शहीद लांस नायक नजीर अहमद वानी के शौर्य की कहानी, उनकी पत्नी की जुबानी

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शहीद लांस नायक नजीर अहमद वानी

अशोक चक्र से सम्मानित लांस नायक नजीर अहमद वानी के लिए अपने देश से बड़ा कुछ नहीं था। यह बात हम सभी जानते हैं कि किस तरह उस वीर ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। लेकिन उनकी पत्नी से उनके बारे में सुन कर दिल खुद-ब-खुद उनके शौर्य को सलाम करने लगता है। दरअसल, उनकी पत्नी मेहजबीन अख्तर ने शहीद वानी की यादें साझा की। मेहजबीन ने कहा कि अपने देश के लिए लड़ते हुए युद्ध के मैदान में मरना वानी का सपना था। मेहजबीन ने 15 सितंबर को ‘हीरो ऑफ द नेशन’ कार्यक्रम के दौरान स्टेज से अपना पहला स्पीच देते हुए यह बात कही। वानी ने पिछले साल आतंकवाद के खिलाफ अभियान के दौरान अपनी जान गंवा दी थी।

मरणोपरांत उन्हें सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। मेहजबीन ने कहा कि मुझे अपने पति की शहादत पर बेहद गर्व है क्योंकि उन्होंने अपने देश के लिए अपनी जान दे दी। मैंने अपने पति जैसा बहादुर आदमी कभी नहीं देखा। वह मुझसे कहा करते थे कि वह अपने देश के लिए लड़ते हुए युद्ध के मैदान पर मरना चाहते हैं क्योंकि उनके लिए देश से ऊपर कुछ नहीं था। उन्होंने कहा, मैं उनसे पूछती थी कि वह दूसरे अधिकारियों की तरह घर क्यों नहीं आते हैं। वह हमेशा कहते थे कि मेरे लिए पहले देश और बाकी सब कुछ बाद में आता है। उन्होंने मुझे यह भी बताया कि मैं उनकी शेरनी हूं, मुझे अपना और अपने बच्चों का ख्याल रखना चाहिए और वह देश की देखभाल करेंगे। मेहजबीन ने आगे कहा कि शहीद होने से पहले भी उन्होंने मुठभेड़ के दौरान दूसरे अधिकारियों की जान बचाई थी।

उन्होंने कहा कि मुझे अपने पति पर बहुत गर्व है। जो उन्होंने किया है उसके लिए मेरे बच्चों को अपने पिता पर और देश को भी अपने वीर सपूत पर गर्व है। गौरतलब है कि, 25 नवंबर, 2018 को वानी कश्मीर के बटागुंड के पास हीरापुर गांव में छह आतंकवादियों के खिलाफ आतंकवाद-विरोधी ऑपरेशन पर थे। आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में उन्होंने लश्कर-ए-तैयबा के जिला कमांडर और एक विदेशी आतंकवादी को मार गिराया था। आतंकियों के साथ लड़ाई के दौरान उन्हें कई गोलियां लगीं। उनके सिर में भी गोली लगी। उस गंभीर हालत में लड़ते हुए उन्होंने दूसरे आतंकवादी को घायल कर दिया था। लांस नायक नजीर 2004 में सेना की 162 इन्फेंट्री बटालियन के जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री में शामिल हुए थे। उन्हें 2007 और 2018 में दो बार वीरता के लिए सेना मेडल से सम्मालित किया गया था।

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