नक्सली समेत कई अन्य संगठनों पर होगी बड़ी कार्रवाई, केंद्र सरकार ने बनाई नई रणनीति

केंद्र सरकार देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके संगठनों (Terrorist Organizations) पर बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में है। सरकार ने आतंकी संगठनों के अलावा नक्सली संगठनों पर अनलॉफुल एक्टिविटी प्रीवेंशन एक्ट (UAPA) लगा दिया है।

Terrorist Organizations

केंद्र सरकार देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके संगठनों (Terrorist Organizations) पर बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में है।

केंद्र सरकार देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके संगठनों (Terrorist Organizations) पर बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में है। सरकार ने आतंकी संगठनों के अलावा नक्सली संगठनों पर अनलॉफुल एक्टिविटी प्रीवेंशन एक्ट (UAPA) लगा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारत के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव व डीजीपी को ऐसे संगठनों या एसोसिएशन की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश जारी किया है।

Terrorist Organizations
सांकेतिक तस्वीर।

केंद्र सरकार ने जिन बिंदुओं पर इन संगठनों के बारे में सूचनाएं मांगी है, उनमें पूछा गया है कि ऐसे संगठनों या एसोसिएशन की वर्तमान गतिविधियां क्या है? इनके कैडरों की सूची क्या है? इनके पास कितने हथियार और संसाधन हैं? इनके अलावा, हाल के दिनों में इन संगठनों के माध्यम से दी गई धमकियों की जानकारी भी सरकार द्वारा मांगी गई है। सरकार की नजर उन 42 आतंकी संगठनों (Terrorist Organizations) पर है जिनकी गतिविधियों से देश को भारी नुकसान हुआ है या भविष्य में हो सकता है।

कुछ बड़े संगठनों के नाम इस प्रकार हैं-

बब्बर खालसा इंटरनेशनल, खालिस्तान कमांडो फोर्स, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स, इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन, लश्कर-ए-तैयबा/ पासबान -ए- अहले हदीस, जैश ए मोहम्मद /तहरीक ए हदीस/हरकत उल मुजाहिदीन/ हरकत उल अंसार/ हरकत उल जिहाद इस्लामी या अंसार उल उमाह, हिज्बुल मुजाहिदीन हिज्बुल मुजाहिदीन पीर पंजाल रेजीमेंट, उमर मुजाहिदीन, जम्मू एंड कश्मीर इस्लामिक फ्रंट, यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम, नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ असम, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट, पीपुल्स रिवोल्युशनरी पार्टी ऑफ कांगल पाक, कांगलपाक कम्युनिस्ट पार्टी, कांगलयाओ कांबा लूप, मणिपुर लिबरेशन फ्रंट, ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स, नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा, लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम, स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया, दीनदार अंजुमन, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया मार्किसट लेनिनिस्ट, माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर, अल बदर, जमायत उल मुजाहिदीन, अल कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट, दुख तारण ए मिल्लत, तमिलनाडु लिबरेशन आर्मी, तमिल नेशनल रेस्टेवेल ट्रपस, अखिल भारत नेपाली एकता समाज, सीपीआई से जुड़ी संस्थाएं, इंडियन मुजाहिदीन, गारो नेशनल लिबरेशन आर्मी, कामतापुर लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन, इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक, नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड, खालिस्तान लिबरेशन फोर्स, तहरीक उल मुजाहिदीन, जमात उल मुजाहिद इन बांग्लादेश शामिल हैं।

इनके अलावा इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी), यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ़ आसाम (उल्फा), नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड, मणिपुर के कई संगठनों (Terrorist Organizations) जैसे पीपुल्स लिबरेशन आर्मी, यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑल त्रिपुरा, टाइगर फोर्स, नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया, हनी ट्रेप्स, लिबरेशन काउंसिल, लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल एलम, नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल आफ नगालैंड, इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन, जमात-ए-इस्लामी जम्मू एंड कश्मीर, जम्मू एंड कश्मीर लिबरेशन फ्रंट व सिख ऑफ जस्टिस समेत कुल 13 एसोसिएशन पर भी केंद्र सरकार की कड़ी नजर है। वहीं झारखंड की बात करें तो माओवादी संगठनों एवं उग्रवादी संगठनों पर भी राज्य सरकार द्वारा कड़ी नजर रखी जा रही है। हालांकि झारखंड सरकार द्वारा साल 2014 से ही लगातार इन संगठनों की कमर को तोड़ने का भरसक प्रयास किया गया है तथा बहुत हद तक सफलताएं भी मिल चुकी हैं।

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