अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर जलील हुआ पाकिस्तान, जम्मू कश्मीर पर प्रस्ताव के मुद्दे पर कई देशों ने नहीं दिया साथ

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कुमम मिनी देवी

जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत के खिलाफ पाकिस्तान की कोशिश एक बार फिर से नाकाम हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को एक बार फिर निराशा हाथ लगी है। दरअसल, 19 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में कश्मीर पर प्रस्ताव पेश करने का अंतिम दिन था। लेकिन पाकिस्तान आवश्यक समर्थन नहीं जुटा सका। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के कश्मीर पर प्रस्ताव को अधिकतर देशों ने समर्थन देने से मना कर दिया। नियम के मुताबुक, किसी भी देश के प्रस्ताव पर कार्रवाई करने से पहले न्यूनतम समर्थन की जरूरत होती है। प्रस्ताव पेश करने के लिए कम से कम 16 देशों के समर्थन की जरूरत थी। दुनिया भर में कश्मीर का रोना रोने वाला पाकिस्तान यह समर्थन जुटाने में नाकाम रहा।

पाकिस्तान और इमरान खान पूरी दुनिया के सामने भले कश्मीर को लेकर गलत तथ्य पेश कर रहे हों, लेकिन दुनिया पाकिस्तान के असलियत को जान गई है, और इसलिए पाकिस्तान को साथ नहीं रहा है। उल्लेखनीय है कि जिनेवा में UNHRC का 42वां सत्र चल रहा है। UNHRC में कश्मीर मुद्दे पर चर्चा के दौरान भारत की सचिव कुमम मिनी देवी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हमारा फैसला भारत का संप्रभु और आंतरिक मामला है। हमारे फैसले को गलत तरीके से पेशकर पाकिस्तान इलाके को लेकर अपनी नीयत छिपा नहीं सकता है। एक बार पीओके और पाकिस्तान के इलाकों के संदर्भ में बात होनी चाहिए। लोगों का गायब होना, हिरासत में रेप की घटना, हिरासत में हत्या की घटना, प्रताड़ित करना, समाजिक कार्यकर्ता और पत्रकारों के मानवाधिकारों का उल्लंघन वहां आम बात है।

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पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इस्लामाबाद से जिनेवा के लिए रवाना होने से पहले कश्मीर पर प्रस्ताव का वादा किया था। खास बात यह है कि पाकिस्तान को इस मुद्दे पर इस्लामिक सहयोग संगठन का भी समर्थन प्राप्त नहीं हो सका। UNHRC में इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) के 15 देश हैं। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि वह इसके बाद समर्थन जुटा लेगा। पर ऐसा नहीं हो सका। भारत के खिलाफ कश्मीर पर प्रस्ताव लाने की पाकिस्तान की एक कोशिश विफल हो गई। पाकिस्तानी राजनयिक गुस्से में UNHRC परिसर से बाहर आ गए। पाकिस्तान ने इससे पहले 10 सितंबर को UNHRC को कश्मीर की स्थिति पर एक संयुक्त बयान सौंपा था। इसमें उसने 60 देशों के समर्थन की बात कही थी, लेकिन कौन से देश समर्थन कर रहे हैं, इसको वो नहीं बता पाया था।

47 सदस्यों वाले यूएनएचआरसी में पाकिस्तान के पास तीन विकल्प थे। पहला, प्रस्ताव, दूसरा, बहस या फिर तीसरा, विशेष सत्र। प्रस्ताव तो अब इस विकल्प से बाहर ही हो गया। विशेष सत्र सबसे मजबूत विकल्प हो सकता है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, सामान्य सत्र जो 27 सितंबर तक चलेगा, उसके बीच विशेष सत्र आयोजित नहीं किया जा सकता। वहीं बहस के लिए कम से कम 24 देशों के समर्थन की जरूरत होती है। ये दोनों विकल्प अति आवश्यक मामले में ही होते हैं। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने इशारों-इशारों में कहा कि यूएन (UN) के उच्च स्तरीय महासभा सत्र में पाकिस्तान अपना स्तर गिराकर फिर कश्मीर मुद्दा उठा सकता है। लेकिन इससे भारत का स्तर ऊंचा होगा।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पिछले महीने ही कहा था कि वे कश्मीर के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र महासभा में उठाएंगे। मीडिया से बातचीत के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए अकबरुद्दीन ने कहा, हमने उन्हें आतंक को मुख्यधारा में लाते देखा है। अब वे नफरत भरे बयानों को संयुक्त राष्ट्र में लाना चाहते हैं। अगर वे यह करना चाहते हैं तो ये उनकी सोच है। लेकिन इससे उनका स्तर गिरेगा। अकबरुद्दीन ने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र में एक देश फिर वही पुराना राग दोहराएगा। हर देश के पास यह विकल्प है कि वह वैश्विक प्लेटफॉर्म पर किस तरह खुद को किस तरह पेश करेगा। कुछ देश अपनी बात रखने में नीचे गिर सकते हैं, लेकिन हमें भरोसा है कि हमारा स्तर ऊपर उठेगा। आप जितना नीचे गिरेंगे, हम उतना ऊपर आएंगे।

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