‘इस बार घर आऊंगा तो दौड़ाना शुरू कराऊंगा’, शहीद का बेटे से किया वादा रह गया अधूरा

शहीद लांस नायक राज सिंह (Martyr Raj Singh) गुरुग्राम के गांव दमदमा के रहने वाले थे। शहीद के शहादत की खबर जैसे ही उनके घर में पहुंची तो वहां शोक की लहर दौड़ गई।

Martyr Raj Singh

शहीद राज सिंह (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में डोडा के में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ में हरियाणा के जवान लांस नायक राज सिंह शहीद (Martyr) हो गए। शहीद लांस नायक राज सिंह (Martyr Raj Singh) गुरुग्राम के गांव दमदमा के रहने वाले थे। शहीद के शहादत की खबर जैसे ही उनके घर में पहुंची तो वहां शोक की लहर दौड़ गई।

सैनिक सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई: शहीद का पार्थिव शरीर 18 मई को दोपहर बाद 3.30 बजे उनके पैतृक गांव दमदमा पहुंचा, जहां पर उन्हें पूरे राजकीय व सैनिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। लांस नायक राज सिंह (Martyr Raj Singh) खटाना को गगन भेदी नारों ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, राज सिंह तेरा नाम रहेगा और भाई राज सिंह अमर रहे’ के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनका पार्थिव शरीर 18 मई को विशेष विमान से जम्मू-कश्मीर के उधमपुर से दिल्ली लाया गया, जहां से सड़क मार्ग से सेना के विशेष वाहन में गुड़गांव से उनके पैतृक गांव दमदमा पहुंचा।

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बेटा बोला, पिता की तरह करेगा देशसेवा: मां को अपने शहीद बेटे की शहादत पर फख्र है, उसने कहा कि बेटा राज सिंह देश के काम आया और उसके दूध की लाज रखी। पत्नी रवीता को भी अपने पति की वीरता पर गर्व है। उन्होंने कहा कि बेटे रिषभ तथा अनुराग को भी देश सेवा के लिए सेना में जाने के लिए प्रेरित करेंगी। 10 साल का बेटा रिषभ बोला कि पिता की तरह वे भी सेना में भर्ती होगा और देश सेवा करेगा।

इस बार घर आऊंगा तो दौड़ाना शुरू कराऊंगा: देशसेवा तो विरासत में मिली है। पति ने एक दिन पहले भी फोन पर हुई बात में कहा था कि रिषभ की डाइट का ध्यान रखना। उसे भी फौज में भेजूंगा। रुंधे गले से रवीता ने बताया रिषभ से भी उन्होंने बात की थी और कहा था कि इस बार घर आऊंगा तो दौड़ाना शुरू कराऊंगा। दूध छक कर पिया करो। बेटे ने भी पिता से फौज में जाने की इच्छा जाहिर की थी।

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शहादत से पहले मां से की थी वीडियो कॉल पर बात: जवान राज सिंह (Martyr Raj Singh) के गांव दमदमा में जहां एक तरफ गम का माहौल है, वहीं गांव और परिवार के लोगों को अपने सपूत की शहादत पर गर्व भी है। ग्रामीणों के अनुसार राज सिंह बड़े ही सहनशील मिजाज और खेल के शौकीन थे। उनकी शहादत के बाद ग्रामीण अपने गांव के इस वीर सपूत की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। जवान राज सिंह ने शहादत से पहले अपनी मां से वीडियो कॉल पर बात की थी। वीडियो कॉल पर राज ने मां से अपना ख्याल रखने और छुट्टी मिलते ही घर आने की बात कही थी।

पिता भी थे सेना में: राज सिंह अपने चार बहनों व तीन भाइयों में दूसरे नंबर की संतान थे। उनकी सभी बहनें शादीशुदा हैं, दो छोटे भाई अभी पढ़ाई कर रहे हैं। शहीद राज सिंह (Martyr Raj Singh) के पिता गजराज सिंह भी आर्मी से रिटायर्ड थे। करीब पांच साल पहले एक एक्सीडेंट में लगी चोट के कारण उनकी मौत हो गई थी। शहीद राज सिंह अपने पीछे पत्नी रवीता तथा 3 बच्चे, 10 साल के रिषभ , 6 साल की इशिका और 4 साल के अनुराग छोड़ गए हैं।

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रोज करते थे बच्चों से बात: शहीद लांस नायक राज सिंह (Martyr Raj Singh) ने गांव खेड़ला के स्कूल से 12वीं की थी और सितंबर 2011 में सेना में भर्ती हुए थे। शहीद राज सिंह 6 महीने से लगातार ड्यूटी पर तैनात थे। इस दौरान नियमित रूप से वे फोन पर अपने बच्चों से बात करते थे और उन्हें अच्छे से पढ़ाई करने की सलाह देते थे।

17 मई को आतंकियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन में थे शामिल: शहीद (Martyr Raj Singh) के पार्थिव शरीर के साथ आए 10 राष्ट्रीय राइफल्स के सूबेदार दयाराम ने बताया कि 16 मई को शाम को उनकी रेजीमेंट को सूचना मिली थी कि जम्मू कश्मीर के डोडा क्षेत्र के गांव तसनाल व हंच में आतंकवादी छिपे हुए हैं। 17 मई को सुबह सेना तथा जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से गांव में आतंकवादियों को ढूंढने का सर्च अभियान चलाया गया था।

घायल होने के बावजूद एक आतंकी को किया ढेर: ऑपरेशन सुबह 6 बजे शुरू हुआ। आतंकवादियों ने गोलियां चलानी शुरू कर दी और दोनों तरफ से गोलीबारी हुई। इस दौरान राज सिंह घायल हो गए, इसके बाद भी एक आतंकवादी को मार गिराया, लेकिन एक अन्य आतंकवादी की गोली उन्हें लग गई।

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