बर्फीले तूफान के बीच ‘ऑपरेशन मेघदूत’ को सेना ने दिया था अंजाम, 3 दिनों तक हुई थी भीषण सैन्य कार्रवाई

युद्ध के इतिहास में यह एक अद्वितीय अभियान था। बाद में पोस्ट का नाम इस अभियान में विशिष्ट योगदान के लिए एक बहादुर सैनिक के नाम पर ‘बाना टॉप’ रख दिया गया था।

India China Tension

फाइल फोटो।

युद्ध के इतिहास में यह एक अद्वितीय और असाधारण अभियान था। बाद में पोस्ट का नाम इस अभियान में विशिष्ट योगदान के लिए एक बहादुर सैनिक के नाम पर ‘बाना टॉप’ रख दिया गया था।

भारतीय सेना (Indian Army) ने जंग के मैदान में कई ऑपरेशन्स को अंजाम दिया है। 1948 से लेकर अबतक सेना योजनाबद्ध तरीके से अलग-अलग ऑपरेशनों को अंजाम देती आई है। भारतीय सेना के ऑपरेशन्स की बात की जाए तो ‘ऑपरेशन मेघदूत’ की अलग ही पहचान है। सेना ने इसे बर्फीले तूफान के बीच अंजाम दिया था। सेना ने ‘ऑपरेशन मेघदूत’ चलाकर सियाचिन पर कब्जा किया था। ‘ऑपरेशन मेघदूत’ को 1999 के कारगिल वॉर का ब्लूप्रिंट कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि सियाचिन पर कब्जे की लड़ाई ने ही कारगिल वॉर की बुनियाद रखी थी।

दरअसल ऑपरेशन मेघदूत भारत की उत्तरी सीमा के सियाचिन-ग्लेशियर क्षेत्र में लड़ा जाने वाला एक चुनौतिपूर्ण सैनिक अभियान है। इस क्षेत्र में पाकिस्तान की ‘कायदे आजम’ पोस्ट 21,153 फीट ऊंचाई पर 1,500 फीट की बर्फीली दीवार पर किले की तरह स्थित थी। यह पोस्ट नजदीकी सभी भारतीय पोस्टों पर हावी थी। सामरिक महत्व वाली इस पोस्ट पर कब्जा करने के लिए सेना ने 23 जून 1987, को हमले की कार्रवाई शुरू की।

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मुश्किल और प्रतिकूल परिस्थितियों, शून्य से 50 डिग्री कम तापमान एवं बर्फीले तूफानों के बीच भारतीय 8 जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फेन्ट्री के जांबाज सैनिकों ने तीन दिन तथा तीन रातों तक भीषण सैन्य कार्रवाई करते हुए, 26 जून 1987 को पाकिस्तानी पोस्ट पर अपना कब्जा जमा लिया था। युद्ध के इतिहास में यह एक अद्वितीय और असाधारण अभियान था। बाद में पोस्ट का नाम इस अभियान में विशिष्ट योगदान के लिए एक बहादुर सैनिक के नाम पर ‘बाना टॉप’ रख दिया गया था।

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