200 नक्सलियों से अकेले भिड़ गया यह दिलेर, शहादत से पहले मचाया मौत का तांडव

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तारीख थी 16 अप्रैल, 2013… अचानक 70 माओवादियों के एक गिरोह ने आंध्रप्रदेश-छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर तैनात टीम-ग्रेहाउंड पर हमला कर दिया। टीम-ग्रेहाउंड भारत के बेहतरीन एंटी-एक्सट्रिमिस्ट फोर्सेज में से एक है। जवानों और नक्सलियों के बीच भीषण गोलीबारी होने लगी। अचानक हुए इस हमले के लिए सैनिक तैयार नहीं थे। उस वक्त इंस्पेक्टर के. प्रसाद बाबू (K Prasad Babu) ने टीम की अगुवाई की। जवान लगातार उग्रवादियों से मुठभेड़ करते रहे। कुछ समय बाद बचाव दल के हेलीकॉप्टर भी वहां पहुंच गए। हमले के स्थान से जवानों को हटाया जाने लगा। अभी 19 सैनिक वहां से निकाले जाने बाकी थे कि तभी माओवादियों ने हेलीकॉप्टरों पर हमला शुरू कर दिया। के. प्रसाद बाबू (K Prasad Babu) ने तय किया कि 5 जवान बचाव दल के हेलीकॉप्टर्स को कवर फायर देंगे। इस तरह 19 में से 14 जवान और वहां से निकाल लिए गए। अब  केवल 5 जवान नीचे रह गए थे।

शहीद के. प्रसाद बाबू

माओवादियों ने हेलीकॉप्टरों पर हमला तेज कर दिया। अगर थोड़ी देर और हेलीकॉप्टर्स वहां रूकते तो हमले की वजह से ब्लास्ट हो सकते थे। इसलिए उन्हें बाकी सिपाहियों को लेकर वापस जाना पड़ा। के. प्रसाद बाबू (K Prasad Babu) सहित अन्य 4 पुलिसकर्मी वहां घिर गए। इतने में लगभग 200 नक्सलियों का एक और गिरोह वहां आ पहुंचा। हालात और भी मुश्किल हो गए। तब के. प्रसाद बाबू (K Prasad Babu)  ने अपने बाकी चार साथियों को जाने के लिए कहा और दो सौ नक्सलियों से अकेले तब तक मुकाबला करते रहे, जब तक उनके साथी वहां से सुरक्षित बाहर नहीं निकल गए। उनके पास गोले-बारूद खत्म हो गए थे और गोलियां भी कम थीं। उस घने जंगल में अकेले होते हुए भी उनके हौसले पस्त नहीं हुए। वे एक सच्चे योद्धा की तरह कई घंटों तक लड़ते रहे। के. प्रसाद बाबू (K Prasad Babu) ने नौ नक्सलियों को मार गिराया और कई हमलावरों को घायल कर दिया। बाद में के. प्रसाद बाबू (K Prasad Babu) को नक्सलियों ने पकड़ लिया। उन्हें टॉर्चर किया और उनकी हत्या कर दी। शहादत से पहले इस जांबाज ने चार साथी अधिकारियों की जान बचाई और 9 शीर्ष माओवादियों को मारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से अशोक-चक्र ग्रहण करते प्रसाद बाबू के पिता

भारत सरकार ने उनके इस पराक्रम के लिए उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया, जो शांति-काल का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। के. प्रसाद बाबू (K Prasad Babu) अशोक चक्र से सम्मानित होने वाले आंध्र प्रदेश के पहले पुलिस अधिकारी हैं। के. प्रसाद बाबू 2004 में आंध्र प्रदेश पुलिस में शामिल हुए। उनकी प्रतिभा देखकर उन्हें जल्द ही ग्रेहाउंड्स डिवीजन में ट्रांसफर कर दिया गया। यह डिविजन एंटी-माओ ऑपरेशन्स और जंगल-वार में माहिर है। प्रसाद बाबू राज्य पुलिस के एंटी-माओवादी ग्रेहाउंड्स स्पेशल ऑपरेशन फोर्स में इंस्पेक्टर बना दिए गए।

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले के मारतुरू गांव का रहने वाला यह बहादुर अधिकारी सिर्फ 32 साल का था। एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले के. प्रसाद बाबू (K Prasad Babu) के पिता के. वेंकटरमैया आंध्र प्रदेश पुलिस विभाग के रिटायर्ड सर्किल इंस्पेक्टर हैं। प्रसाद बाबू की स्कूली शिक्षा गांव से ही हुई थी। इसके बाद उन्होंने अनकपल्ले में कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। अपने शहीद बेटे की ओर से पुरस्कार प्राप्त करने के बाद उनके पिता ने कहा, “अब सिर्फ यह पदक और उसकी यादें ही मेरे और मेरी पत्नी के लिए रह गई हैं।” भारत मां के इस दिलेर बेटे को शत शत नमन।

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