Jharkhand: नक्सली तूफान समेत 3 लोगों पर चलेगा देशद्रोह का केस, 18 साल पुराना है ये मामला

उस समय नक्सली घटनाएं चरम पर थीं और पुलिस द्वारा नक्सलियों (Naxal) के घर में घुसकर इस प्रकार की कार्रवाई करना खतरे से खाली नहीं था।

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सांकेतिक तस्वीर।

मामला 2 फरवरी 2002 का है। इस कांड में मुख्य सूचक के रूप में खुद तत्कालीन थाना प्रभारी ने प्राथमिकी दर्ज कराते हुए कहा था कि गुप्त सूचना मिली कि पीरटांड़ के चदरी पहाड़ी इलाके में नक्सलियों (Naxal) का जमावड़ा लगा हुआ है और वह किसी बड़ी घटना को लेकर प्लानिंग कर रहे हैं।

झारखंड के गिरिडीह जिले के नक्सल (Naxal) प्रभावित थाना क्षेत्र में एक केस को दोबारा शुरू करने की तैयारी की गई है। ये केस आज से 18 साल पहले एंटी नक्सल अभियान में पीरटांड़ थाने में दर्ज किया गया था।

इस मामले में गिरिडीह उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा ने राज्य सरकार से नक्सली किशोर चंद किस्कु उर्फ तूफान, दीपक दा उर्फ जगदीश महतो, संतोष महतो उर्फ बासुदेव महतो के खिलाफ देशद्रोह और 13 यूपीए एक्ट के तहत मामला चलाने की अनुमति मांगी है।

उपायुक्त ने विस्फोटक अधिनियम में अभियोजन चलाने की स्वीकृति आदेश लोक अभियोजक को दी है। इससे पहले इस मामले में 13 नक्सलियों के खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही की गई थी।

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मामला 2 फरवरी 2002 का है। इस कांड में मुख्य सूचक के रूप में खुद तत्कालीन थाना प्रभारी ने प्राथमिकी दर्ज कराते हुए कहा था कि गुप्त सूचना मिली कि पीरटांड़ के चदरी पहाड़ी इलाके में नक्सलियों का जमावड़ा लगा हुआ है और वह किसी बड़ी घटना को लेकर प्लानिंग कर रहे हैं।

तत्कालीन गिरिडीह एसपी आनंद लाटकर के नेतृत्व में पुलिस और सीआरपीएफ के जवान बनासो के चदरी पहाड़ी पर पहुंचे थे, लेकिन पुलिस की आहट सुनकर सभी नक्सली भाग चुके थे, हालांकि अभियान में तेजी लाते हुए पुलिस ने क्षेत्र में नक्सलियों के एक छोटे से बंकर को ध्वस्त कर दिया था और भारी मात्रा में विस्फोटकों का जखीरा और नक्सली साहित्य के साथ-साथ अन्य आपत्तिजनक वस्तुओं को बरामद किया था।

उस समय नक्सली घटनाएं चरम पर थीं और पुलिस द्वारा नक्सलियों के घर में घुसकर इस प्रकार की कार्रवाई करना खतरे से खाली नहीं था। ये पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता थी। फिलहाल इस मामले में नक्सलियों के खिलाफ कोर्ट में मामला चल रहा है।

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