राज्यसभा में पूर्वी लद्दाख के मुद्दे पर राज्य मंत्री की दो टूक- ‘चीन ने भंग की शांति, भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब’

राज्य मंत्री ने बताया कि पिछले साल अप्रैल-मई माह में चीन ने पश्चिमी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति को बदलने के लिए कई प्रयास किये। हालांकि इन प्रयासों का हमारी सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया है।

India-China

फाइल फोटो।

राज्यसभा के प्रश्नकाल के दौरान विदेश राज्य मंत्री ने बताया कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी सेना के अतिक्रमण की नीति के कारण दोनों देशों (India-China) की शांति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। हालांकि भारतीय सेना ने इन प्रयासों का माकूल जवाब दिया है और चीन को ये स्पष्ट से संदेश दे दिया है कि इस प्रकार की कोई भी हरकत पीएम मोदी के नये भारत के साथ संभव नहीं है। 

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विदेश राज्य मंत्री मुरलीधरन से चीन के साथ सीमा विवाद पर प्रश्न पूछा गया था। जिसके जवाब में मुरलीधरन ने कहा कि दोनों देश (India-China) बातचीत के जरिए एक साफ-सुथरा, तर्कसंगत और परस्पर स्वीकार्य समाधान निकालने पर सहमत हुए हैं। साथ ही दोनों देश इस बात पर भी राजी हैं कि काफी समय से लंबित सीमा विवाद का हल निकाले जाने तक एलएसी के आस-पास शांति बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए बेहद जरूरी आधार है।

राज्य मंत्री ने बताया कि पिछले साल अप्रैल-मई माह में चीन ने पश्चिमी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति को बदलने के लिए कई प्रयास किये। हालांकि इन प्रयासों का हमारी सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया है। साथ ही चीन को यह स्पष्ट संदेश भी दिया कि इस तरह के एकतरफा प्रयास भारत को नामंजुर है। इन कार्रवाइयों से पश्चिमी सेक्टर (पूर्वी लद्दाख) में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति बहुत बुरी तरह से प्रभावित हुई है।

मंत्री मुरलीधरन ने पूर्वी लद्दाख में गतिरोध को लेकर बताया कि पिछले कुछ महीने में हमने कूटनीतिक और सैन्य कमांडरों के माध्यम से चीन के साथ बातचीत की है, जिससे संघर्ष वाले सभी जगहों से सैनिकों की वापसी और एलएसी के सीमान्त इलाकों पर शांति सुनिश्चित हो सके। राज्य मंत्री ने आगे कहा कि दोनों देशों (India-China) ने एलएसी मामलों पर विचार-विमर्श और समन्वय के लिए कार्यकारी तंत्र की 6 बैठकें की हैं और वरिष्ठ कमांडरों की 9 बैठकें हुई हैं।

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