लाल आतंक से लोहा लेने वाले जांबाजों को मिला वीरता पुरस्कार, अब तक कई नक्सलियों को कर चुके हैं ढेर

गणतंत्र दिवस की की पूर्व संध्या यानी 25 जनवरी को वीरता पुरस्कार की घोषणा हुई। पदकों की इस सूची में नक्सलियों (Naxals) के दांत खट्टे करने वाले जवान भी शामिल हैं। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रहने वाले रमाकांत तिवारी को वीरता पुरस्कार मिला है। आईपीएस कल्याण एलिसेला भी 15 अगस्त को वीरता पुरस्कार से सम्मानित होंगे। एलिसेला 2011 बैच के आईपीएस हैं। 

Naxals
 रमाकांत तिवारी                                                                     आईपीएस कल्याण एलिसेला

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रहने वाले रमाकांत तिवारी को वीरता पुरस्कार मिला है। रमाकांत साल 2012 में बतौर सब इंस्पेक्टर पुलिस में भर्ती हुए। बीजापुर में हुई एक नक्सली मुठभेड़ के दौरान इनके परफॉर्मेंस को देखते हुए इन्हें आउट ऑफ प्रमोशन मिली और ये टीआई बने। रमाकांत के पिता किसान हैं। रमाकांत की पढ़ाई-लिखाई अंबिकापुर में हुई है।

एंबुश तोड़कर नक्सलियों को मार गिराया

उन्होंने बताया, कि साल 2017 में अबूझमाड़ इलाके में मैं अपने साथियों के साथ सर्चिंग कर लौट रहा था। रास्ते में नक्सलियों (Naxals) ने एंबुश लगा रखा था। नक्सलियों के एंबुश को तोड़कर हमने 2 माओवादी को ढेर किया। इतना ही नहीं, रमाकांत को उन्हें अगले 15 अगस्त में एक और वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह सम्मान उन्हें साल 2016 में हुई मुठभेड़ के लिए दिया जाएगा। इसमें 3 माओवादी ढेर हुए थे।

आईपीएस एलिसेला भी होंगे सम्मानित

आईपीएस कल्याण एलिसेला भी 15 अगस्त को वीरता पुरस्कार से सम्मानित होंगे। एलिसेला 2011 बैच के आईपीएस हैं। वे अभी ईओडब्ल्यू में पदस्थ हैं। फरवरी, 2016 में महाराष्ट्र से लगे कुटरू में हुई नक्सली मुठभेड़ में 3 नक्सलियों के खात्में में इस जांबाज आईपीएस का योगदान है। मारे गए नक्सलियों (Naxals) में से 1 नक्सली पर 5 लाख रुपए का इनाम घोषित था। घटनास्थल से नक्सलियों के हथियार भी बरामद हुए।

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