Republic Day 2020: कहां हुई थी गणतंत्र दिवस की पहली परेड, जानिए रोचक बातें…

71वें गणतंत्र दिवस (Republic Day 2020) की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। गणतंत्र दिवस (Republic Day) पर हर साल राजपथ पर परेड होती है। गणतंत्र दिवस समारोह के आयोजन का सफर और इसका इतिहास बड़ा ही रोचक है।

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गणतंत्र दिवस (Republic Day) समारोह के आयोजन का सफर और इसका इतिहास बड़ा ही रोचक है।

71वें गणतंत्र दिवस (Republic Day 2020) की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। गणतंत्र दिवस (Republic Day) पर हर साल राजपथ पर परेड होती है। गणतंत्र दिवस समारोह के आयोजन का सफर और इसका इतिहास बड़ा ही रोचक है। क्या आप जानते हैं कि गणतंत्र दिवस की परेड के आयोजन की पूरी जिम्मेदारी कौन निभाता है? क्या आप जानते हैं कि गणतंत्र दिवस की परेड राजपथ पर नहीं हुआ करती थी?

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गणतंत्र दिवस समारोह के आयोजन का सफर और इसका इतिहास बड़ा ही रोचक है।

Republic Day 2020: 71वें गणतंत्र दिवस की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। गणतंत्र दिवस (Republic Day) पर हर साल राजपथ पर परेड होती है। गणतंत्र दिवस समारोह के आयोजन का सफर और इसका इतिहास बड़ा ही रोचक है। आइए यहां हम आपको बताते हैं गणतंत्र दिवस के बारे में कुछ रोचक तथ्य-

1- गणतंत्र दिवस की भव्य परेड देश की एकता, अखंडता, सांस्कृतिक विविधता और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए आयोजित की जाती है।

2- गणतंत्र दिवस की भव्य परेड देखने के लिए 26 जनवरी के मौके पर राजपथ से लेकर लाल किले तक के परेड मार्ग पर प्रत्येक वर्ष दो लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ जुटती है। इसमें राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से लेकर आम और खास सभी शामिल होते हैं।

3- गणतंत्र दिवस आयोजन की जिम्मेदारी रक्षा मंत्रालय की होती है। आयोजन में लगभग 70 अन्य विभाग व संगठन रक्षा मंत्रालय की मदद करते हैं। परेड के सुचारू संचालन के लिए सेना के हजारों जवान समेत अलग-अलग विभागों के भी काफी संख्या में लोग लगाए जाते हैं।

4- 26 जनवरी पर गणतंत्र दिवस (Republic Day) परेड की शुरुआत साल 1950 में आजाद भारत का संविधान लागू होने के साथ हुई थी। साल 1950 से 1954 तक गणतंत्र दिवस की परेड राजपथ पर न होकर, चार अलग-अलग जगहों पर हुई थीं। 1950 से 1954 तक गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन क्रमशः इरविन स्टेडियम (नेशनल स्टेडियम), किंग्सवे, लाल किला और रामलीला मैदान में हुआ था।

5- 1955 से गणतंत्र दिवस (Republic Day) परेड का आयोजन राजपथ पर शुरू किया गया। तब राजपथ को ‘किंग्सवे’ के नाम से जाना जाता था। तभी से राजपथ ही इस आयोजन की स्थाई जगह बन चुका है।

6- गणतंत्र दिवस समारोह में हर साल किसी न किसी देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति या शासक को विशेष अतिथि के तौर पर भारत सरकार द्वारा आमंत्रित किया जाता है।

7- 26 जनवरी, 1950 को पहले गणतंत्र दिवस (Republic Day) समारोह में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति डॉ. सुकर्णो विशेष अतिथि बने थे। वहीं, 26 जनवरी 1955 में राजपथ पर आयोजित पहले गणतंत्र दिवस समारोह में पाकिस्तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद विशेष अतिथि बने थे।

8- गणतंत्र दिवस समारोह की शुरूआत राष्ट्रपति के आगमन के साथ होती है। राष्ट्रपति अपनी विशेष कार से, विशेष घुड़सवार अंगरक्षकों के साथ आते हैं। ये घुड़सवार अंगरक्षक राष्ट्रपति के काफिले में उनकी कार के चारों तरफ चलते हैं।

9- राष्ट्रपति द्वारा ध्वाजारोहण के वक्त उनके ये विशेष घुड़सवार अंगरक्षक समेत वहां मौजूद सभी लोग सावधान की मुद्रा में खड़े होकर तिरंगे को सलामी देते हैं और इसी के साथ राष्ट्रगान की शुरूआत होती है।

10- राष्ट्रगान के दौरान 21 तोपों की सलामी दी जाती है। 21 तोपों की ये सलामी राष्ट्रगान की शुरूआत से शुरू होती है और 52 सेकेंड के राष्ट्रगान के खत्म होने के साथ पूरी हो जाती है।

