बस्तर: सुरक्षाबलों पर किया था ताबड़तोड़ फायरिंग, दंतेवाड़ा से इनामी नक्सली धराया

बस्तर के दंतेवाड़ा जिला में पुलिस द्वारा चलाया जा रहे नक्सल (Naxal) उन्मूलन अभियान के तहत पुलिस के जवानों को लगातार कामयाबी मिल रही है। जिले में एक के बाद एक नक्सली गिरफ्तार हो रहे हैं।

Naxal

पुलिस और एसटीएफ (STF) की संयुक्त टीम द्वारा पोरो हिड़मा गांव की घेराबंदी कर नक्सली (Naxal) को गिरफ्तार कर लिया गया।

बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में पुलिस द्वारा चलाए जा रहे नक्सल (Naxal) उन्मूलन अभियान के तहत पुलिस के जवानों को लगातार कामयाबी मिल रही है। जिले में एक के बाद एक नक्सली गिरफ्तार हो रहे हैं। 16 जनवरी को दंतेवाड़ा पुलिस को एक और सफलता हाथ लगी, जब पुलिस बल द्वारा एक लाख के इनामी नक्सली को गिरफ्तार किया गया।

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गिरफ्तार इनामी नक्सली मुचाकी मासा।

एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव के मुताबिक, 16 जनवरी की सुबह अरनपुर थाना प्रभारी को मुखबिर द्वारा नक्सली (Naxal) के मौजूदगी की सूचना मिली थी। मुखबिर की सूचना के आधार पर अरनपुर पुलिस और एसटीएफ (STF) की संयुक्त टीम के द्वारा पोरो हिड़मा गांव की घेराबंदी कर नक्सली को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार नक्सली का नाम मुचाकी मासा है और वह डीएकेएमएस अध्यक्ष है। एसपी के अनुसार, नक्सली मुचाकी कई नक्सली वारदातों में शामिल रहा है। अक्टूबर, 2018 को अरनपुर थाना क्षेत्र के समेली ककाड़पारा गांव के जंगल मे पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमला करने और हथियार लूटने की नीयत से बिजली के तार बिछाने की घटना में उसका हाथ था।

इस घटना में करंट लगने से एक जवान घायल हो गया था। जनवरी, 2019 को सीआरपीएफ (CRPF) कैंप कोण्डापारा से मुर्गा बेच कर आ रहे वाहन पर तीर से हमला कर वाहन चालक को घायल करने की घटना में भी वह शामिल था। इसके अलावा सितबंर, 2019 में समेली कुरुम नाला के पास सुरक्षा बल के जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग और आईईडी बलास्ट की घटना में भी इस नक्सली का हाथ था। छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सली मुचाकी मासा पर एक लाख रूपए का इनाम घोषित किया था। बता दें कि बस्तर में नक्सलवाद लगातार कमजोर पड़ रहा है। बीते दो सालों में फोर्स ने उन इलाकों तक पहुंच बना ली है जो पहले नक्सलियों (Naxal) के प्रभाव वाले इलाके समझे जाते थे।

बस्तर में इस साल के शुरू में फोर्स के तीन नए कैंप खोले गए हैं। बड़े केरपे, बोदली और करेमेटा। इन कैंपों के खुलने से न सिर्फ सुरक्षा चाक-चौबंद हुई है बल्कि ग्रामीणों का विश्वास भी बढ़ा है। सुकमा के पालोड़ी और दंतेवाड़ा के पोटाली जैसी रणनीतिक महत्व की जगहों पर कैंप खुलने से नक्सलियों को मैदान छोड़कर भागना पड़ा है। वहीं, आंकड़े भी इस बात की गवाही दे रहे हैं कि अब प्रदेश में नक्सलवाद से अंतिम चरण की लड़ाई चल रही है। राज्य में बीते एक साल में नक्सल (Naxal) घटनाओं में 40 फीसद से ज्यादा की कमी दर्ज की गई है।

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