Terrorism

जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के पुलवामा (Pulwama) जिले में सुरक्षाबलों ने आतंकियों की बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है। आतंकी एक बार फिर 2019 के पुलवामा हमले (Pulwama Attack) जैसी घटना को अंजाम देना चाहते थे।

पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) ने आतंकी कमांडरों से कहा है कि “ओवरग्राउंड वर्कर को आगे निकाल कर हालत का जायजा लो और हिट एंड़ रन की नीति पर काम करो। गर्मी बढ़ रही है और करोना में सब व्यस्त हैं। समय माकूल है। टारगेट पूरा करो”।

26/11 मुंबई हमला: उस वक्त टर्मिनल पर सैकड़ों लोग मौजूद थे औऱ इसी भीड़ में शामिल लश्कर के दो आतंकियों (Terrorists) ने अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इतना ही नहीं आतंकवादियों ने हैंड ग्रेनेड भी फेंके।

शहीद लांस नायक राज सिंह (Martyr Raj Singh) गुरुग्राम के गांव दमदमा के रहने वाले थे। शहीद के शहादत की खबर जैसे ही उनके घर में पहुंची तो वहां शोक की लहर दौड़ गई।

जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में आतंकवाद (Terrorism) के खिलाफ सुरक्षाबलों का अभियान जारी है। सुरक्षाबलों ने 18 मई की सुबह पुलवामा के कई गांवों में सर्च ऑपरेशन चलाया।

हिजबुल के हमजोली रहे दाऊद (Dawood Ibrahim) ने अब भारत के खिलाफ लश्कर (Lashkar-e-Taiba)  से हाथ मिला लिया है। ऐसा करके उसने पाकिस्तान में रहकर अपने आपको महफूज कर लिया है। आईएसआई (ISI) के सहयोग से आतंकी डॉन अब भारत में वर्ष 2008 में हुए मुंबई जैसे बड़े हमले की साजिश रच रहा है।

जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में सुरक्षाबलों का एंटी-टेरेरिस्ट ऑपरेशन जारी है। सुरक्षाबल पूरी प्लानिंग के साथ आतंकियों का सफाया करने में लगे हैं। पुलवामा और बडगाम जिले में आतंकी ठिकानों (Terrorist Hideout) का पता चला है।

आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े रूख को देखकर पाकिस्तान (Pakistan) घबरा गया है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, नियंत्रण रेखा (LoC) पर पाकिस्तानी आर्मी (Pakistani Army) फायरिंग की आड़ में BAT एक्शन को अंजाम देने की फिराक में है।

जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के पुलवामा (Pulwama) जिले में पुलिस ने 12 मई को जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) के आतंकवादियों के चार मददगारों को गिरफ्तार कर लिया।

घाटी के हिजबुल मुजाहिदीन के नए प्रमुख आतंकी कमांडर सैफुल्ला मीर भी पुलवामा के मलंगपुरा का रहने वाला है। वह आतंकी (Militant) बनने से पहले एक चिकित्सा सहायक रहा और मुठभेड़ में जख्मी होने वाले आतंकियों का इलाज करते-करते पुलवामा का जिला कमांडर बन गया।

पाकिस्तान (Pakistan) ने F-16 तथा JAF-17 लडाकू विमानों के जरिए आसमानी गश्त शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तानी हुकूमत को यह डर सता रहा है कि छिंदवाड़ा में गत सप्ताह शहीद हुए सेना के जांबाज कर्नल, मेजर, जवानों व जेकेपी के एक सब इंस्पेक्टर की शहादत का बदला लेने के लिए कहीं बालाकोट की तरह हमला करके भारत करारा जवाब न दे।

पाकिस्तान (Pakistan) ने अपनी इस चाल के जरिए एक साथ दो निशाने साधने की कोशिश की है। पहली यह कि वह दुनिया को बताना चाहता है कि उसने आतंकी संगठन लश्कर पर एक्शन ले लिया है, दूसरा वह नए नामकरण के जरिए जैश-ए-मोहम्मद और अलवर जैसे आतंकी संगठनों को भी एक छतरी के नीचे लाना चाहता है।

हिज्बुल मुजाहिदीन के दो बड़े चेहरे डॉ. सैफुल्ला मीर व जुनैद सहरई के अलावा अंसार गजवा कुल हिंद का आतंकी कमांडर खालिद इब्राहिम‚ लश्कर–ए–तय्यबा का आतंकी कमांडर सलीम परे तथा अल बदर का आतंकी कमांडर जावेद मट्टू समेत कई आतंकी कमांडर ऑपरेशन जैक बूट (Operation Jackboot) के तहत रडार पर हैं।

हिजबुल मुजाहिदीन के नए कमांडर की जगह लेने के लिए दो नाम सबसे आगे चल रहे हैं। इनमें पहला सैफुल्लाह और दूसरा जुनेद सेहरई है। फोन काल के अनुसार सैफुल्लाह अपने पूर्व आका नायकू के कहने पर काम करता था। नायकू के कहने पर सैफुल्लाह युवाओं को आतंकी संगठन में भर्ती करने के लिए प्रेरित करता था।

जनरल रावत (Gen Bipin Rawat) ने कहा‚ ‘सशस्त्र बल की प्राथमिकता आतंकवादी (Militants) नेतृत्व को बेअसर करना है। इससे आतंकी संगठनों की भर्ती में कमी आती है। वे हीरो नहीं हैं‚ वे कोई भी नहीं हैं।'

सेना की जवाबी कार्रवाई में एक आतंकवादी (Militant)  मारा गिराया गया और वहीं दूसरी तरफ पुलवामा के ही बेगपुरा इलाके में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच एक और एनकाउंटर शुरू हो गई जिसमें हिजबुल मुजाहिदीन का कुख्यात आतंकी रियाज नायकू उर्फ मोहम्मद-बिन-क़ासिम को आज तड़के ही मार गिराया गया। 

1990 के दशक में अफगानिस्तान व पाकिस्तान के आतंकियों (Militants) ने यहां पर अपने बंकर निर्मित कर लिए थे। तब सूरतेहाल यह थे कि समूचे इलाके में आतंकी तालिबान शैली में कंधे पर यूबीजीएल व अन्य घातक हथियार लेकर घूमते–फिरते थे।

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