11- 21 तोपों की सलामी वास्तव में भारतीय सेना की 7 तोपों द्वारा दी जाती है, जिन्हें पौन्डर्स कहा जाता है। प्रत्येक तोप से तीन राउंड फायरिंग होती है। ये तोपें 1941 में बनी थीं और सेना के सभी औपचारिक कार्यक्रमों में इन्हें शामिल करने की परंपरा है।

12- गणतंत्र दिवस (Republic Day) की परेड सुबह करीब नौ बजे ध्वाजारोहण के बाद शुरू होती है, लेकिन परेड में शामिल सभी सैनिक, अर्धसैनिक बल और एनसीसी व स्काउट जैसे विशेष दल सुबह करीब तीन-चार बजे ही राजपथ पर पहुंच जाते हैं।

13- 26 जनवरी की परेड में शामिल होने से पहले सभी दल लगभग 600 घंटों का अभ्यास कर चुके होते हैं। परेड में शामिल सभी दल करीब सात महीने पहले, जुलाई से ही तैयारी में जुट जाते हैं।

14- परेड में शामिल सभी दल नवंबर तक अपनी रेजिमेंट में अलग-अलग अभ्यास करते हैं। दिसंबर से ये सभी दल संयुक्त परेड का अभ्यास करने के लिए दिल्ली पहुंच जाते हैं।

15- परेड में शक्ति प्रदर्शन के लिए शामिल होने वाले टैंकों, हथियार, बख्तरबंद गाड़ियों और अन्य अत्याधुनिक उपकरणों आदि के लिए इंडिया गेट परिसर में एक विशेष शिविर बनाया जाता है।

16- इन सभी टैंकों, हथियार, बख्तरबंद गाड़ियों और अन्य अत्याधुनिक उपकरणों की जांच और रंग-रोगन आदि का कार्य 10 चरण में पूरा किया जाता है।

17- 26 जनवरी से पहले फुल ड्रेस रिहर्सल और समारोह के दौरान होने वाली परेड राजपथ से लाल किले तक मार्च करते हुए जाती है। रिहर्सल के दौरान परेड 12 किमी का सफर तय करती हैं, जबकि गणतंत्र दिवस की परेड 9 किमी की दूरी तय करती हैं।

18- सर्वश्रेष्ठ परेड की ट्रॉफी देने के लिए पूरे रास्ते में कई जगहों पर जजों को बिठाया जाता है। ये जज प्रत्येक दल को 200 मापदंडों पर नंबर देते हैं। इसके आधार पर सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दल का चुनाव होता है। किसी भी दल के लिए इस ट्रॉफी को जीतना बड़े गौरव की बात होती है।

19- परेड में शामिल होने वाले प्रत्येक जवान को चार स्तर की सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता है। उनके हथियारों की भी कई चरणों में गहन जांच होती है। जांच का मुख्य उद्देश्य ये सुनिश्चित करना होता है कि किसी जवान के हथियार में कोई जिंदा कारतूस न हो।

20- परेड में शामिल सभी झांकियां 5 किमी प्रति घंटा की नीयत रफ्तार से चलती हैं, ताकि उनके बीच उचित दूरी बनी रहे और लोग आसानी से उन्हें देख सकें। इन झांकियों के चालक एक छोटी से खिड़की से ही आगे का रास्ता देखते हैं, क्योंकि सामने का लगभग पूरा शीशा सजावट से ढका रहता है।

21- इस बार की गणतंत्र दिवस (Republic Day 2020) परेड में कुल 22 झांकियां शामिल हो रही हैं। इनमें से 16 झांकियां राज्यों की और 6 झांकियां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की होगी। इस साल सभी झांकियों की थीम एक ही रहेगी- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती।

22- राजपथ पर मार्च पास्ट खत्म होने का बाद परेड का सबसे रोचक हिस्सा शुरू होता है, जिसे ‘फ्लाई पास्ट’ कहते हैं। इसकी जिम्मेदारी वायु सेना की पश्चिमी कमान के पास होती है।

23- ‘फ्लाई पास्ट’ में 41 फाइटर प्लेन और हेलिकॉप्टर शामिल होते हैं, जो वायुसेना के अलग-अलग केंद्रों से उड़ान भरते हैं। इनका तालमेल इतना सटीक होता है कि ये तय समय और क्रम में ही राजपथ पर पहुंचते हैं। आकाश में इनकी कलाबाजी और रंग-बिरंगे धुएं से बनाई गई आकृतियां बड़ी मनमोहक होती हैं।

24- भारत सरकार ने साल 2001 में गणतंत्र दिवस समारोह पर करीब 145 करोड़ रुपये खर्च किए थे। वहीं, साल 2014 में इस समारोह पर 320 करोड़ रुपए खर्च हुए।

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