चीन से निपटने के लिए भारत ने LAC पर तैनात किया इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप, जानें क्या है इन जवानों की खासियत…

लद्दाख (Ladakh) में गलवान घाटी (Galwan Valley) में हुई हिंसक झड़प के बाद से ही भारत और चीन के बीच तनाव बना हुआ है। इस बीच भारत ने नियंत्रण रेखा पर माउंटेन कार्प के एकीकृत बैटल ग्रुप (IBG) की तैनाती की है। आईबीजी (IBG) के जवान ऊंचे पहाड़ी इलाकों में युद्ध करने में पारंगत हैं।

Integrated Battle Group

फाइल फोटो।

लद्दाख (Ladakh) में गलवान घाटी (Galwan Valley) में हुई हिंसक झड़प के बाद से ही भारत और चीन के बीच तनाव बना हुआ है। इस हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। इस बीच भारत ने नियंत्रण रेखा पर माउंटेन कार्प के Integrated Battle Group (IBG) की तैनाती की है। आईबीजी (IBG) के जवान ऊंचे पहाड़ी इलाकों में युद्ध करने में पारंगत हैं।

ये जवान खासतौर से पर्वतीय इलाकों में युद्ध के लिए पारंगत हैं। ये 17वीं माउंटेन कार्प के जवान हैं, जिन्हें विषेश रूप से चीन से निपटने के लिए तैयार किया गया है। सूत्रों के अनुसार, भारत की तरफ से माउंटेन कार्प के कम से कम तीन बैटल ग्रुप (IBG) अग्रिम मोर्चे पर तैनात हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में आईटीबीपी (ITBP) के जवान भी हैं जो पर्वतीय इलाकों में युद्ध का प्रशिक्षण पा चुके हैं।

क्या है आइबीजी यानी इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप?

सेना का Integrated Battle Group (आइबीजी) आदेश के 12 घंटे के भीतर ही दुश्मन को घर में घुसकर ढेर कर देता है। यह इसकी विशेष दक्षता में शामिल है। डिफेंस हो या अटैक, युद्ध जैसी किसी भी स्थिति से तुरंत निबटने में यह दस्ता हर क्षण तत्पर रहता है। यह महज विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कमांडोज का दस्ता मात्र नहीं, बल्कि पैदल सेना, टैंक, तोपखाना, वायु रक्षा, संचार और युद्धकौशल के तमाम अत्याधुनिक हथियारों से लैस पूरी यूनिट है। इसमें दुश्मन की हर चाल को विफल बनाने की हरसंभव क्षमता है। इसीलिए इसे इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप यानी एकीकृत युद्धक समूह कहा जाता है।

आवश्यकता पड़ते ही तुरंत धावा बोल देना इनकी सबसे बड़ी खूबी है। यानी इन जवानों को तैयारी या रणनीति बनाने के लिए कोई अतिरिक्त समय की आवश्यकता नहीं पड़ती है, बस आदेश मिलने की देर होती है। सीमा से सटे हर क्षेत्र में दुश्मन के खतरे, वहां की भौगोलिक चुनौतियों और लक्ष्य जैसै- 3टी- थ्रेट, टेरेन और टास्क को ध्यान में रखकर इसके लड़ाकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। आदेश मिलते ही यह किसी भी पल दुश्मन के इलाके में दाखिल होने के लिए भी तत्पर रहते हैं। ये लड़ाके मौजूदा स्ट्राइकिंग कोर के मुकाबले कहीं अधिक सक्रिय और तीव्र कार्रवाई करने में सक्षम हैं।

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सूत्रों के अनुसार, इस बैटल ग्रुप (Integrated Battle Group) के जवानों को जरूरत पड़ने पर किसी भी स्थान पर एयरड्रॉप भी किया जा सकता है। जवानों को इसका प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है और ये जवान चीनी सीमा पर कई बार युद्धाभ्यास भी कर चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि थल सेना (Indian Army) की तैयारियों को लगातार वायुसेना (Indian Air Force) का बैकअप मिला हुआ है।

वायुसेना एलएसी पर निगरानी के साथ-साथ जवानों को एयरड्रॉप करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। बता दें कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर चीन के लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर मंडरा रहे हैं। चीन की यह गतिविधियां एलएसी के 10 किलोमीटर एरिया में जारी हैं। ऐसे में भारत ने भी अब पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को उसी की भाषा में जवाब देने की तैयारी की है।

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सैन्य सूत्रों के मुताबिक, एलएसी (LAC) पर चीन के लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर पर नजर रखने के लिए सेना ने पूर्वी लद्दाख में ‘आकाश’ एडवांस एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम तैनात कर दिया है। इससे भारतीय सेना (Indian Army) आसानी से चीन की हरकतों पर नजर रख सकती है। ऐसे में अगर चीन का कोई विमान एलएसी क्रॉस करेगा तो उसे एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम तुरंत मार गिराएगा।

सूत्रों का कहना है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन ने बड़े पैमाने पर्वतारोहियों एवं मार्शल आर्ट के लड़ाकों को पर अपनी सेना में भर्ती किया है। ड्रैगन ने ऐसे पांच डिवीजन बनाकर एलएसी (LAC) पर भेजे हैं।

हालांकि, चीनी मीडिया में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह तिब्बत में तैनाती के लिए हैं। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, इन्हें एलएसी के लिए भेजा गया है और 15 जून से पहले इन्हें तैनात किया गया था। जिसके बाद स्थिति को देखते हुए भारत ने नियंत्रण रेखा पर माउंटेन कार्प के आईबीजी (Integrated Battle Group) की तैनाती की है। बता दें कि 15 जून की रात ही दोनों देशों की सेनाओं के बीच गलवान घाटी में खूनी झड़प हुई थी।

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