देश भर में हो रही इस नक्सलग्रस्त इलाके की चर्चा, पीएम मोदी ने भी दी शाबाशी, जानें क्या है कारण…

नक्सल (Naxal) घटनाओं की वजह से चर्चा में रहने वाला छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) का नारायणपुर जिला वित्तीय समावेशन और कौशल विकास के क्षेत्र में देश के आकांक्षी जिलों की सूची में नंबर वन पर पहुंच गया है।

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छत्तीसगढ़ का धुर नक्सल (Naxal) प्रभावित नारायणपुर जिला देश के 115 आकांक्षी जिलों में टॉप पर है।

नक्सल (Naxal) घटनाओं की वजह से चर्चा में रहने वाला छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) का नारायणपुर जिला वित्तीय समावेशन और कौशल विकास के क्षेत्र में देश के आकांक्षी जिलों की सूची में नंबर वन पर पहुंच गया है। प्रधानमंत्री ने भी जिले की उपलब्धियां देख जिला प्रशासन को शाबाशी दी है।

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नीति आयोग ने देश के टॉप 5 जिलों की सूची जारी की है।

छत्तीसगढ़ का धुर नक्सल (Naxal) प्रभावित नारायणपुर जिला देश के 115 आकांक्षी जिलों में टॉप पर है। नीति आयोग ने देश के टॉप 5 जिलों की सूची जारी की है। यह जिले वित्तीय समावेश और कौशल विकास के क्षेत्र में देश में सबसे बेहतर बताए गए हैं। इन आंकांक्षी जिलों में छत्तीसगढ़ का नारायणपुर जिला पहले स्थान पर है। इस रैंकिंग में तीसरे नंबर पर राजनांदगांव और पांचवें नंबर पर सुकमा जिला है। इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर राजस्थान का जैसलमेर और चौथे स्थान पर मिजोरम का ममित जिला है। नीति आयोग इसका आकलन “वित्तीय सेवा मुहैया कराए जाने” एवं “युवाओं को रोजगार दिलाने” के मापदंडों को आधार मानकर करता है। नीति आयोग ने नवंबर 2019 तक की स्थिति में यह डेल्टा रैंकिंग जारी की है। 

धुर नक्सल (Naxal) प्रभावित नारायणपुर जिले का यह विकास प्रशासन के अथक प्रयासों और जुझारू टीम की बदौलत संभव हो पाया है। जिलाधिकारी पीएस एल्मा के मुताबिक, एक लाख, 39 हजार की आबादी वाले इस जिले में एक लाख 52 हजार खाते खोले गए हैं। गांव के 15 से 29 साल तक के अशिक्षित युवाओं को गांवों में ही शिविर लगाकर कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण से तीन हजार से अधिक युवक-युवतियों को रोजगार मिला। बैंकों से बेहतर तालमेल कर करीब चार सौ युवाओं को ‘मुद्रा लोन योजना’ के तहत पांच करोड़, 36 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाई गई। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा, अटल पेंशन योजना और जनधन योजना के तहत बेहतर कार्य कर शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया गया। 

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नक्सल (Naxal) हिंसा का दंश झेलकर मुख्यालय में शरण लेने वाली आदिवासी महिलाओं और युवतियों को ‘बिहान योजना’ के तहत स्वसहायता समूह बनाकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। आदिम जनजाति को प्रोत्साहित करने के लिए अति नक्सल (Naxal) ग्रस्त अबूझमाड़ की महिलाओं और युवतियों को साबुन, खिलौने, चूड़ी, सिलाई, कंपोस्ट खाद, बांस के आभूषण, फर्नीचर, ट्री गार्ड, झाड़ू आदि बनाने के साथ ही सीमेंट और इंटरलॉकिंग टाइल्स बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। राजमिस्त्री का काम भी सिखाया गया है। आज ये महिलाएं आत्मनिर्भर बन अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। इंटरनेट की सुविधाओं का विस्तार करते हुए 44 पंचायतों को हाईटेक बनाया गया। शिक्षा के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर काम किया गया। खेल-खेल में अध्यापन कराने से बच्चों की क्षमता में वृद्धि हुई।

शिक्षक से प्रशासनिक अधिकारी बनने वाले एल्मा ने बताया कि बैंकिंग सुविधाओं का लाभ दिलाने को बैंक अकाउंट खोलने, मनरेगा मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, बैंक खाते, पीडीएस, गैस कनेक्शन, स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राओं के अकाउंट और आधार सीडिंग करने लोक सेवा केंद्र एवं कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से जनसुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। कर्मचारी आदि का बैंकों के जरिए बीमा कराया जा रहा है। मल्टी जिम, लेडीज ब्यूटी पॉर्लर, बेकरी, मिनी राइस मिल, होटल व्यवसाय, शॉपिंग सेंटर, सुपर मार्केट, मल्टी कलर प्रिंटिंग प्रेस, छोटे लघु वनोपज आधारित प्रसंस्करण केंद्र से कोदो, कुटकी, कोसरा से चावल बनाकर पैकेजिंग कर मार्केटिंग की जा रही है। उन्होंने कहा कि तरक्की की यह रफ्तार अब थमेगी नहीं।

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