गढ़चिरौली हमला: गांव में मसाला मांगने घुसे थे नक्सली, पढ़िए हमले से पहले की पूरी कहानी…

जवानों पर हुए हमले और नक्सलियों के दहशत की वजह से यहां के कई लोग गांव छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक दादापुर गांव की आबादी 1200 के आसपास है और यहां बमुश्किल से ही कुछ लोग नजर आते हैं।

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महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में एक गांव है दादापुर। यह गांव मुंबई से लगभग 950 किलोमीटर दूर है। इसी गांव में माओवादियों ने 1 मई, 2019 को 27 वाहनों को आग के हवाले कर दिया था और सी-60 के जवानों को ले जा रहे एक वाहन को आईईडी विस्फोटक कर उड़ा दिया था। इस हमले में 15 जवानों सहित कुल 16 लोगों की मौत हो गई थी। गांव में नक्सलियों का खौफ किस कदर भरा हुआ है इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि इस गांव में हर जगह नक्सलियों ने बैनर लगा रखे हैं। जिनमें धमकी दी गई है और गांव में सड़कों और पुलियों के निर्माण का विरोध किया गया है। गांव वालों में इतना डर बैठ गया है कि वो ‘लाल आंतक’ के आगे अपना मुंह तक नहीं खोलते। जवानों पर हुए हमले और नक्सलियों के दहशत की वजह से यहां के कई लोग गांव छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक दादापुर गांव की आबादी 1200 के आसपास है और यहां बमुश्किल ही कुछ लोग नजर आते हैं।

गांव में जिस सड़क निर्माण कार्य और अन्य विकास कार्यों का नक्सली विरोध करते हैं दरअसल वो गांव के लोगों के लिए बेहद अहम हैं। गांव में ठीक तरह से सड़कें भी नहीं पहुंची पाई हैं और सरकार की कोशिश है कि इस गांव में विकास का पहिया चलाकर उसे फिर से खुशहाल बनाया जाए। गढ़चिरौली का यह गांव सुदूर इलाके में पड़ता है इसलिए यहां नक्सली छिप कर घात लगाते हैं और गांव वालों पर जुल्म ढाहते हैं। 1 मई को जब नक्सलियों ने जवानों पर हमला किया था उससे ठीक एक दिन पहले यानी 30 अप्रैल की रात माओवादियों ने गांव के कुछ घरों के बाहर दस्तक दी थी। नक्सली उनके दरवाजे पर खाना बनाने के लिए कुछ मसाले मांगने आए थे। इसके थोड़ी देर बाद ही गांव वालों को तेज आवाजें सुनाई देने लगीं। जब उन्होंने अपनी खिड़की के बाहर देखा तो कुछ महिलाएं खड़ी होकर गाड़ियां जलाने के लिए कह रही थीं और पुरुष वाहनों में आग लगा रहे थे। उन सभी के पास हथियार थे। पुलिस के अनुसार, 100-150 की संख्या में नक्सली दादापुर गांव में आए थे। इनमें ज्यादातर गढ़चिरौली-गोंदिया और छत्तीसगढ़ क्षेत्र में सक्रिय माओवादी इकाई के सदस्य थे।

जब वे खाना पकाने के लिए जरूरी राशन ले जा रहे थे, तो कुछ सामान कम होने पर उन्होंने गांव के लोगों का दरवाजा खटखटाकर सामग्री मांगी। रात के खाने के बाद माओवादियों ने एक के बाद एक कई गाड़ियों को फूंक दिया। जानकारी के अनुसार 1 मई की घटना का मुख्य आरोपी गणपति उर्फ मुप्पला लक्ष्मण राव है। वह पिछले साल नवंबर में ग्रुप का महासचिव बना था। उसने सीपीआई (माओ) के महासचिव नामबाला केशव राव उर्फ बसवराज और केंद्रीय समिति के सदस्य मिलिंद तेलतुंबडे और पांच लोगों को पद से हटाया था।

तेलतुंबडे जनवरी, 2018 में हुई भीमा कोरेगांव हिंसा का आरोपी है। साल 2009 के बाद गढ़चिरौली में नक्सलियों का यह सबसे बड़ा हमला है। गौरतलब है कि 2009 में हुए नक्सली हमले में 51 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। अप्रैल, 2018 में कसानासुर और राजाराम खंडला में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच दो मुठभेड़ हुई थी। इनमें 40 माओवादी मारे गए थे। खूंखार भास्कर रावजी हिचमी उर्फ रूशी उर्फ पवन हाल ही में मंडल का कमांडर बना है। यह भी आशंका है कि 1 मई की घटना का मास्टरमाइंड वही है।’ बहरहाल दादापुर गांव में अक्सर सन्नाटा ही रहता है और यहां नक्सलियों को उखाड़ फेंकने के लिए सुरक्षाबलों की कोशिशें जारी हैं।

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