छत्तीसगढ़: जेल में बंद माओवादियों को सुधारने के लिए तैयार किया जा रहा कोर्स, विचारधारा को करेगा प्रभावित

आईजी सुंदरराज पी ने इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि वर्तमान में कोर्स मनुअल की तैयारी चल रही है। क्लासें दंतेवाड़ा जिला जेल में शुरू होंगी।

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सांकेतिक फोटो

मैनुअल फाइनल करने से पहले पुलिस जानकारी निकालेगी कि किन जेलों में माओवादी (Maoists) बाकी लोगों को विचारधारा के जरिए प्रभावित कर रहे हैं।

रायपुर: छत्तीसगढ़ में माओवादियों (Maoists) के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस बीच खबर सामने आई है कि छत्तीसगढ़ पुलिस, सरेंडर करने वाले और गिरफ्तार हुए माओवादियों को सुधारने के लिए जल्द एक कोर्स की शुरुआत करेगी।

आईजी सुंदरराज पी ने इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि वर्तमान में कोर्स मैनुअल की तैयारी चल रही है।

पुलिस ने बताया कि इस कोर्स से जुड़ी क्लासें दंतेवाड़ा जिला जेल में शुरू होंगी, जहां वर्तमान में करीब 600 माओवादी हैं। अभी कोरोना काल चल रहा है, इसलिए किसी भी बाहरी व्यक्ति को जेल में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि ये नक्सलियों की विचारधारा और विचार प्रक्रिया को प्रभावित करने के उद्देश्य से सुधार और प्रोत्साहन देने का एक कोर्स होगा।

आईजी ने ये भी कहा कि ये पहला मौका है जब इस तरह का कोर्स चलाया जा रहा है। इससे उन नक्सलियों को भी फायदा होगा जो जेल काटने के बाद फिर अपने कैडर में वापस चले जाते हैं। वे इस कोर्स को करने के बाद महसूस करेंगे कि पुलिस और सरकार उनकी दुश्मन नहीं है बल्कि उन्हें सुरक्षा देती है।

वहीं जो पुलिस अधिकारी एंटी माओवादी ऑपरेशन को लीड करते हैं, उनका कहना है कि 90 फीसदी गिरफ्तार और सरेंडर करने वाले नक्सलियों को ये पता ही नहीं होता कि वो लड़ क्यों रहे हैं।

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एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि माओवादी (Maoists) देश के संविधान के बारे में कुछ नहीं जानते और ना ही उन्हें अपने अधिकारों के बारे में पता होता है। ज्यादातर नक्सलियों को ये सिखा दिया जाता है कि पुलिस और सरकार उनकी दुश्मन है।

ऐसे में पुलिस का मानना है कि इस कोर्स के आने से माओवादी (Maoists) सामाजिक चीजों के बारे में जानेंगे और ये कोर्स सफल साबित होगा।

पुलिस का कहना है कि इस कोर्स का एक मकसद ग्रामीणों की सुरक्षा भी है, जिससे वह माओवादियों के गलत प्रचार से भ्रमित ना हो जाएं।

ऐसे में दंतेवाड़ा पुलिस कोर्स मैनुअल तैयार कर रही है, जिससे माओवादी समझ सकें कि नक्सलवाद, इस देश, राज्य और समाज के लिए क्या कर सकता था।

मैनुअल को फाइनल करने से पहले पुलिस इस बात के बारे में जानकारी निकालेगी कि किन जेलों में माओवादी, विचारधारा के जरिए बाकी लोगों को प्रभावित कर रहे हैं।

दंतेवाड़ा के एसपी अभिषेक पल्लव ने बताया है कि 100 सवालों को ये जानने के लिए तैयार किया गया है कि व्यक्ति किस तरह सोचता है और किस हद तक प्रभावित हो सकता है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ये कोर्स मैनुअल 11 बड़ी कैटेगरी में बांटा गया है। इसमें नक्सलवाद और उनके कैडर में ज्वाइनिंग का प्रोसेस, आदिवासी कला और संस्कृति की हानि, गरीबों की इकोनॉमी की हानि, भारतीय संविधान, आदिवासियों की सुरक्षा के लिए कानूनी फ्रेमवर्क, पंचायत एक्ट, पंचायती राज एक्ट, जंगल राइट एक्ट और पब्लिक सेफ्टी एक्ट को शामिल किया गया है।

एसपी पल्लव ने कहा कि इस कोर्स का नाम बदलाम एक्का रखा जाएगा। जो गोंडी बोली में है क्योंकि जेल के ज्यादातर माओवादी हिंदी नहीं जानते।

जल्द ही इस कोर्स को पढ़ाने के लिए ट्रेनर्स की एक टीम बनाई जाएगी। ये ट्रेनर ही माओवादियों की क्लास लेंगे।

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