सबूत के अभाव में अदालत ने छोड़ा, फिर भी जेल में रहेगा हार्डकोर नक्सली

अदालत में इस नक्सली के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले लिहाजा वो कोर्ट से छूट गया। लेकिन इसके बावजूद भी यह हार्डकोर नक्सली खुली हवा में सांस नहीं ले सकेगा।

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अदालत में इस नक्सली के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले लिहाजा वो कोर्ट से छूट गया। लेकिन इसके बावजूद भी यह हार्डकोर नक्सली (Naxali) खुली हवा में सांस नहीं ले सकेगा।

अदालत में इस नक्सली के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले लिहाजा वह कोर्ट से छूट गया। लेकिन इसके बावजूद यह हार्डकोर नक्सली (Naxali) खुली हवा में सांस नहीं ले सकेगा। झारखंड में लाल आतंक का पर्याय बन चुके मिथिलेश मंडल पर गिरीडीह और दुमका जिले में कई मामले दर्ज हैं। जिला जज नवम नीरज आश्रि की अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में हार्डकोर नक्सली (Naxali) मिथिलेश मंडल को रिहा कर दिया। मिथिलेश अभी दुमका जिले में हुए नक्सली कांड में बंद है। न्यायालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दुमका जेल में उसे निर्णय सुनाया। लेकिन इन दोनों जिलों में उसके खिलाफ कई मामले चल रहे हैं इस कारण वह जेल से अभी बाहर नहीं निकल पाया है ।

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नक्सली मिथिलेश मंडल (फाइल फोटो)।

बता दें कि गिरिडीह कैदी वाहन ब्रेक में भी उसके खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने की स्वीकृति कुछ दिन पहले ही गिरिडीह उपायुक्त ने दी थी। मिथिलेश मंडल पर साल 2009 में बिरनी थाना क्षेत्र में हुई नक्सली घटना में शामिल होने का आरोप है। हार्डकोर नक्सली (Naxali) मिथिलेश के खिलाफ पुलिसकर्मी की हत्या, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम एवं नक्सली गतिविधि की रोकथाम अधिनियम की धारा के तहत केस दर्ज किया गया था।

बता दें कि इस हमले में एक पुलिस जवान की मौत हो गई थी। हालांकि अदालत में अभियोजन की तरफ से ठोस सबूत पेश नहीं किया गया जिसके बल पर उसका दोष साबित नहीं हो सका। न्यायालय ने इसी आधार पर हार्डकोर नक्सली को रिहा कर दिया। बताया जाता है कि मिथिलेश एक खूंखार नक्सली है। साल 2005 के बाद वह माओवादियों से जुड़ा इसके बाद जिले में अधिकांश नक्सली मामलों में उसे आरोपी बनाया गया था।

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मिथिलेश मंडल मुफस्सिल थाना पीरटांड़ गाने बगोदर बिरनी में सक्रिय था। जिले में दर्जनों नक्सली (Naxali) मामलों में इसके खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट न्यायालय में दाखिल किया था। कुछ सालों तक गिरिडीह जेल में रहने के बाद 2012 में कैदी वाहन हमला कांड में वह फरार हो गया था। दुमका पुलिस उसे 2016 में गिरिडीह से गिरफ्तार कर ले गई थी।

बता दें कि मिथिलेश मंडल कई नामों से जाना जाता है जिसमें जगदीश उर्फ मोटा और पूछो मोझु शामिल है। कैदी वाहन ब्रेक कांड के दौरान मिथलेश मण्डल अपने कई नक्सली साथियों के साथ भागने में सफल हुआ था। 4 साल के बाद 28 नवम्बर, 2016 को दुमका पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया गया था। उस दौरान पुलिस ने हार्डकोर नक्सली से 31 लाख 53 हज़ार 300 रुपये सहित एक महंगी कार भी बरामद किए थे।

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