले में 9 नामजद समेत करीब डेढ़ सौ अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस मामले में पुलिस ने अभी तक किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया है।

डुमरी एसडीपीओ नीरज कुमार सिंह के अनुसार प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस अनुसंधान कर रही है। पीरटांड प्रखण्ड के बिशनपुर पंचायत के पिपराटांड़ में गत 4 जून को हुई हीरालाल किस्कू की हत्या मामले में नामजद पांच आरोपियों को पुलिस ने रविवार को गिरिडीह से न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इन सभी आरोपितों को शनिवार की हुई घटना के समय घरों से बचाकर पुलिस ने थाने में रखा था। कुल 8 लोगों को पुलिस ने भीड़ के चंगुल से बचाया था।

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इस हत्याकांड के प्रतिशोध में शनिवार को पूरे गांव वालों ने मिलकर आरोपितों के घर को आग के हवाले कर दिया था। सभी आरोपितों को भीड़ में शामिल लोग जान से मारने पर आमादा थे। पुलिस के समय पर पहुंच जाने के कारण सामूहिक नरसंहार होने से बच गया, लेकिन इस घटना में ग्रामीणों ने एक आरोपित नक्सली सुरेश मरांडी की हत्या कर डाली।

पुलिस की दबिश के कारण 8 लोगों की जान बच गई। इन लोगों में पांच हत्या के आरोपी थे ,जिन्हें रविवार को जेल भेज दिया गया। वहीं अन्य लोगों को पंचायत भवन भेज दिया गया है इसमें कर्मा मरांडी ,बिहारी मरांडी ,काले राम मरांडी बबलू मरांडी व गणेश मरांडी शामिल है। पिपराटांड़ की घटना में मारे गए नक्सली सुरेश मरांडी का अंतिम संस्कार रविवार को पुलिस ने ही कराया। जिलेबिया घाटी के पास जेसीबी मशीन से गड़हा खुदवा कर वहां शव को दफनाया गया, जिसके बाद परिजनों को पंचायत भवन भेज दिया गया।

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बता दें कि शनिवार को ही सुरेश के शव का पोस्टमार्टम हो गया था। रविवार को पंचायत भवन में ठहरे उसके परिजनों को थाना बुलाया गया था वहां से सभी को पुलिस की निगरानी में जिलेबिया घाटी के पास लाया गया जहां परिजनों की उपस्थिति में शव को अंतिम संस्कार किया गया।

इधर, पीरटांड़ की घटना से संबंधित सभी पहलुओं की जानकारी लेने गिरिडीह विधायक “सुद्वीप कुमार सोनू” पिपराटांड़ पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले छोटू मरांडी से भेंट की जिसकी बेटी का शव मजरा में एक पेड़ से लटका हुआ मिला था। 4 जून को हीरालाल की हत्या हुई थी जिसके बाद हीरालाल की पत्नी से भी मिले और उनका हिम्मत बंधाया। इसके साथ उनके बेटे को भी किसी प्रकार के रोजगार से जोड़ने का आश्वासन भी दिया।

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गौरतलब है कि पीरटांड़ में ग्रामीणों ने जिस सुरेश मरांडी को मार डाला था वह हार्डकोर नक्सली (Naxali) था। पीरटांड़ में विकास कार्य मे लगे ठेकेदार निरंजन सिंह व पेटी कांट्रेक्टर शमशेर की हत्या में उसका नाम जुड़ा था। लेवी नहीं देने पर नक्सलियों (Naxalites) ने निरंजन सिंह की हत्या मुफस्सिल थाना अंतर्गत खेताडाबर में 30 अप्रैल 2017 तथा शमशेर जंगी को पीरटांड़ थाना क्षेत्र में 30 मई 2017 को हत्या कर दी थी। उस वक्त गिरफ्तार नक्सली (Naxali) दिलीप सोरेन ने पुलिस को बताया था कि सुरेश मरांडी व उसके दस्ते के साथ मिलकर उसने इन दोनों कांडों को अंजाम दिया था। बता दे कि पुलिस को सुरेश मरांडी को काफी दिनों पुलिस को तलाश थी।

