दंतेवाड़ा: डीआरजी जवानों ने ध्वस्त किया नक्सली स्मारक, ऐसे मिली थी सूचना

छत्तीसगढ़(Chhattisgarh) के दंतेवाड़ा (Dantewada) जिले में जवानों ने एक बार फिर नक्सलियों के स्मारक (Naxali Monument) को ध्वस्त किया है। जिले के किरन्दुल के गुमियापाल-रैयपारा जंगल में नक्सली कमांडर पोड़िया का स्मारक डीआरजी के जवानों ने ध्वस्त किया।

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दंतेवाड़ा (Dantewada) जिले में जवानों ने एक बार फिर नक्सलियों के स्मारक (Naxali Monument) को ध्वस्त किया है।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के दंतेवाड़ा (Dantewada) जिले में जवानों ने एक बार फिर नक्सलियों के स्मारक (Naxali Monument) को ध्वस्त किया है। जिले के किरन्दुल के गुमियापाल-रैयपारा जंगल में नक्सली कमांडर पोड़िया का स्मारक डीआरजी के जवानों ने ध्वस्त किया। इस नक्सली स्मारक के बारे में स्थानीय लोगों ने पुलिस (Police) को सूचना दी थी। सूचना मिलने के बाद दंतेवाड़ा जिले के एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव ने डीआरजी (DRG) की टीम को सर्चिंग के लिए गुमियापाल के जंगलों में भेजा था। वहीं पहुंचकर जवानों ने नक्सली पोड़िया के स्मारक को ध्वस्त कर दिया।

बता दें कि 28 जुलाई से नक्सली शहीदी सप्ताह मना रहे हैं। इस दौरान वे अपने मारे गए साथियों को याद करते हैं। नक्सली (Naxalites) अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में पुलिस के साथ मुठभेड़ में अपने मारे गए अपने साथियों के नाम से नक्सली स्मारक (Naxali Monument) बनाते हैं और इन स्मारकों के आधार पर उनके प्रभाव क्षेत्र का सीमांकन होता है। इसके साथ ही वे अलग-अलग मौकों पर शहीदी सप्ताह भी मनाते हैं, जिसमें वे मारे गए नक्सलियों को याद करते हैं।

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अपने प्रभाव वाले इलाकों में नक्सली (Naxals) ग्रामीणों को भी इस शहीदी सप्ताह में शामिल होने के लिए जबरदस्ती दबाव बनाते हैं। इस दौरान वे अपनी बातों को ग्रामीणों तक पहुंचाने और उनमें भय पैदा करने के लिए पोस्टर- बैनर का सहारा लेते हैं। इनमें लोकतंत्र विरोधी बातें लिखी होती हैं, साथ ही ग्रामीणों के लिए सीधी धमकी भी होती है। पिछले दिनों किरंदुल रेल खंड में भी नक्सलियों ने ऐसे ही बैनर लगाकर और पोस्टर फेंककर रेल परिवहन का बाधित करने की कोशिश की थी।

नक्सलियों की इन हरकतों का सुरक्षा बल यहां मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं। नक्सलियों (Naxalites)  द्वारा शहीदी सप्ताह की घोषणा के साथ ही सुरक्षा बल भी पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं और नक्सल प्रभावित अंदरूनी इलाकों तक गश्ती कर रहे हैं। इससे गांव वालों की हिम्मत भी बढ़ी है। वे भी खुलकर नक्सलियों के सामने आ रहे और पुलिस का साथ दे रहे हैं।

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बता दें कि पिछले दिनों यहां के नक्सल प्रभावित नीलावाया गांव के आस-पास बनाए गए शहीदी स्मारक को स्थानीय ग्रामीणों ने ही तोड़ दिया था। बस्तर में बड़े नक्सली नेताओं के पुलिस के हाथों मारे जाने के बाद अब इनका नेतृत्व यहां कमजोर पड़ चुका है। इस वजह से नक्सली (Naxalites) बैकफुट पर आ गए हैं। वे अपनी बौखलाहट में आकर पोस्टरबाजी कर दहशत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

गौरतलब है कि नक्सली (Naxals) 28 जुलाई से 3 अगस्त तक शहीद स्मृति सप्ताह मना रहे हैं। वे जगह-जगह बैनर-पोस्टर लगा रहे हैं। किरन्दुल इलाके के ही काठमांडू, आकाश नगर बचेली, अरनपुर सहित बारसूर, बोदली आदि कई जगहों पर नक्सलियों ने बैनर-पोस्टर लगाया है और पर्चे फेंके हैं। जिसमें नए पुलिस कैंप खोलने, बोधघाट बांध, आमदाई तुलार खदान एवं पल्ली बारसूर सड़क का विरोध किया है। हालांकि, पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। नक्सलियों की हर मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है।

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