हिट-लिस्ट में शामिल आतंकी को किया ढेर, मिल चुके हैं कई वीरता पुरस्कार, पत्नी भी हैं CRPF में सहायक कमांडेंट

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पुलिस वीरता पदक से सम्मानित सीआरपीएफ (CRPF) के जांबाज कमांडर नरेश कुमार

करन नगर मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए थे, उसकी क्विक रिएक्शन टीम (QRT) को नरेश कुमार ने ही लीड किया था। 15 अगस्त, 2016 को जम्मू-कश्मीर के नौहट्टा इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में भी सीआरपीएफ (CRPF) की (QRT) का नेतृत्व नरेश कुमार ने ही किया था।

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सहायक कमांडेंट नरेश कुमार।

“आतंकियों से मुठभेड़ चल रही होती है और घर से फोन आ जाता है। परिवार वाले पूछते हैं, कैसे हो। जब तक मैं कुछ बोलता, झट से उनका दूसरा सवाल आ जाता है। अरे कहां हो, ये आवाजें कैसी आ रही हैं। उस वक्त मैं उन्हें कहता हूं, कुछ नहीं, एक शादी समारोह में आया हूं, पटाखे छूट रहे हैं। यह बात कोई एक दो बार नहीं, कई बार दोहराई जा चुकी है।” यह कहना है पुलिस वीरता पदक से सम्मानित सीआरपीएफ (CRPF) के जांबाज कमांडर नरेश कुमार का। डीजी डॉ. एपी महेश्वरी ने 28 जनवरी को उन्हें इस पदक से नवाजा।

कश्मीर में मिली पहली पोस्टिंग

सहायक कमांडेंट नरेश कुमार सात साल से सीआरपीएफ (CRPF) में हैं। वे साल 2013 में सीआरपीएफ का हिस्सा बने थे। ट्रेनिंग के बाद उन्हें कश्मीर में पहली पोस्टिंग मिली। उन्होंने कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ कई बड़े ऑपरेशन को लीड किया है। वे घाटी में सीआरपीएफ के विशेष दस्ते में तैनात रहे हैं। नरेश कुमार ने बताया कि हमारी टीम के सदस्यों को एनएसजी (NSG) की तरह ट्रेनिंग दी जाती है।

हिट-लिस्ट में शामिल आतंकी को किया था ढेर

करन नगर मुठभेड़ में जो दो आतंकवादी मारे गए थे, उसकी क्विक रिएक्शन टीम (QRT) को नरेश कुमार ने ही लीड किया था। 15 अगस्त, 2016 को जम्मू-कश्मीर के नौहट्टा इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में भी सीआरपीएफ (CRPF) की (QRT) का नेतृत्व नरेश कुमार ने ही किया था। यहां भी हमारे जवानों ने दो आतंकियों को ढेर कर दिया था। नरेश कुमार की टीम ने ही टॉप 10 आतंकियों की सूची में शामिल लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी शौकत अहमद को मार गिराया था।

घबराओ नहीं, ये तो पटाखों की आवाज है

नरेश कुमार कहते हैं- ऐसा नहीं है कि घरवालों को चिंता नहीं होती। जब वे टीवी पर देखते कि कश्मीर में कोई मुठभेड़ चल रही है और उसमें सीआरपीएफ (CRPF) शामिल है तो उनकी चिंता और बढ़ जाती है। अगर उन्हें टीवी पर मुठभेड़ की कोई फुटेज दिख जाती तो वे ज्यादा ही परेशान हो जाते थे। ऐसे में परिवार का फोन आ ही जाता है। उन्हें फोन पर गोलियों की आवाज सुनाई पड़ती है। मैं कहता हूं कि घबराओ नहीं, ये तो पटाखों की आवाज है। यहां शादी में पटाखे छूटना आम बात है। वे बताते हैं, “चूकि अब मैं सीआरपीएफ मुख्यालय आ गया हूं, इसलिए परिवार की कुछ चिंता कम हुई है।”

पत्नी भी सीआरपीएफ में हैं सहायक कमांडेंट

नरेश कुमार की पत्नी शीतल रावत भी सहायक कमांडेंट है। खास बात है कि वह उनकी बैचमेट है। नरेश कुमार के पिता सेना से रिटायर्ड हैं। उनका चचेरा भाई भी आर्मी में है। उन्हें भी सेना मेडल मिल चुका है। नरेश कुमार के भाई सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्यरत हैं।

मिल चुके हैं कई पुरस्कार

बता दें कि सहायक कमाडेंट नरेश कुमार को इस गणतंत्र दिवस पर पुलिस का वीरता पदक मिला है। पिछले साल भी सीआरपीएफ (CRPF) की 79 वीं वर्षगांठ परेड के अवसर पर तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने नरेश कुमार को उनके पराक्रम और बहादुरी के लिए वीरता पदक से सम्मानित किया था। 2018 में उन्हें दो वीरता पदक मिले थे। इसके अलावा 11 डीजी कॉमेंडेशन डिस्क भी उन्हें मिल चुकी हैं।

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