बिना तैयारी के लागू लॉकडाउन से जानवर भी परेशान, खाने-पीने के पड़े लाले

लॉकडाउन (Lockdown) के कारण कर्मचारी अपने कार्यक्षेत्र में नहीं पहुंच पा रहे हैं और चिड़ियाघरों में सप्लाई करने वाले लोग भी सप्लाई कम कर पा रहे हैं।

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देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) की मार इंसानों पर ही नहीं जानवरों पर भी पड़ रही है। सबका ध्यान इंसानों को बचाने की तरफ है‚ लेकिन जानवर जो चिड़ियाघरों (Zoo) में कैद हैं‚ उन्हें भोजन और पानी के लाले पड़ गए हैं। लॉकडाउन (Lockdown) के कारण कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर नहीं जा पा रहे हैं। चिड़ियाघरों में रखे गए जानवरों की खस्ताहाल की खबरें आने के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि चिड़ियाघरों (Zoo) में जानवरों के खाने और पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करें।

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कोरोना वायरस (Coronavirus) की चेन ऑफ ट्रांसमिशन तोड़ने के लिए सामाजिक दूरी यानी सोशल डिस्टेंस की नीति अपनाई जा रही है। इस सिलसिले में पर्यटन स्थल और चिड़ियाघरों (Zoo) को बंद कर दिया गया है।

ऐतिहासिक इमारतों को बंद करने का असर राजस्व कमाई पर जरूर पड़ा है‚ लेकिन चिड़ियाघर (Zoo) को बंद करने का असर राजस्व के साथ–साथ बेजुबान जानवरों पर भी पड़ा है।

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लॉकडाउन (Lockdown) के कारण कर्मचारी अपने कार्यक्षेत्र में नहीं पहुंच पा रहे हैं और चिड़ियाघरों में सप्लाई करने वाले लोग भी सप्लाई कम कर पा रहे हैं।

देशभर से शिकायतें मिलने के बाद पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय चिड़ियाघर (Zoo) प्राधिकरण ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर चिड़ियाघरों में जानवरों के लिए आवश्यक भोजन और पीने के पानी की व्यवस्था करने को कहा है।

पत्र में कहा गया है कि धारा 144 लागू होने से जो प्रतिबंध लगाए गए हैं‚ उसमें चिड़ियाघरों (Zoo) के लिए आपूर्ति किए जाने वाले भोजन और पानी को आवश्यक वस्तु में शामिल किया जाए और सप्लाई करने वाले वाहनों को छूट दी जाए।

पत्र में मुख्य सचिवों को कहा गया है कि स्थानीय प्रशासन और राज्यों के चीफ वार्डन वाइल्ड लाइफ को आवश्यक निर्देश जारी करें।

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