Covid 19 से बदहाल है अमेरिका, डोनाल्ड ट्रंप को सिर्फ राष्ट्रपति चुनाव की चिंता!

चुनावी साल में युद्ध, अमेरिका का एक ट्रस्टेड फंडा रहा है। लगता है ट्रंप भी इसी फंडे को आजमाना चाहते हैं। वॉर टाइम प्रेसिडेंट के रूप में अगला चुनाव लड़ना चाहते हैं। ऐसा करने पर वो कोरोना से निपटने में अपनी कमजोरियों को छिपा ले जाएंगे।

Covid 19

पूरी दुनिया जहां कोरोना वायरस (Covid 19) के खिलाफ संघर्ष कर रही है, वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति (Donald Trump) को कोरोना के अलावा एक दूसरा डर भी सता रहा है। चुनाव का डर। कोरोना कहीं दूसरी दफा राष्ट्रपति बनने के उनके ख्वाबों पर बट्टा ना लगा दे… इसी लिए डोनाल्ड ट्रंप  (Donald Trump) पूरी तरह आक्रामक मुद्रा में आते जा रहे हैं.. ऐसे वक्त में जब ये साफ हो चुका है कि कोरोना (Covid 19) से निपटने में अमेरिकी सरकार से बड़ी चूक हुई है और ये बात चुनावों में उनके खिलाफ जा सकती है… ट्रंप अलग ही रणनीति पर काम कर रहे हैं.. कम से कम आए दिन उनके बयानों से तो यही लगता है… अपनी कमियों को छिपाने के लिए एक नए बकरे की तलाश में हैं…

वैसे भी चुनावी साल में युद्ध, अमेरिका का एक ट्रस्टेड फंडा रहा है… लगता है ट्रंप भी इसी फंडे को आजमाना चाहते हैं… वॉर टाइम प्रेसिडेंट के रूप में अगला चुनाव लड़ना चाहते हैं… ऐसा करने पर वो कोरोना (Covid 19) से निपटने में अपनी कमजोरियों को छिपा ले जाएंगे… यही वजह है कि कोरोना को पहले चीनी वायरस कहते रहे… अब चीन में अपनी टीम भेजकर ये तस्दीक करना चाबहते हैं कि कहीं कोरोना वायरस (Covid 19), सच में चीन की कोई चाल तो नहीं… इन सब का मकसद एक खास तरह का सेंटिमेंट तैयार करना है.. जिसकी मदद से उनकी चुनावी नैया पार हो सके…

अमेरिका ने WHO पर लगाया चीन के दुष्प्रचार का आरोप, चीन के खिलाफ केस दर्ज

इस बात को एक घटना से बल मिलता है.. वो ये कि पिछले शनिवार को अमेरिका ने चीन पर परमाणु परीक्षण करने का आरोप लगा दिया। यूएस स्टेट डिपार्टमेंट की एक रिपोर्ट में तो यहां तक कह दिया गया कि चीन ने कोई न्यूक्लियर टेस्ट किया है। यूनाइटेड स्टेट की इस रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसा हो सकता है कि चीन ने अंडरग्राउंड न्यूक्लियर ब्लास्ट किया हो।

यूएस की इस रिपोर्ट में चीन के लोप नूर टेस्ट साइट का भी जिक्र है। वॉल स्ट्रीट जर्नल पर अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि चीन के लोप नूर टेस्ट साइट पर साल भर से इसकी तैयारियां चल रही थीं। आर्म्स कंट्रोल कंप्लाइंस की रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है। हालांकि इस परीक्षण का कोई सबूत इस रिपोर्ट में नहीं दिया गया है।

हालांकि यूएस के इस रिपोर्ट को बीजिंग ने साफ तौर से इनकार कर दिया है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजिआन ने कहा कि अमेरिका झूठे आरोप लगा रहा है। चीन परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ‘चीन ने हमेशा एक जिम्मेदार रवैया अपनाया है और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने के लिए ईमानदारी से वादों को पूरा किया है। अमेरिका का दावा पूरी तरह आधारहीन है।’

अब किसके आरोप सही हैं किसके गलत ये तो फिलहाल साफ नहीं है… लेकिन इतना जरूर है कि ये तनातनी अगर यूं ही बढ़ती रही.. तो ट्रंप को चुनाव में इसका फायदा मिल सकता है..

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