झारखंड में बढ़े जंगल, हर तरफ मंगल ही मंगल

जंगल है तो झारखंड (Jharkhand)  है। जंगल ही इस क्षेत्र की पहचान है। पिछले कुछ सालों से पूरे देश में यह चिंता उभरकर आई थी कि जंगलों के क्षेत्र कम हो रहे हैं। विाकस की रफ्तार में पेड़ों के अंधाधुंध काटे जाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई थी। जिस हिसाब से पेड़ काटे जा रहे थे उस हिसाब से पौधे लगाये नहीं जा रहे थे। इससे एक तरफ तो जंगलों में रहने वाले जीवों के अस्तित्व पर संकट आ रहा था तो दूसरी तरफ उन जंगली इलाकों में रहने वाले लोगों की आजीविका खतरे में पड़ रही थी। लेकिन अब हालात बदले हैं।

Jharkhand

झारखंड सरकार (Jharkhand Govt.) के लगातार प्रयासों और कई योजनाओं की बदौलत झारखंड में जंगलों का हिस्सा बढ़ा है और हरियाली भी बढ़ी है। इससे जंगल में रहने वाले लोगों की आजीविका के अवसर बढ़े हैं। नदियों के किनारे पौधे लगाने की योजना से एक तरफ तो उनका कटाव कम हुआ है और दूसरी तरफ जल संग्रह संभव हो सका है। साथ ही इसके कारण हरियाली वाले इलाकों का विस्तार संभव हुआ है। इस बदलाव में दो नई चीजें देखने को मिली है। एक तो यह कि रांची, पश्चिमी सिंहभूम और दुमका जैसे जिलों में वनों की रफ्तार बढ़ी है लेकिन उन जिलों में जंगलों के बढ़ने की रफ्तार घट गई है जिन्हें वन्यजीवों के लिहाज से संवेदनशील मानाजाता है। इन जिलों में चतरा, साहिबगंज और पूर्वी सिंहभूम शामिल हैं।

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सूबे के लिए अच्छी बात यह है कि राष्ट्रीय वन नीति 1988 में हरियाली के लिए जो लक्ष्य निर्धारित किया गया था उसे झारखंड (Jharkhand) ने पूरा कर लिया है। इस राज्य में पहली बार जंगल और पेड़ों से भरा हिस्सा बढ़कर राज्य के भौगोलिक क्षेत्रफल का 33.21 प्रतिशत हो गया है। स्टेट आफ फॉरेस्ट रिपोर्ट-2013 की तुलना में 2017 की रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ है कि झारखंड में जंगल और पेड़ों से ढंके इलाके में 0.47 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

एक रिपोर्ट के अनुसार 2013 और 2017 के बीच झारखंड में जंगल और पेड़ों से ढ़के इलाके 373 वर्ग किलोमीटर (37,300 हेक्टेयर) बढ़ गये। इसी प्रकार वर्ष 2013 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में जंगलों का हिस्सा 15.97 करोड़ घन मीटर था, जो 2017 में बढ़कर 18.2 करोड घन मीटर हो गया है। यह लगभग 14 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी है।

इसी तरह वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अनुसार राज्य में बांस पाए जाने वाले क्षेत्रों का रकबा 867 किलोमीटर से बढ़कर 4470 वर्ग किलोमीटर हो गया है। जंगली इलाकों में जलाशयों का कुल रकबा 147 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 211 वर्ग किलोमीटर हो गया है। यानि लगभग 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

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