केंद्र सरकार ने दिया चीन को बड़ा झटका, बिहार में चाइनीज कंपनियों से बड़ा प्रोजेक्ट छीना

लद्दाख (Ladakh) के गलवान घाटी (Galwan Valley) में हुए विवाद के बाद चीन (China) को बड़ा झटका लगा है। सरकार ने चाइनीज कंपनियों से गंगा नदी पर बने महात्मा गांधी सेतु के समानांतर बनाए जाने वाले महासेतु का प्रोजेक्ट छीन लिया है।

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सांकेतिक तस्वीर।

लद्दाख (Ladakh) के गलवान घाटी (Galwan Valley) में हुए विवाद के बाद चीन (China) को बड़ा झटका लगा है। सरकार ने चाइनीज कंपनियों से गंगा नदी पर बने महात्मा गांधी सेतु के समानांतर बनाए जाने वाले महासेतु का प्रोजेक्ट छीन लिया है। आधिकारिक सूत्रों ने 28 जून को बताया कि गंगा नदी पर महात्मा गांधी सेतु के बगल में बनने जा रहे नए पुल का टेंडर रद्द कर दिया है।

इस परियोजना के लिए चुनी गई चार में से दो चीन (China) की कंपनियां थीं। चाइना हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी और शानशी रोड ब्रिज ग्रुप कंपनी (जॉइंट वेंचर) को इस प्रॉजेक्ट के लिए चुना गया था। यह पूरी परियोजना तकरीबन 2,900 करोड़ रुपये की थी। इसमें 5.6 किलोमीटर लंबा मुख्य पुल, अन्य छोटे पुले, अंडरपास और रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण होना था। उल्लेखनीय है कि 16 दिसंबर, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर केंद्र सरकार की कैबिनेट समिति ने इस महासेतु परियोजना को मंजूरी दी थी।

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अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित महासेतु को गंगा नदी पर महात्मा गांधी सेतु के समानांतर बनाया जाना है जिससे पटना, सारण और वैशाली जिलों को सहूलियत होगी। उन्होंने बताया कि योजना के मुताबिक मुख्य सेतु के साथ चार अंडर पास, एक रेलवे ओवर ब्रिज, 1.58 मार्ग सेतु, फ्लाइओवर, चार छोटे पुल, पांच बस पड़ाव और 13 रोड जंक्शन का निर्माण किया जाना है।

परियोजना के लिए निर्माण की अवधि साढ़े तीन साल की थी और जनवरी, 2023 तक पूरी होने वाली थी। पुल का टेंडर रद्द किए जाने की पुष्टि बिहार सरकार में सड़क निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव ने भी की। नंद किशोर यादव ने कहा कि प्रॉजेक्ट के लिए चुने गए चार कॉन्ट्रैक्टर में से दो के पार्टनर चाइनीज थे।

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नंद किशोर यादव ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, ”महात्मा गांधी सेतु के साथ बनने जा रहे नए पुल के लिए चुने गए 4 कॉन्ट्रैक्टर्स में से दो के पार्टनर चाइनीज थे। हमने उन्हें पार्टनर बदलने को कहा, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसलिए हमने टेंडर को रद्द कर दिया है। हमने दोबारा आवेदन मंगवाए हैं।”

बता दें कि मई से ही चीन (China) के साथ पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर तनाव जारी है। इसके बाद 15 जून को चीनी सैनिकों की भारतीय सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद से ही भारत में चीन (China) के खिलाफ आक्रोश है और हर स्तर पर चीन के सामानों और चीनी कंपनियों का बहिष्कार हो रहा है। इससे पहले, महाराष्ट्र सरकार ने तीन चीनी कंपनियों से हुए 5,000 हजार करोड़ रुपए के समझौते को होल्ड रख दिया है।

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