India China Border Tension

If war breaks out Chinese won't find it like 1962. Indian leadership is mentally prepared and that's the difference. Xi must understand that world has changed since last war.

चीनी विशेषज्ञों की राय तो यही है कि चीन, भारत को लेकर यह धारणा पहले ही बना चुका है कि भारत अब अमेरिका के गुट में है। भारत के निर्गुट रहने से चीन के व्यवहार में कोई अंतर नहीं आने वाला।

लद्दाख (Ladakh) में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच जारी तनाव के बीच दोनों देशों की सेनाएं पीछे हट गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, चीन (China) ने अपने सैनिकों को गलवान घाटी (Galwan Valley) में कम से कम एक किलोमीटर पीछे किया है।

लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के जवानों के बीच हुई हिंसक झड़प के 18 दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को लेह पहुंचे। प्रधानमंत्री मोदी यहां की स्थिति की समीक्षा करने के लिए इस दौरे पर गए हैं।

देश में काफी समय से Boycott China मुहिम चलाई जा रही थी। इसी कड़ी में भारत सरकार ने 59 चीनी मोबाइल ऐप्स को (59 Chinese Apps Ban In India) भारत में बैन कर दिया है। इन ऐप्स में सबसे बड़ा नाम है टिकटॉक (TikTok) का।

पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी (Galwan Valley) में भारत और चीन के बीच हिंसक झड़प की वजह को लेकर पूर्व सेना प्रमुख वीके सिंह (VK Singh) ने नया दावा किया है। वीके सिंह का कहना है कि चीनी सैनिकों के तंबू में अचानक लगी आग से हालात बिगड़े और सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई।

लद्दाख (Ladakh) के गलवान घाटी (Galwan Valley) में हुए विवाद के बाद चीन (China) को बड़ा झटका लगा है। सरकार ने चाइनीज कंपनियों से गंगा नदी पर बने महात्मा गांधी सेतु के समानांतर बनाए जाने वाले महासेतु का प्रोजेक्ट छीन लिया है।

लद्दाख (Ladakh) में गलवान घाटी (Galwan Valley) में हुई हिंसक झड़प के बाद से ही भारत और चीन के बीच तनाव बना हुआ है। इस बीच भारत ने नियंत्रण रेखा पर माउंटेन कार्प के एकीकृत बैटल ग्रुप (IBG) की तैनाती की है। आईबीजी (IBG) के जवान ऊंचे पहाड़ी इलाकों में युद्ध करने में पारंगत हैं।

यह जानना बेहद जरूरी है कि पाकिस्तान बैट (Border Action Team) आईएसआई (ISI), सेना व पाक रेंजर्स के बावजूद सरहद पर क्यों इस्तेमाल करती है? दरअसल बैट में पाकिस्तानी सेना के एनएसजी के कमांडो के अलावा कई दुर्दांत आतंकी होते हैं, जो कि सरहद पर आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए स्नाइपर राइफल से हमले करते और निशाना बना कर भाग जाते हैं।

सीमा पर हमारा एक जवान भी शहीद होता है तो देश के बच्चे-बच्चे का खून खौल उठता है। सारा देश एक साथ खड़ा हो जाता है, उस सैनिक और उसके परिवार के साथ। पर, कई देश ऐसे हैं जहां के सैनिकों को यह सम्मान नसीब नहीं होता।

अब चीन सीमा विवाद को सुलझाने की बजाय धीरे-धीरे सीमा के अधिक से अधिक हिस्से को अपने कब्ज़े में लेना चाहता है। लद्दाख की सीमा की बात करें तो चीन 1959 की सीमा को सही सीमा मानता है और भारत 1962 की लड़ाई के बाद की सीमा को सही सीमा मानता है।

भारत-चीन बार्डर (India China Border) पर पूर्वी लद्दाख (Ladakh) की गलवान घाटी (Galwan Valley) में चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प में मानसा के गांव बीरेवाला डोगरा के सैनिक गुरतेज सिंह हो गए।

शहादत से पहले मनदीप दिलेरी से दुश्मन सेना से लड़ रहे थे। बहादुरी का यह किस्सा बयां करते मनदीप सिंह के भाई निर्मल का सीना गर्व से चौड़ा हो रहा है। उन्होंने बताया कि मनदीप (Martyr Mandeep Singh) किसी के रोके नहीं रुक रहा था।

पंजाब रेजिमेंट के जवान गुरबिंदर सिंह (Martyr Gurbinder Singh) थोड़े दिन पहले ही पहली बार लद्दाख में तैनात हुए थे। अभी आठ महीने पहले ही उनकी मंगनी हुई थी और घर में शादी की तैयारियां चल रही थी।

लद्दाख (Ladakh) में गलवान घाटी (Galwan Valley) में भारत-चीन सीमा पर चीनी सैनिकों से झड़प में पंजाब के सतनाम सिंह शहीद हो गए। गुरदासपुर के कलानौर के भाजराज में जब शहीद सतनाम सिंह (Martyr Satnam Singh) का पार्थिव शरीर पहुंचा तो लोगों ने फूलों की बारिश की और शहीद सतनाम अमर रहें के घोष से आसमान गूंज उठा।

देश की रक्षा करते हुए मध्य प्रदेश के रीवा जिले का भी एक लाल शहीद हो गया। जिले के मनगवां थाना के फरेहदा गांव के दीपक सिंह लद्दाख के गलवान घाटी में 15 जून की रात चीनी सैनिकों से लड़ाई लड़ते हुए शहीद हो गए। लोग सुबह से ही शहीद दीपक सिंह (Martyr Deepak Singh) के घर में पहुंचने लगे। जहां अपने इस लाल के खोने का उन्हें गम था, वहीं इस बात को लेकर गर्व है कि विंध्य के लाल ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

15 जून की रात चीनी सैनिकों की झड़प में बिहार के वैशाली जिले का लाल भी शहीद हो गया। 17 जून को जिले के जंदाहा थाना क्षेत्र के चकफतेह गांव के 22 साल के जांबाज बेटे सिपाही जय किशोर सिंह (Martyr Jai Kishor Singh) की शहादत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।

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