झारखंड में 2 खूंखार नक्सलियों ने किया सरेंडर, लाखों के इनामी हैं दोनों

झारखंड के सिमडेगा में दो इनामी नक्सलियों ने सरेंडर किया है। दोनों ही खूंखार नक्सलियों ने सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर हथियार डाले हैं। सरेंडर करने वाले दोनों नक्सली भाकपा माओवादी संगठन से जुड़े थे।

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दोनों नक्सलियों ने गुरुवार को किया सरेंडर।

झारखंड के सिमडेगा में दो इनामी नक्सलियों ने सरेंडर किया है। दोनों ही खूंखार नक्सलियों ने सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर हथियार डाले हैं। सरेंडर करने वाले दोनों नक्सली भाकपा माओवादी संगठन से जुड़े थे। इनमें से एक का नाम है विनोद पंडिट उर्फ विनोद दास। ये भाकपा माओवादी का जोनल कमांडर था। सरेंडर करने वाले दूसरे नक्सली का नाम है गणेश लेहरा उर्फ भगवान। गणेश भाकपा माओवादी का एरिया कमांडर था। विनोद पंडित पांच लाख और गणेश लोहरा पर दो लाख रुपए का इनाम था।

पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दोनों नक्सलियों ने गुरूवार को सीआरपीएफ कमांडेंट के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। पुलिस लगातार दोनों के खिलाफ सर्च अभियान चला रही थी। दोनों पर हत्या, रंगदारी, आगजनी, सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसे आरोप हैं। विनोद पर 17 और भगवान के खिलाफ चार मामले दर्ज हैं।

5 लाख के इनामी विनोद पंडित के खिलाफ कोलेबिरा में 6 मामले दर्ज हैं, वहीं सिमडेगा में 3 मामले दर्ज हैं। इसके अलावा गिरदा, जलडेगा, बोलबा और टांगर थाने में भी अलग-अलग मामले दर्ज हैं। वहीं तीन लाख के इनामी गणेश लोहरा के खिलाफ सिमडेगा में 4 मामले दर्ज हैं। अरसे से पुलिस इन दोनों की तलाश में थी।

पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार सिंह ने बताया कि इन दोनों को ही आत्मसर्पण नीति के तहत तमाम सुविधाएं दी जाएंगी। इसमें घर बनाने के लिए जमीन के साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने के लिए 1.20 लाख रुपए। साथ ही रोजगार प्रशिक्षण के साथ सालभर तक हर महीने 6 हजार रुपए दिए जाएंगे। इसके अलावा परिवार की मुफ्त चिकित्सा, बच्चों की पढ़ाई के लिए अलग से फंड, बीमा जैसी सुविधाएं भी इन जोनों को मिलेंगी।

गौरतलब है कि बीते कुछ सालों में सरेंडर करने वाले नक्सलियों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। इसके पीछे एक तरफ जहां सुरक्षाबलों की चौकसी है वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाएं भी काफी कारगर साबित हुई हैं। इसके अलावा सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर भी बड़ी संख्या में नक्सली हथियार डाल रहे हैं।

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