भारत-चीन सीमा विवाद: 11 घंटे चली सातवें दौर की सैन्य बातचीत, भारत का रुख साफ- ‘गलवान से चीनी सैनिकों की वापसी ही एक मात्र विकल्प’

इस बातचीत के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है‚ लेकिन सूत्रों ने कहा कि एजेंड़ा विवाद के सभी बिन्दुओं से सैनिकों की वापसी के लिए एक प्रारूप को अंतिम रूप देने था।

India China

Talk between India China failed again.

India-China skirmishes 2020:  के बीच पूर्वी लद्दाख में गतिरोध के समाधान के लिए भारत सातवें दौर की सैन्य बातचीत सोमवार देर रात को खत्म हुई। इस बातचीत में चीन से अप्रैल पूर्व की यथास्थिति स्थापित करने और विवाद के सभी बिन्दुओं से चीनी सैनिकों की पूरी तरह वापसी करने को कहा गया। ये बात सरकारी सूत्रों ने कही। उन्होंने बताया कि पूर्वी लद्दाख में कोर कमांडर स्तर की बातचीत दोपहर करीब 12 बजे एलएसी पर चुशूल क्षेत्र में भारतीय इलाके में हुई और 11.30 बजे रात को खत्म हुई।

दोनों देशों (India China) के बीच  5 माह से विवाद जारी

गौरतलब है कि दोनों देशों (India China) के बीच ये सीमा विवाद छठे महीने में प्रवेश कर चुका है और इसके जल्द समाधान के आसार कम ही दिखते हैं‚ क्योंकि भारत और चीन (India China) ने बेहद ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगभग एक लाख सैनिक तैनात कर रखे हैं जो लंबे गतिरोध में डटे रहने की तैयारी है।

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हालांकि इस बातचीत के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है‚ लेकिन सूत्रों ने कहा कि एजेंड़ा विवाद के सभी बिन्दुओं से सैनिकों की वापसी के लिए एक प्रारूप को अंतिम रूप देने था। भारतीय प्रतिनिधमंडल का नेतृत्व लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और विदेश मंत्रालय में पूर्वी एशिया मामलों के संयुक्त सचिव नवीन श्रीवास्तव ने किया। ऐसा माना जाता है कि बातचीत में चीनी विदेश मंत्रालय का एक अधिकारी भी चीनी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा था।

वहीं चीन के साथ जारी गतिरोध को देखते हुये भारतीय नौसेना ने बीस हजार करोड़ रुपए की लागत वाले चार ‘लैंडिंग प्लेटफार्म डॉक’ की खरीद के टेंडर को रद्द कर दिया है। यह खरीद प्रक्रिया लगभग सात साल पहले शुरू की गई थी। लैंडिंग प्लेटफार्म डॉक (एलपीडी) एक प्रकार का युद्धपोत होता है जो जल और थल दोनों सतहों पर काम कर सकता है।

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