श्रावणी मेले को लेकर अलर्ट, बड़े नेताओं को अगवा करने की साजिश का खुलासा

17 जुलाई से बिहार के मशहूर श्रावणी मेले की शुरुआत हो रही है। इस मेले को लेकर देश की खुफिया एजेंसियों ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। एजेंसियों को आशंका है कि नक्सली इस मेले को निशाना बना सकते हैं।

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श्रावणी मेले के दौरान नक्सली बड़े कारनामे की फिराक में हैं। सांकेतिक तस्वीर।

17 जुलाई से बिहार के मशहूर श्रावणी मेले की शुरुआत हो रही है। इस मेले को लेकर देश की खुफिया एजेंसियों ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। एजेंसियों को आशंका है कि नक्सली इस मेले को निशाना बना सकते हैं। जी हां, इस बार नक्सली बड़े नेताओं खासकर छत्तीसगढ़ के कुछ राजनेताओं को अगवा करने की साजिश रच रहे हैं। झारखंड के गिरिडीह के बीहड़ों में छिपे शीर्ष नक्सलियों को उनके आकाओं ने नेताओं को अगवा करने या फिर उनका कत्ल करने का फरमान जारी किया है। खबर यह भी है कि मेले की शुरुआत से पहले भागलपुर स्थित सुल्तानगंज से लेकर झारखंड के देवघर तक के कांवड़िया पथ पर कटोरिया के पहाड़ी इलाकों में कुछ नक्सली गतिविधियां भी हुई हैं। जिसकी वजह से नक्सलियों को लेकर आशंका गहरा गई है। जानकारी के मुताबिक, गिरिडीह के जंगल से जमुई के चरका पत्थर जंगल में डेरा डाल चुके भाकपा माओवादी दस्ते ने इसे लेकर बांका-भागलपुर-मुंगेर सीमा से गुजरने वाले कांवड़िया पथ की रेकी भी कर ली है।

दरअसल छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार तथा उत्तर प्रदेश समेत कुछ अन्य राज्यों के नेता हर साल कांवड़ लेकर पैदल सुल्तानगंज से देवघर तक 105 किलोमीटर की यात्रा करते हैं। यह यात्रा बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करने के लिए की जाती है। नक्सली इन्हीं रास्तों के जरिए अपनी साजिश को अंजाम देने की मंशा बना रहे हैं। हालांकि, सुरक्षा बल हर साल कांवड़ यात्रा के दौरान मुस्तैदी से इन रास्तों पर तैनात रहते हैं। सुरक्षा बल पैदल गश्त के अलावा मोबाइल गश्ती के जरिए भी इन रास्तों से होकर जाने वाले कांवड़ियों की रक्षा करते हैं।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि नक्सली बिहार-झारखंड में इन दिनों अपना गुरिल्ला जोन तैयार करने में जुटे हैं। इन्हीं गुरिल्ला जोन के नक्सलियों को कांवड़ यात्रा में गड़बड़ी पैदा करने का हुक्म दिया गया है। बहरहाल, खुफिया एजेंसियों के अलर्ट के बाद सुरक्षा बल पूरी मुस्तैदी के साथ नक्सलियों की योजना को कुचलने में लगे हुए हैं।

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