झारखंड के 10 बड़े नक्सलियों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति, 17 साल पहले ऐसे देते थे घटनाओं को अंजाम

आज से 17 साल पहले गिरिडीह में नक्सलियों द्वारा कई अमानवीय घटनाओं को अंजाम दिया गया था। उन नक्सलियों के खिलाफ गिरिडीह उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राहुल कुमार सिन्हा ने अभियोजन चलाने की अनुमति दे दी है।

Jharkhand

सांकेतिक तस्वीर।

झारखंड के कुख्यात नक्सली (Naxalites) मिथलेश सिंह उर्फ दुर्योधन महतो उर्फ बड़का दा समेत 10 नक्सलियों के खिलाफ गिरीडीह उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी राहुल कुमार सिन्हा ने अभियोजन की स्वीकृति दी है।

राज्य के मुख्य सचिव सहित गृह कारा विभाग को पत्र भेजकर नक्सलियों (Naxalites) के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति दी गई है।

आज से 17 साल पहले झारखंड में नक्सलियों का दबदबा रहता था। गिरिडीह और धनबाद के पारसनाथ समेत बोकारो, हजारीबाग, लुग्गू पहाड़ और आसपास के जंगलों से घिरे क्षेत्र में नक्सली बसेरा डाले रहते थे। यहां नक्सली लूट और हत्या जैसी कई वारदातों को अंजाम देकर जंगल में छुप जाते थे।

आज से 17 साल पहले गिरिडीह में नक्सलियों द्वारा कई अमानवीय घटनाओं को अंजाम दिया गया था। उन नक्सलियों के खिलाफ गिरिडीह उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राहुल कुमार सिन्हा ने अभियोजन चलाने की अनुमति दे दी है और राज्य के प्रधान सचिव एवं गृह कार्य विभाग को पत्र प्रेषित कर दिया है।

इन नक्सलियो के खिलाफ अभियोजन

गिरिडीह उपायुक्त ने भाकपा माओवादी के रीजनल कमेटी सदस्य एवं 15 लाख के इनामी नक्सली मिथिलेश सिंह उर्फ दुर्योधन महतो उर्फ बड़का दा, नक्सली कमांडर नवीन मांझी ,प्रवीण किस्कु उर्फ बिपिन किस्कु,नागों दा उर्फ नागेश्वर महतो ,खूबलाल उर्फ खेमलाल महतो ,राजेन्द्र सिंह , कैलाश चन्द्र महतो उर्फ कैला , ढालचन्द महतो,मेघलाल महतो , ढलीचन्द महतो के खिलाफ अभियोजन चलाने की स्वीकृति दी है ।

कहां के रहने वाले हैं ये नक्सली

बता दें कि मिथिलेश सिंह उर्फ दुर्योधन महतो धनबाद जिला अंतर्गत तोपचांची थाना क्षेत्र के गेंद नावाडीह गांव का रहने वाला है। वहीं जेल में बंद गिरिडीह जिले के डुमरी थाना क्षेत्र अंतर्गत भरखर पंचायत के चीनिकीरो के रहने वाले नवीन मांझी, डुमरी के अमरा निवासी नागेश्वर महतो उर्फ नागौ दा, चीनी किरो निवासी प्रवीण उर्फ विपिन किस्कु, निमियाघाट थाना क्षेत्र के खेमलाल महतो उर्फ खूबलाल, डुमरी के भरखर निवासी राजेंद्र सिंह, मेघलाल महतो ढालचंद महतो एवं दलीचंद महतो, डुमरी के खेत गढ़ी निवासी कैलाश महतो उर्फ कैला माता के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुशंसा राज्य सरकार से की गई है।

क्या है मामला

17 साल पहले 21 अक्टूबर 2003 को तत्कालीन गिरिडीह एसपी को गुप्त सूचना मिली थी कि निमियाघाट थाना क्षेत्र के नगला के दर्द हरिया जंगल के पास नक्सलियों का जमावाड़ा हुआ है और वे कोई बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में हैं। इस गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने पूरी तैयारी कर उस जगह को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद नक्सलियों ने पुलिस पार्टी पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी।

निमियाघाट थाना क्षेत्र अंतर्गत नगलो पहाड़ के धधरिया चढ़ाई जंगल के पास पुलिस एवं नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ में प्रवीण किस्कु नामक माओवादी को पुलिस ने पकड़ा था। निमियाघाट के तत्कालीन थानेदार अशोक कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने कार्रवाई की थी। इसके बाद दबोचे गए नक्सली प्रवीण किस्कु ने पुलिस के सामने कई राज उगले थे। इसकी निशानदेही पर पुलिस ने हथियार बम सहित एक बाइक और नक्सली साहित्य को जब्त करने में सफलता हासिल की थी।

2003 के दौरान अमरा खेचगढ़ी सहित पारसनाथ के तराई इलाकों में जाना मौत को न्यौता देना था। इन इलाकों में घुसने से पहले यह डर लगा रहता था कि कहीं नक्सली जान से ना मार दें।

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क्योंकि ऐसी कई घटनाएं इन क्षेत्रों में नक्सलियों द्वारा की गई हैं, जिससे आज भी इन इलाकों में जाने से पहले डर लगने लगता है। हालांकि विकास होने के बाद अब इन क्षेत्रों में नक्सलियों का प्रभाव पहले की अपेक्षा कम हुआ है।

उस दौरान तो नक्सली रात को अपने समूह के साथ इन गांवों में आते थे और वैसे लोगों को निशाना बनाते थे, जिनके घर में दो पहिया वाहन अथवा चार पहिया वाहन रहता था। दोपहिया वाहनों में लगी बैटरी से ये नक्सली बम विस्फोट कर फरार हो जाते थे और दोपहिया को घटनास्थल पर ही छोड़कर चले जाते थे।

इस वजह से दो पहिया वाहन मालिकों को भी पुलिस नक्सली के रूप में प्रस्तुत करती थी। इन नक्सलियों के काले कारनामों से आज वे वाहन मालिक भी नक्सलियों की श्रेणी में है, जिनका कोई दोष नहीं है। क्योंकि नक्सलियों को अगर वाहन नहीं मिलता तो वो वाहन मालिक को ही मौत के घाट उतार देते थे।

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