Kargil War: ले. कर्नल सतीश कुमार का ऐसा था अनुभव, जानें क्या थीं चुनौतियां

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में कारगिल युद्ध (Kargil War) लड़ा गया था। इस युद्ध में पाकिस्तानी सैनिकों को हमारे जवानों ने भगा-भगाकर मारा था। कश्मीर हड़पने की पाकिस्तान की चाह को हमारे वीर सपूतों ने नेस्तनाबूद कर दिया था।

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फाइल फोटो।

Kargil War: युद्ध में ले. कर्नल सतीश कुमार ने भी हिस्सा लिया था। मेंशन इन डिस्पैच, 11 गोरखा राइफल्स सतीश कुमार उस वक्त सेना में लेफ्टिनेंट पद पर तैनात थे।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में कारगिल युद्ध (Kargil War) लड़ा गया था। इस युद्ध में पाकिस्तानी सैनिकों को हमारे जवानों ने भगा-भगाकर मारा था। कश्मीर हड़पने की पाकिस्तान की चाह को हमारे वीर सपूतों ने नेस्तनाबूद कर दिया था। पाकिस्तान को जो जख्म और दर्द मिला था, वह आज तक उससे उबर नहीं सका है।

इस युद्ध में ले. कर्नल सतीश कुमार ने भी हिस्सा लिया था। मेंशन इन डिस्पैच, 11 गोरखा राइफल्स सतीश कुमार उस वक्त सेना में लेफ्टिनेंट पद पर तैनात थे। युद्ध से जुड़े अपने अनुभवों को ले. कर्नल सतीश कुमार ने साझा किया है। उन्होंने बताया है कि उन दिनों क्या क्या चुनौतियां थीं।

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वे बताते हैं, “सियाचिन के बाद हमारी यूनिट पुणे की तरफ रवाना हो रही थी। हालांकि, कुछ जवान पहले ही पुणे पहुंच चुके थे। कारगिल में उन दिनों हालात बहुत खराब थे। पाकिस्तान ऊंचाई वाले क्षेत्रों पर कब्जा जमाए बैठा था, जबकि हम नीचले इलाकों से उन तक पहुंचते थे। इस दौरान हमें बर्फ मुंह में रखकर प्यास बुझानी पड़ती थी। जिंदा रहना एक बड़ी चुनौती थी।”

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वे आगे बताते हैं, “खाना पहुंचाने के लिए संदेश भेजना पड़ता था। एक बार मैसेज मिला कि छह-सात दिन बाद खाना मिल सकता है। हम बेसब्री से खाने का इंतजार कर रहे थे। एक समय तो ऐसा आया था जब एक सूबेदार हमारे खाना लेकर पहुंचा ही था, तभी  दुश्मनों ने फायरिंग कर दी थी। खाना मौके पर ही बिखर गया था। 26 जुलाई को पोस्ट पर कब्जा करने से पहले हमें स्पेशल फोन मुहैया कराया गया था। इसके जरिए हमने परिवार से बात की थी।”

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