ज्ञात हो कि निरंजन सिंह ने खेताडाबर में 16 लाख रुपए का तालाब निर्माण का ठेका लिया था। इसके बाद नक्सलियों ने लेवी के लिए उसे पत्र लिखा था इसके बावजूद लेवी नहीं देने पर नक्सलियों ने गला रेत कर हत्या कर दी थी। इसी तरह शमशेर जंगी पीरटांड़ में सड़क निर्माण करा रहा था लेवी नहीं देने पर नक्सलियों (Naxalites) ने उसे उसके कार्य स्थल पर ही गला रेतकर काट डाला था।

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पीरटांड़ की घटना के दूसरे दिन के माहौल से गांव में शांति के संकेत मिल रहे थे। नाम नहीं छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने अलग-अलग बताया कि पिपराटांड़ की घटना का प्लान गुरुवार दिन में ही बना लिया गया था और नक्सली (Naxali) सुरेश मरांडी के पक्ष के लोगों से समाज में सरेंडर करने का फरमान भी जारी हुआ था इसका पालन नहीं करने पर शनिवार की घटना को अंजाम दिया गया। यहां तक कहा जा रहा है कि जिन लोगों ने समाज के पास सरेंडर कर दिया उसके साथ आक्रोशित लोगों ने कोई ज्यादती नहीं की।

ग्रामीणों की मानें तो केवल सुरेश ही लोगों का लक्ष्य था। कहा जा रहा है कि अगर सुरेश के साथ आदिवासी समाज इस तरह का स्टेप नहीं लेता तो वह बड़ी घटना को अंजाम दे सकता था। उधर, इन आरोपों को सुरेश के परिजनों ने गलत बताया है कहां है कि हीरालाल की हत्या किसने की यह उन लोगों को पता नहीं है।

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बताया जाता है कि हीरालाल किस्कु बनाम सुरेश के बीच जमीन विवाद ने इस घटना को अंजाम दिया है। हीरालाल की हत्या के बाद ग्रामीण नक्सली (Naxali) सुरेश से नाराज चल रहे थे और पूरे परिवार से बातचीत भी बंद कर दिया गया था। गांव वाले स्वीकार भी कर रहे हैं कि सुरेश मरांडी की हत्या की गई है वह गांव के लिए आतंक का पर्याय बन गया था।

ग्रामीणों का आरोप है कि अगर वह जिंदा रहता तो गांव वालों को हमेशा परेशान करता रहता। गांव वालों का कहना है कि अगर वह हिंसक नहीं होता और ग्रामीणों को परेशान नहीं करता तो उसकी हत्या नहीं की जाती लेकिन नक्सली (Naxali) होने के कारण वो अक्सर गांव के लोगों को धमकाता था।

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ग्रामीणों का कहना है कि गांव में शांति बिगड़ने वालों का अब कोई जगह नहीं है जो नक्सली संगठन (Naxal Organization) में हैं वह गांव से बाहर चले जाएं अगर नक्सल संगठन में रहना है तो गांव में उसे कोई जगह नहीं दी जाएगी क्योंकि नक्सलियों (Naxals) के द्वारा आदिवासियों को वर्षों से ठगा जा रहा है तथा नक्सल संगठन अपने स्वार्थ को लेकर आदिवासियों को भटका कर नक्सल संगठन में भर्ती करवाता है और नक्सलियों (Naxalites) के सरदार कहीं और रहते हैं तथा बिना कसूर का पुलिस के साथ मुठभेड़ में हमारे बच्चों को भेज दिया जाता है।

वहीं, इस घटना में नक्सलियों के आका खुद महफूज रहते हैं परंतु हमारे आदिवासी के बच्चे पुलिस की गोली से मारे जाते हैं। अगर लेवी लेने की बात होती है तो नक्सलियों (Naxals) का कमांडर से लेकर सरदार तक खुद सेफ जोन में रहते हैं और लेवी लेने के लिए इस कदर ब्रेन वॉश कर ठेकेदारों के पास भेजते हैं, जहां ठेकेदारों द्वारा देवी का रुपया नहीं मिलने पर इन्हें आदिवासियों के बच्चों द्वारा उसकी हत्या करवा दी जाती है। परंतु इन नक्सलियों के दिन अब लद गए हैं।

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